Stock Market Opening: शेयर बाजार में हरियाली, सेंसेक्स 75,400 के पार; अडानी पोर्ट्स के शेयरों में उछाल
Share Market Opening Today: सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूती के साथ सत्र की शुरुआत की है। शुक्रवार को 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 98.38 अंक या 0.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,497.10 के स्तर पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 भी 41.8 अंक जोड़कर 23,731.40 के स्तर पर पहुंचने में सफल रहा। पिछले सत्र में सेंसेक्स 74,608.98 और निफ्टी 23,689.60 पर बंद हुए थे।
इन शेयरों में दिखी हलचल
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स पैक से अडानी पोर्ट्स (Adani Ports) सबसे आगे रहा, जिसके शेयरों में 1.90 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा एक्सिस बैंक, टाइटन, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस जैसे शेयर भी हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। दूसरी ओर, गिरावट वाले शेयरों में भारतीय स्टेट बैंक (SBIN) टॉप लूजर रहा, जो 1.06 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके साथ ही महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), आईटीसी और बीईएल के शेयरों में भी बिकवाली देखी जा रही है।
छोटे और मझोले शेयरों का प्रदर्शन
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक सूचकांकों (Broader Indices) में भी तेजी का रुख बना हुआ है। BSE मिडकैप सिलेक्ट इंडेक्स में जहां 19.92 अंकों की बढ़त दिखी, वहीं BSE स्मॉलकैप सिलेक्ट इंडेक्स 46.37 अंक या 0.55 प्रतिशत उछलकर 8,436.32 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला 'इंडिया विक्स' (India VIX) भी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18.57 के करीब है, जो स्थिरता के शुरुआती संकेत दे रहा है।
एशियाई बाजारों और विदेशी निवेशकों का रुख
एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं, जबकि शंघाई का SSE कंपोजिट इंडेक्स बढ़त में है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बात करें तो उन्होंने पिछले सत्र में 187.46 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 684.33 करोड़ रुपये का निवेश किया। गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) ने भी सुबह 34 अंकों की मामूली बढ़त के साथ सपाट शुरुआत के संकेत दिए थे।
महंगाई का दोहरा झटका: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG भी हुई महंगी, ईरान युद्ध और हॉर्मुज संकट ने बिगाड़ा बजट
CNG Price Hike: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी का असर अब आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के ठीक बाद, शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब CNG की नई कीमत 77.09 रुपये से बढ़कर 79.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने मुंबई और आसपास के इलाकों (MMR) में भी CNG के दाम 2 रुपये बढ़ाए थे, जहाँ अब कीमत 84 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी भारी उछाल
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को ही पेट्रोल की कीमतों में 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की है। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में अब पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये, मुंबई में 106.68 रुपये और चेन्नई में 103.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह डीजल के दाम भी कोलकाता में 95.13 रुपये, मुंबई में 93.14 रुपये और चेन्नई में 95.25 रुपये प्रति लीटर तक जा पहुँचे हैं।
Hike in fuel prices; Petrol prices rise from Rs 94.77 to Rs 97.77 per litre, while diesel prices increase from Rs 87.67 to Rs 90.67 per litre pic.twitter.com/sLk3rf6E42
— ANI (@ANI) May 15, 2026
ईरान युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर संकट
ईंधन की कीमतों में आ रही इस तेजी का मुख्य कारण 28 फरवरी, 2026 से शुरू हुआ ईरान-अमेरिका युद्ध है। इस संघर्ष के चलते पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से बाधित हो गई है। हॉर्मुज जलसंधि, जहाँ से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस प्राप्त करता है, वहाँ नाकेबंदी जारी है। युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी में भारत जो कच्चा तेल आयात करता था, उसकी औसत कीमत 69 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं और अब यह औसतन 113-114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं।
तेल कंपनियों की मजबूरी और पुराना इतिहास
सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने इनपुट लागत बढ़ने के बावजूद पिछले 11 हफ्तों से कीमतों को स्थिर रखा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और घाटे के कारण अब बोझ ग्राहकों पर डालना उनकी वित्तीय मजबूरी बन गया है। अप्रैल 2022 से तेल की कीमतें काफी हद तक जमी हुई थीं, सिवाय मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दी गई 2 रुपये की मामूली राहत के। 2022-23 के शुरुआती महीनों में भी कंपनियों ने भारी घाटा सहा था, जिसकी भरपाई बाद में की गई, लेकिन वर्तमान युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और घरेलू ईंधन दरों को फिर से संकट में डाल दिया है।
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