राजस्थान में आज भी रेतीले तूफान का अलर्ट:बारिश-आंधी से उत्तर भारत के राज्यों को गर्मी से राहत मिली
राजस्थान के 5 जिलों श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़ और सीकर में शनिवार दोपहर रेतीला तूफान आया। इसके कारण करीब 200 वर्ग किलोमीटर का एरिया प्रभावित हुआ। हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर के रेतीले तूफान की शुरुआत हुई थी। इस दौरान 56kmph की रफ्तार से आंधी चली। रेतीले तूफान के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया। शनिवार को पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में भी बारिश हुई। दोनों ही राज्यों के अधिकतम तापमान में 8°C-10°C की गिरावट आई। चंडीगढ़ में भी 18.2mm बारिश दर्ज की गई। यहां अधिकतम तापमान 25.3°C रहा, जो सामान्य से 14°C कम था। उत्तर प्रदेश के बहराइच, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी, नजीबाबाद और मेरठ में 3mm से 18mm बारिश हुई। लखनऊ में बारिश नहीं हुई, लेकिन अधिकतम तापमान 34°C रहा, जो सामान्य से 6.1°C था। मुरादाबाद राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.5°C रहा। झारखंड के रांची में एयरपोर्ट पर खराब मौसम के कारण 4 फ्लाइट को डायवर्ट किया गया। राज्यों से बारिश-रेतीले तूफान की तस्वीरें… मानसून 7 दिनों में केरलम पहुंचेगा मौसम विभाग ने बताया कि मानसून अगले 7 दिनों में केरलम पहुंच सकता है। हालांकि विभाग ने इस साल मानसून के सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान भी जताया है। IMD के मुताबिक जून से सितंबर तक देश में औसतन सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इस बार मानसून सीजन में 78 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है। देश में सामान्य मानसूनी बारिश का औसत 87 सेंटीमीटर माना जाता है। मौसम विभाग ने कहा कि बिहार, यूपी में सामान्य बारिश हो सकती है, लेकिन बाकी कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। खासकर बारिश पर निर्भर खेती वाले इलाकों में मानसून कमजोर रह सकता है। अगले दो दिन के मौसम का हाल 1 जून: 2 जून:
वन नेशन वन इलेक्शन पर सुरक्षित रास्ता तलाश रही सरकार:दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव; पहले 20 राज्यों के चुनाव एक साथ करने पर विचार
केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्शन के लिए सुरक्षित रास्ता तलाश रही है। इसके लिए बनी जेपीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, समिति 'टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल' पर विचार कर रही है, जिससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने या विधानसभाओं के कार्यकाल में बहुत बड़ी कटौती करने की जरूरत न पड़े। पूरे देश को एक साथ चुनावी चक्र में लाने के बजाय दो चरणों- 2029 और 2034 में बढ़ने का विकल्प सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है। पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ करीब 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। जेपीसी की अवधि 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ाई जा चुकी है। ऐसे में 2029 से चुनावी चक्र एक करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं, 2034 तक पूरे देश को साझा चुनावी चक्र में लाने का लक्ष्य है। संविधान में गुंजाइश है, लेकिन सहमति पर जोर लॉ कमीशन के पूर्व सदस्य और मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के डीन आनंद पालीवाल ने कहा कि एक देश-एक चुनाव' को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं। कुछ राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में कार्यकाल बढ़ाने के विकल्प भी हैं। भारत में पहले भी विशेष परिस्थितियों में लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव किए गए हैं। हालांकि किसी भी व्यापक बदलाव के लिए संसद द्वारा आवश्यक कानूनी प्रावधान और राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। 1967 तक साथ हुए चुनाव 1952 से 1967 तक यानी चार बार लोकसभा व अधिकांश विधानसभा चुनाव साथ हुए। 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें गिरने लगीं। 1968-69 में कई विधानसभाएं भंग हुईं और 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई। इससे देश का साझा चुनावी चक्र बिखर गया। 1971 में लोकसभा के मध्यावधि चुनाव हुए और राज्यों में चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। बाद में गठबंधन सरकारों, राष्ट्रपति शासन और समय से पहले चुनाव ने अंतर और बढ़ा दिया। विधि आयोग और नीति आयोग समय-समय पर चुनावी चक्र एक करने की सिफारिश करते रहे हैं। पिछले साल महाराष्ट्र और उत्तराखंड का दौरा कर चुकी JPC महाराष्ट्र- JPC ने 17-18 मई 2025 को महाराष्ट्र दौरा किया। वहां मुख्यमंत्री, राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) और रेगुलेटरी संस्थाओं से बातचीत की गई। समिति का मकसद यह समझना था कि एक साथ चुनाव कराने से प्रशासन, खर्च और शासन पर क्या असर पड़ेगा। उत्तराखंड- JPC 19-21 मई 2025 के बीच देहरादून और उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों में गई। समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्य प्रशासन और अन्य संगठनों से चर्चा की। धामी ने JPC से कहा कि बार-बार चुनाव होने से पिछले 3 साल में करीब 175 दिन आचार संहिता के कारण सरकारी काम प्रभावित हुए। उनका दावा था कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हों तो 30-35% तक खर्च बच सकता है। क्योंकि, पहाड़ी राज्यों में बार-बार चुनाव कराना मुश्किल होता है। वहीं, चारधाम यात्रा, बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। JPC को रिपोर्ट 2026 के मानसून सेशन के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक सबमिट करनी है। रिपोर्ट में सभी कंसलटेशंस, प्रेजेंटेशंस और मीटिंग के के इनपुट्स को इकट्ठा करके सिफारिशें दी जाएंगी। अभी कोई फाइनल डेडलाइन या सबमिशन डेट पब्लिश नहीं हुई है। JPC की रिपोर्ट के बाद संसद में आगे चर्चा/वोटिंग होगी। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में पैनल का गठन 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। -------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… वन नेशन, वन इलेक्शन- JPC की टीम गुजरात पहुंची:प्रियंका गांधी समेत 39 सदस्य सभी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात करेंगे वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर ठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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