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दोनों भौंहों के बीच वाली जगह को कहते हैं क्या? ज्यादातर लोग नहीं जानते इसका सही नाम

क्या आप जानते हैं कि दोनों भौंहों के बीच मौजूद छोटी सी जगह का भी एक खास नाम है? इसे ‘ग्लैबेला’ (Glabella) कहा जाता है। चेहरे का यह छोटा हिस्सा सिर्फ दिखने में ही खास नहीं है, बल्कि हमारे भाव-भंगिमाओं में भी भूमिका निभाता है। गुस्सा, चिंता या ध्यान लगाने पर यहां की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं

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Hariyali Teej 2026: समृद्ध परंपराओं, प्रकृति-प्रेम और दांपत्य जीवन की पवित्रता का अनुपम उत्सव है हरियाली तीज

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना विशेष महत्व है। इन्हीं पावन पर्वों में हरियाली तीज का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन से जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, तब प्रकृति का यह अनुपम सौंदर्य हरियाली तीज के उत्सव को और भी मनोहारी बना देता है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए सौभाग्य, प्रेम, समृद्धि और आनंद का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी दिव्य मिलन की स्मृति में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएँ योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं और माता पार्वती तथा भगवान शिव की पूजा करती हैं।

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हरियाली तीज का उत्सव पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएँ हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, चूड़ियाँ पहनती हैं और पारंपरिक आभूषणों से श्रृंगार करती हैं। बाग-बगीचों में झूले डाले जाते हैं, लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य के माध्यम से उत्सव की खुशी व्यक्त की जाती है। विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में इस पर्व की भव्यता देखने योग्य होती है। अनेक स्थानों पर भगवान शिव और माता पार्वती की शोभायात्राएँ भी निकाली जाती हैं।

यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। वर्षा ऋतु में चारों ओर फैली हरियाली हमें वृक्षों और वनस्पतियों के महत्व का स्मरण कराती है। हरियाली तीज हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने तथा पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रेरणा देती है।

आज के आधुनिक जीवन में भी हरियाली तीज की प्रासंगिकता बनी हुई है। यह पर्व परिवार में प्रेम, विश्वास और सौहार्द को मजबूत करता है तथा हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। नई पीढ़ी को भी इस पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। हरियाली तीज भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं, प्रकृति-प्रेम और दांपत्य जीवन की पवित्रता का अनुपम उत्सव है। यह पर्व जीवन में उल्लास, प्रेम, आस्था और हरियाली का संदेश देता है।

- शुभा दुबे

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  Sports

वैभव सूर्यवंशी से लेकर अभिषेक शर्मा तक... 7 लेफ्ट हैंड क्रिकेटर्स, जो बन चुके हैं भारतीय क्रिकेट का फ्यूचर

7 left hand cricketers Indian cricket future: आज के दौर में टीम इंडिया में लेफ्ट हैंड बल्लेबाजों का दबदबा और क्रेज पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है. जब मैदान पर कोई वामहस्त बल्लेबाज क्रीज पर उतरता है, तो गेंदबाजों की रणनीति से लेकर कप्तान की फील्डिंग तक सब कुछ बदल जाता है. वैभव सूर्यवंशी जैसे 'जेन-अल्फा' के सबसे युवा सितारे से लेकर ऋषभ पंत और यशस्वी जायसवाल जैसे इंटरनेशनल क्रिकेट में गदर मचा रहे स्थापित दिग्गजों तक.आज भारतीय क्रिकेट के पास ऐसे लेफ्ट-हैंडर खिलाड़ियों की एक बेहद आक्रामक फौज मौजूद है, जो विरोधी टीमों के पसीने छुड़ा देती है. Thu, 13 Aug 2026 21:39:29 +0530

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