Explainer: क्या एक साथ दो देशों की मिल सकती है नागरिकता? भारत में हैं ये नियम
Dual Citizenship Law: पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है. उत्तर 24 परगना के बिथारी-हाकिमपुर बॉर्डर पर बिना वैध दस्तावेजों के लौट रहे कई बांग्लादेशियों को बीएसएफ ने हिरासत में लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की.
इसपर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आने वाले लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. ऐसे व्यक्तियों को पुलिस हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए बीएसएफ को सौंपेगी.
ऐसे में भारत में नागरिकता के नियमों को लेकर आपके जहन में कई सवाल भी उठते होंगे. आज हम आपको एक ऐसे नियम के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें एक व्यक्ति एक साथ दो देशों का कानूनी नागरिक बना रह सकता है.
क्या भारत में है ऐसा नियम?
दरअसल, दुनिया के कई देश ऐसे हैं जो अपने नागरिकों को दोहरी नागरिकता रखने की आजादी देते हैं.लेकिन जब बात भारत की आती है तो यहां की कानूनी व्यवस्था इस मामले में पूरी तरह अलग और बेहद सख्त है. भारतीय कानून किसी भी नागरिक को एक साथ दो देशों का पासपोर्ट या नागरिकता रखने की इजाजत बिल्कुल नहीं देता है.
क्या होती है दोहरी नागरिकता
दोहरी नागरिकता एक ऐसी कानूनी स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति एक ही समय में दो अलग-अलग देशों का वैध नागरिक माना जाता है. इस स्थिति में उस व्यक्ति को दोनों देशों में रहने, काम करने, पढ़ाई करने, यात्रा करने और वहां की स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने का पूरा अधिकार मिलता है. उसे दोनों देशों में समान अवसर मिलते हैं और वह दोनों ही जगह का पासपोर्ट इस्तेमाल कर सकता है. वैश्विक स्तर पर कई विकसित देश इस व्यवस्था को स्वीकार करते हैं ताकि प्रवासी नागरिक दोनों देशों से जुड़े रह सकें.
संविधान का नागरिकता पर कड़ा रुख
भारत में नागरिकता से जुड़े नियम नागरिकता अधिनियम 1955 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत तय किए जाते हैं. संविधान का अनुच्छेद 9 देश में एकल नागरिकता के सिद्धांत को पूरी तरह स्थापित करता है. इस कानून के मुताबिक अगर कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता उसी समय समाप्त हो जाती है.
भारत सरकार नहीं देती कानूनी मान्यता
भारत सरकार एक ही समय में दोहरी राष्ट्रीयता की अवधारणा को कानूनी मान्यता नहीं देती है. यह नियम देश की एकता, अखंडता को बनाए रखने और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है. साफ शब्दों में कहें तो कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से एक साथ भारत और किसी अन्य देश का नागरिक नहीं रह सकता है.
भारत में क्यों नहीं है दोहरी नागरिकता?
भारत द्वारा दोहरी नागरिकता की अनुमति न देने के पीछे कई महत्वपूर्ण दार्शनिक और कानूनी कारण शामिल हैं. सरकार का मानना है कि दोहरी नागरिकता होने से कानूनन कई जटिलताएं खड़ी हो सकती हैं, विशेषकर देश के प्रति निष्ठा और वफादारी के मामले में. एक ही नागरिकता का नियम यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक पूरी तरह से अपने देश और इसके हितों के प्रति समर्पित रहें.
कानूनी प्रक्रियाओं में आ सकती हैं बाधाएं
इसके अलावा दोहरी नागरिकता से टैक्स व्यवस्था, आव्रजन और कानूनी प्रक्रियाओं में बड़ी बाधाएं आ सकती हैं. जब एक व्यक्ति के पास दो देशों के अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं, तो राजनयिक सुरक्षा और सैन्य सेवा जैसे मामलों में विवाद की स्थिति बन सकती है. एकल नागरिकता नीति से प्रशासनिक काम भी आसान रहता है और पासपोर्ट जारी करने से लेकर देश के कानूनों को लागू करना सरल होता है. भारत अपनी आजादी के समय से ही एक संप्रभु और एकीकृत राष्ट्रीय पहचान के सिद्धांत पर चल रहा है.
विदेशी नागरिकता लेने पर क्या होता है?
आमतौर पर लोग कई अलग-अलग तरीकों से किसी दूसरे देश की नागरिकता हासिल करते हैं. इसमें वहां जन्म लेने पर, शादी करने पर, निवेश करने पर या फिर वहां रहकर प्राकृतिक रूप से नागरिकता पाना शामिल है. कई बार ऐसी परिस्थितियां भी बनती हैं जहां कोई व्यक्ति अनजाने में या बिना सोचे-समझे विदेशी नागरिकता ले लेता है. उदाहरण के लिए कुछ देशों में वहां पैदा होने वाले बच्चों को अपने आप नागरिकता मिल जाती है. अगर माता-पिला भारतीय हैं और बच्चा विदेश में पैदा हुआ है, तो वह तकनीकी रूप से दोनों देशों की श्रेणी में आ सकता है.
