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एवी पॉलीमर्स का स्टॉक स्प्लिट और बोनस शेयर देने का प्लान, बोर्ड मीटिंग में होगा फैसला

एवी पॉलीमर्स का बोर्ड स्टॉक स्प्लिट, बोनस शेयर और ग्रीन टेक्नोलॉजी कारोबार में एंट्री जैसे अहम प्रस्तावों पर फैसला करेगा। जानिए कंपनी की भविष्य की रणनीति और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब हो सकता है।

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Karnataka Politics: क्यों डीके शिवकुमार को कहा जाता है कांग्रेस का 'संकटमोचक'? कैसे बने कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद नेता

कांग्रेस जब भी किसी बड़े राजनीतिक संकट में फंसती है तो कांग्रेस आलाकमान सबसे पहले जिसको याद करता है, वह है- डीके शिवकुमार. कर्नाटक के इस नेता को सिर्फ एक क्षेत्रीय नेता नहीं बल्कि ऐसा रणनीतिकार माना जाता है, जो हर एक मुश्किल हालत में राजनीतिक समीकरण को अपने पक्ष में बदलने का मादा रखता है. फिर चाहे चुनौती सरकार बचाने की हो या फिर चुनावी रणनीति तैयाय करने की या बागी विधायकों को बचाकर रखने की. हर स्थिति में कांग्रेस आलाकमान डीके शिवकुमार को जरूर याद करता है. इसी वजह से उन्हें कांग्रेस का संकटमोचक कहा जाने लगा है.  

आइये जानते हैं, उन स्थितियों के बारे में जिन वजहों से उन्हें कांग्रेस का संकटमोचक कहा जाने लगा है. 

गुजरात राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल को जिताया

सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. भाजपा की सेंधमारी से बचाने के लिए डीके शिवकुमार को कमान सौंपी गई. शिवकुमार गुजरात कांग्रेस के सभी 42 विधायकों को अपने साथ बेंगलुरू लेकर गए और ईगलटन रिसॉर्ट में सुरक्षित रखा. शिवकुमार 42 विधायकों के सामने एक मजबूत ढाल बनकर खड़े हो गए. तमाम दबावों के बावजूद उन्होंने पार्टी विधायकों को सुरक्षित रखा, जिस वजह से अहमद पटेल राज्यसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए.  

वर्ष 2002 का महाराष्ट्र सरकार संकट  

साल 2002 में महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन वाली सरकार थी. मुख्यमंत्री थे कांग्रेस के विलासराव देशमुख. जेडीएस और कुछ निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिस वजह से पार्टी अल्पमत में आ गई थी. ऐसी स्थिति में फिर एंट्री होती है डीके शिवकुमार की. शिवकुमार करीब 40 विधायकों को बेंगलुरू के ईगलटन गोल्फ रिसॉर्ट पहुंचे. यहां विधायकों का बाहरी दुनिया से पूरा नाता कट गया. उन्होंने विधायकों की हर एक जरूरत का ख्याल रखा. इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव वाले दिन 13 जून 2002 शिवकुमार खुद सभी विधायकों महाराष्ट्र विधानसभा लेकर पहुंचे. विलासराव देशमुख सरकार ने विश्वास मत जीत लिया. ऐसे शिवकुमार ने कांग्रेस की सरकार गिरने से बचा ली. 

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनाई

कर्नाटक विधानसभा 2018 के नतीजे आए. भापा 104 सीटों के साथ प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि, भाजपा जादुई आंकड़े से दूर रह गई. मौका का फायदा उठाकर कांग्रेस और जेडीएस ने तुरंत गठबंधन का ऐलान कर दिया. कांग्रेस के पास 78 विधायक थे तो जेडीएस के पास 37 विधायकों का समर्थन था. राज्यपाल ने बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दिया और बहुमत साबित करने का वक्त दिया. भाजपा को सिर्फ 8 विधायकों की जरूरत थी, जिस वजह से कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को बचाना बड़ी चुनौती थी. डीके फिर से मैदान में उतरे और देवेगौड़ा परिवार को साथ मिलकर संयुक्त रणनीति बनाई और पड़ोसी राज्य हैदराबाद के तेलंगाना के होटल में शिफ्ट कर दिया. हर एक विधायकों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर येदियुरुप्पा को बहुमत साबित करने के लिए कहा लेकिन भाजपा बहुमत साबित नहीं कर पाया और मतदान से पहले ही येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर गठबंधन सरकार बनाई. 

मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बचाने की कोशिश की

मार्च 2020 में मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने विद्रोह कर दिया, जिस वजह से मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर काले बादल छा गए थे. सिंधिया समर्थक 22 कांग्रेस विधायकों ने अचानक से इस्तीफा दे दिया और सभी मध्य प्रदेश से गायब हो गए. गायब हुए 22 बागी विधायकों को बेंगलुरु के एक आलीशान होटल में ठहराया गया. कांग्रेस आलाकमान ने इन विधायकों से संपर्क साधने और उन्हें मनाने की जिम्मेदारी फिर से शिवकुमार को दी. उन्होंने विधायकों को मनाने में जी जीन लगा दी हालांकि, भाजपा शासित राज्य होने की वजह से वे विधायकों से संपर्क नहीं कर पाए लेकिन उन्होंने आखिरी मिनट तक उनसे बात करने की कोशिश की. शिवकुमार के इस कार्य ने उन्हें गांधी परिवार का और अधिक विश्वसनीय बना दिया.  

प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर तक नेटवर्क

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 'डिजिटल यूथ' और बूथ स्तर पर 'प्रजा ध्वनि' जैसे जमीनी अभियान चलाए. वे राज्य के हर नेताओं को नाम से जानते हैं. ओल्ड मैसूर क्षेत्र में वोक्कालिगा समुदाय पर उनकी मजबूत पकड़ है, जिससे बूथ स्तर पर कांग्रेस का कैडर बेहद आक्रामक और सक्रिय है.

मुश्किल हालात में भी पार्टी को एकजुट रखना

साल 2019 में जब वे Money Laundering के मामले में तिहाड़ जेल में बंद थे, तब भी उन्होंने पार्टी बदलने या झुकने के बजाय कानूनी लड़ाई चुनी. उनके इस रुख ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा. सिद्धारमैया और उनके बीच अक्सर मुख्यमंत्री पद को लेकर कड़ा मुकाबला रहा है, लेकिन शिवकुमार ने कभी भी इस अंतर्विरोध को सड़क पर नहीं आने दिया. उन्होंने हर मुश्किल वक्त में पार्टी हित को आगे रखा.

चुनाव और संगठन दोनों के लिए महत्वपूर्ण

शिवकुमार को चुनाव का 'फाइनेंशियल और लॉजिस्टिकल' मास्टरमाइंड माना जाता है. सही वक्त पर सही जगह संसाधनों का इस्तेमाल करने में वे माहिर माने जाते हैं. कनकपुरा निर्वाचन क्षेत्र से वे लगातार अपराजेय रहे हैं. वहीं, राज्य में जब भी कोई कठिन उपचुनाव होता है तो पार्टी कमान उन्हें सौंपती है. वे हारी हुई बाजी को भी जीत में बदल देते हैं.

हाईकमान के भरोसेमंद नेताओं में गिनती

शिवकुमार पर गांधी परिवार को पूर्ण विश्वास है. फिर चाहे वह सोनिया गांधी हो या फिर राहुल गांधी या प्रियंका गांधी हर किसी को उन पर भरोसा है. अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव के दौरान, जब शिवकुमार पर केंद्रीय एजेंसियों का भारी दबाव था उसके बाद भी वे पीछे नहीं हटे और पार्टी का पूरा साथ दिया. आज सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना या देश के किसी भी राज्य में जब भी कांग्रेस सरकार पर संकट आता है, गांधी परिवार सबसे पहले डीके शिवकुमार को ही जिम्मेदारी सौंपता है।

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनेंगे डीके शिवकुमार

कर्नाटक की राजनीति से जुड़ा शनिवार को एक बड़ा अपडेट सामने आया है. डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो चुका है. विधायक दल के नेता के रूप में सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिसे अब मंजूर कर लिया है. विधायक दल की मीटिंग में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया. AICC के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल ने डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुने जाने का ऐलान किया है. अब वे जल्द सीएम पद की शपथ ले सकते हैं.  

 

 

 

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