Indian Economy: मिडिल ईस्ट तनाव और टूटते रुपये के बावजूद भारत का दिखा दम, 6.2 अरब डॉलर बढ़ा फॉरेक्स रिजर्व
Indian Economy: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर बढ़ा इजाफा देखने को मिला। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 8 मई को खत्म हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.295 अरब डॉलर बढ़कर 696.988 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे पहले वाले हफ्ते में इसमें 7.794 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी और कुल भंडार घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया था।
आरबीआई के आंकड़ों से साफ है कि लगातार दबाव के बाद अब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर से सुधार देखने को मिल रहा। खास बात यह है कि इस साल फरवरी के आखिर में भारत का फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक तनाव के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा। ऐसे में आरबीआई को डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसकी वजह से रिजर्व में कई हफ्तों तक गिरावट देखी गई।
इस बार बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान गोल्ड रिजर्व का रहा। आरबीआई के मुताबिक, देश के स्वर्ण भंडार की वैल्यू 5.637 अरब डॉलर बढ़कर 120.853 अरब डॉलर हो गई। वहीं विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भी 562 मिलियन डॉलर बढ़कर 552.387 अरब डॉलर पहुंच गईं।
एफसीए विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। इसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता। डॉलर के मुकाबले इन मुद्राओं की मजबूती या कमजोरी का असर सीधे रिजर्व के आंकड़ों पर पड़ता है।
इसके अलावा, भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स में भी बढ़ोतरी हुई है। यह 84 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.873 अरब डॉलर हो गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की रिजर्व पोजिशन भी 12 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.875 अरब डॉलर पहुंच गई।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से रुपये को स्थिरता मिलती है और वैश्विक संकट या आयात दबाव की स्थिति में देश की वित्तीय ताकत मजबूत बनी रहती। खासतौर पर ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं, यह आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत देने वाले माने जा रहे हैं।
(प्रियंका कुमारी)
Export Income: अप्रैल में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 28.4 अरब डॉलर, एक्सपोर्ट में 10 साल की बड़ी छलांग
भारत का व्यापार घाटा अप्रैल महीने में बढ़कर 28.38 अरब डॉलर पहुंच गया। मार्च में यह आंकड़ा 20.67 अरब डॉलर था। आयात में तेज बढ़ोतरी के कारण व्यापार घाटा बढ़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि देश के निर्यात में शानदार उछाल देखने को मिला।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 43.56 अरब डॉलर रहा जबकि मार्च में यह 38.92 अरब डॉलर था। दूसरी तरफ आयात बढ़कर 71.94 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मार्च में 59.59 अरब डॉलर था।
भारत के एक्सपोर्ट में 13 फीसदी की बढ़ोतरी
सालाना आधार पर देखें तो अप्रैल में भारत के माल निर्यात में 13.78 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मंत्रालय ने इसे पिछले 10 साल के सबसे बेहतर मासिक प्रदर्शन में से एक बताया है। वहीं मर्चेंडाइज इंपोर्ट में भी 10.03 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सर्विस सेक्टर में भी एक्सपोर्ट बढ़ा
सेवा क्षेत्र ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। अप्रैल में सर्विस एक्सपोर्ट बढ़कर 37.24 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी महीने 32.85 अरब डॉलर था। वहीं सर्विस इंपोर्ट 16.66 अरब डॉलर रहा।
अगर कुल व्यापार यानी सामान और सेवाओं को मिलाकर देखें तो अप्रैल में कुल निर्यात 80.80 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 13.59 प्रतिशत ज्यादा है। कुल आयात 88.61 अरब डॉलर रहा। हालांकि कुल व्यापार घाटा घटकर 7.81 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले साल 11.16 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम और पोल्ट्री सेक्टर एक्सपोर्ट ग्रोथ के बड़े कारण रहे। पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 34.66 प्रतिशत बढ़कर 9.59 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 40.31 प्रतिशत बढ़कर 5.18 अरब डॉलर रहा। इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट भी 8.76 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर पहुंच गया।
डेयरी उत्पादों के निर्यात में 48 फीसदी का इजाफा
मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में 48 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई, जबकि दवा और फार्मा एक्सपोर्ट 7.12 प्रतिशत बढ़कर 2.66 अरब डॉलर रहा। हालांकि पश्चिम एशिया के साथ व्यापार में गिरावट देखने को मिली। अप्रैल में इस क्षेत्र को निर्यात 28 प्रतिशत घटा जबकि वहां से आयात में 30 प्रतिशत की कमी आई।
सोना और चांदी पर बढ़ी आयात ड्यूटी का असर भी दिखने लगा है। अप्रैल में गोल्ड इंपोर्ट 5.63 अरब डॉलर रहा, जो पिछले महीने के मुकाबले 84 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार का मानना है कि ऊंची ड्यूटी से सोने की खपत आधारित मांग में कमी आ सकती है। वहीं चीन, रूस, ओमान, पेरू और सऊदी अरब से आयात में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तरफ कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में 10 प्रतिशत की गिरावट आई।
(प्रियंका कुमारी)
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