ऐसी स्थिति में बच्चे के बड़े होने पर उसे किसी एक देश की नागरिकता को चुनना पड़ता है. इसी तरह यदि कोई भारतीय नौकरी या शादी के कारण विदेश में नागरिकता ले लेता है, तो उसे तुरंत भारतीय अधिकारियों को सूचित करना होता है और अपना भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करना पड़ता है. विदेशी नागरिकता मिलते ही भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाती है.
OCI कार्ड के रूप में बड़ा विकल्प
भले ही भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है, लेकिन विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सहूलियत के लिए सरकार ने एक खास व्यवस्था की है जिसे ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया यानी ओसीआई कहा जाता है. यह दोहरी नागरिकता तो नहीं है और न ही इसमें वोट डालने का अधिकार मिलता है, लेकिन यह कार्डधारकों को भारत में रहने और काम करने के लिए कई विशेष अधिकार जरूर देता है.
ओसीआई कार्डधारक बिना वीजा के जब चाहें भारत आ सकते हैं. वे देश में खेती की जमीन को छोड़कर अन्य व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियां खरीद सकते हैं और उन्हें भारत में शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने का पूरा मौका मिलता है.
कौन ले सकता है OCI कार्ड?
यह कार्ड उन लोगों को मिलता है जो खुद या जिनके माता-पिता या दादा-दादी कभी भारत के नागरिक रहे हों. जो व्यक्ति 26 जनवरी 1950 या उसके बाद भारत का नागरिक बनने की योग्यता रखता था, वह इसके लिए आवेदन कर सकता है. इसके अलावा भारतीय नागरिकों या ओसीआई कार्डधारकों के विदेशी जीवनसाथी भी इसके लिए पात्र होते हैं, बशर्ते उनकी शादी को कम से कम दो साल का समय हो चुका हो.
विवादों से बचने के लिए जरूरी कदम
अगर आप एक भारतीय नागरिक हैं और किसी दूसरे देश की नागरिकता लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको दोनों देशों के कानूनों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए. विदेशी नागरिकता मिलते ही आपको तुरंत भारतीय दूतावास में जाकर अपना भारतीय पासपोर्ट सरेंडर कर देना चाहिए ताकि भविष्य में किसी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े. भारत से अपना जुड़ाव बनाए रखने के लिए ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन करना सबसे सुरक्षित और बेहतरीन जरिया माना जाता है.
FAQs-
भारत की नागरिकता के क्या हैं नियम?
केंद्र सरकार ने नागरिकता आवेदन प्रक्रिया में नया बदलाव किया है. गृह मंत्रालय द्वारा जारी नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 के तहत अब आवेदकों को यह बताना अनिवार्य होगा कि उनके पास पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश का वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट है या नहीं. पासपोर्ट होने पर उसकी पूरी जानकारी देनी होगी.
क्या भारत दोहरी नागरिकता शुरू करने जा रहा है?
भारत में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था नहीं है. संविधान के अनुसार कोई व्यक्ति एक साथ भारतीय नागरिकता और किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं रख सकता. फिलहाल इस नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
क्या भारत में दोहरी नागरिकता एक अपराध है?
भारत में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था लागू नहीं है. संविधान और मौजूदा कानूनों के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ भारत तथा किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं रख सकता.
क्या दोहरी नागरिकता होना जोखिम भरा है?
दोहरी नागरिकता से व्यक्ति को दो देशों में अधिकार और सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन इसके साथ कर और कानूनी जिम्मेदारियां भी बढ़ सकती हैं. कई देश अब भी दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देते.
सबसे कठिन नागरिकता प्राप्त करने के लिए क्या है?
दुनिया के कुछ देशों की नागरिकता हासिल करना बेहद कठिन माना जाता है. इनमें कतर, वेटिकन सिटी, लिकटेंस्टीन और कई खाड़ी देश शामिल हैं, जहां नागरिकता के नियम काफी सख्त हैं.
गाजियाबाद में मिला पैरा एथलीट का शव, जानें कैसे गई जान?
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पैरा एथलीट का शव मिलने से हड़कंप मच गया है. राष्ट्रीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी का शव मिला है. गाजियाबाद के साईं उपवन सोसाइटी में शव बरामद किया गया. बताया जा रहा है कि सुबह चिराग त्यागी दिल्ली से अपने घर मुरादनगर के लिए निकले थे. पुलिस को उनकी पीठ में छेद का निशान मिला है, आशंका है कि यह गोली लगने का निशान हो सकता है.
न्यूजनेशन रिपोर्टर ने बताया कि पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां पर साईं उपवन में उनका शव मिला और इस बात की जानकारी पुलिस को सुबह 7:00 बजे दी गई. चिराग त्यागी राष्ट्रीय पैरा एथलीट हैं. वे बसंतपुर सैतली गांव के रहने वाले हैं.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















