द हंड्रेड में आईपीएल का फॉर्मूला फेल:महंगे टिकटों से खाली स्टेडियम, भड़के फैंस; अगले 3 साल में बंद हो सकती है लीग
इंग्लैंड की 100 गेंदों वाली चर्चित लीग द हंड्रेड का छठा सीजन इस समय एक बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। एक तरफ हैरी ब्रुक और जोस बटलर जैसे स्टार खिलाड़ी अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ टूर्नामेंट की लगातार कम होती लोकप्रियता आयोजकों की नींद उड़ा रही है। भारी-भरकम निवेश और आईपीएल फ्रेंचाइजियों की एंट्री के बावजूद द हंड्रेड को दर्शकों से बेहद निराशाजनक प्रतिक्रिया मिली है। आलम यह है कि शुरुआती मैचों में दर्शकों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 20 से 27 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण स्थानीय पहचान का खोना माना जा रहा है। आईपीएल मालिकों ने टूर्नामेंट में भारी निवेश किया है, लेकिन इसके साथ ही टीमों का रंग-रूप, जर्सी और नाम भी पूरी तरह बदल दिया गया है। ओवल इनविंसिबल्स अब एमआई लंदन बन गई है, मैनचेस्टर ओरिजिनल्स को मैनचेस्टर सुपर जायंट्स और नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स को सनराइजर्स लीड्स नाम दे दिया गया है। इंग्लैंड के क्रिकेट फैंस अपनी स्थानीय टीमों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं। अचानक से जर्सी का रंग और टीम का नाम बदलने से दर्शक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। दर्शकों की बेरुखी का दूसरा कारण टिकटों के बढ़ते दाम हैं। शुरुआती सीजनों में जिन मैचों के लिए परिवारों और बच्चों को फ्री पास बांटे जाते थे, अब उनके लिए करीब 5800 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। इसके विपरीत, इंग्लैंड के पारंपरिक काउंटी और टी20 ब्लास्ट में दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है। यॉर्कशायर और लंकाशायर के बीच हुए टी20 ब्लास्ट मैच में 16,500 दर्शकों के साथ स्टेडियम खचाखच भरा था, जबकि द हंड्रेड में हैरी ब्रुक की पारी देखने बमुश्किल 9000 लोग स्टेडियम पहुंचे। सवाल उठ रहे हैं कि क्या द हंड्रेड अगले तीन साल भी अपना अस्तित्व बचा पाएगा? हालांकि, निवेशकों को उम्मीद है कि जब भविष्य में टूर्नामेंट का विस्तार होगा और शायद भारतीय खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति मिलेगी, तब टीवी और कमर्शियल वैल्यू कई गुना बढ़ जाएगी। छोटे-बड़े क्लबों में आर्थिक असमानता पैदा कर रही लीग आर्थिक मोर्चे पर भी यह टूर्नामेंट इंग्लिश काउंटी में एक बड़ी खाई पैदा कर रहा है। द हंड्रेड की मेजबानी न करने वाले छोटे काउंटी क्लबों को ईसीबी की तरफ से लगभग 300 करोड़ रुपए की एकमुश्त रकम मिली है। इससे वे अपनी सुविधाओं को बेहतर बना रहे हैं। लेकिन जानकारों को डर है कि लंबे समय में मेजबान टीमें इतनी अमीर हो जाएंगी कि छोटे और बड़े काउंटी क्लबों के बीच की आर्थिक असमानता बढ़ जाएगी।
आज से रोज होगा एअर इंडिया पायलट्स का ड्रग टेस्ट:फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के पायलट का डोप टेस्ट पॉजिटिव मिलने के बाद एक्शन
एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस अपने सभी पायलटों का ड्रग टेस्ट कराएगी। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पायलटों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट (नशीले पदार्थों की जांच) आज से ही शुरू होगा। इतना ही नहीं एयरलाइन्स यह भी जांच करेंगी कि पायलटों ने किसी तरह प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल तो नहीं किया है। यह फैसला पिछले हफ्ते फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के साइकोएक्टिव टेस्ट की जांच में पॉजिटिव मिलने के बाद लिया गया है। दोनों एयरलाइंस में टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाले 5,000 से ज्यादा पायलट हैं। ट्रेनिंग के दौरान भी होगी पायलट्स की जांच दोनों एयरलाइंस ने पायलटों को भेजे एक इंटरनल मैसेज में कहा कि मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित सभी पदार्थों और दवाओं की पूरी जांच कराने का फैसला लिया गया है। यह जांच गुरुग्राम एकेडमी में ट्रेनिंग के साथ-साथ की जाएगी। इसके अलावा फ्लाइट के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर, एयरलाइंस के ऑफिस या संबंधित बेस से तय जगहों पर भी टेस्ट होंगे। एयरलाइंस के मुताबिक, यह पहल सुरक्षा के सबसे ऊंचे मानकों को बनाए रखने के लिए पहले से की जा रही है। इसका मकसद यात्रियों को एयरलाइन्स पर वापस भरोसा दिलाना भी है। फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में 24 लोग घायल हुए थे 4 अगस्त को फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हवा में हलचल के बाद अचानक 300 फीट नीचे आ गया था। इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे। प्लेन में 145 लोग सवार थे। इनमें 137 यात्री और 8 क्रू मेंबर शामिल थे। फ्लाइट के कैप्टन की कन्फर्मेटरी स्क्रीनिंग साइकोएक्टिव ड्रग के लिए पॉजिटिव आई थी। पायलट के शरीर में साइकोएक्टिव ड्रग गांजा मिला था।
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