Kaala Hiran Poster Out | सलमान खान-लॉरेंस बिश्नोई की दुश्मनी और शिकार मामले की फिल्मी कहानी
बॉलीवुड और अपराध की दुनिया के बीच का टकराव अक्सर सिनेमाई पर्दों पर सुर्खियां बटोरता रहा है, लेकिन इस बार असल ज़िंदगी की एक ऐसी दुश्मनी बड़े पर्दे पर उतरने के लिए तैयार है जिसने सालों से देश को झकझोर कर रखा है। सुपरस्टार सलमान खान, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और 1998 का काला हिरण शिकार मामला—इन तीनों धुरियों के इर्द-गिर्द बुनी गई आने वाली फिल्म ‘काला हिरण’ का आधिकारिक पोस्टर शुक्रवार को जारी कर दिया गया है। यह फिल्म केवल एक अदालती लड़ाई की कहानी नहीं है, बल्कि यह क्राइम थ्रिलर और हाई-वोल्टेज कोर्टरूम ड्रामा का एक अनूठा संगम है।
इसे भी पढ़ें: Karan Johar ने Shah Rukh Khan- Alia Bhatt को किया अनफॉलो, सिर्फ प्रियंका चोपड़ा को छोड़ा, ट्रोल होने पर दिया ये करारा जवाब
फिल्म के बारे में बात करते हुए प्रोड्यूसर अमित जानी ने कहा, “1998 में जोधपुर के काकानी गांव में सलमान खान द्वारा काले हिरण के शिकार के मामले में कोर्टरूम का ड्रामा, क्राइम, थ्रिलर, लॉरेंस बिश्नोई और सलमान खान के बीच की दुश्मनी—इस पूरे घटनाक्रम को एक फिल्म के रूप में शूट किया गया है। फिल्म की शूटिंग संभल, मुरादाबाद और उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में हुई है।”
उन्होंने आगे बताया, “बॉलीवुड के जो कलाकार जोधपुर आए थे—सैफ अली खान, सलमान खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे, सतीश शाह और अन्य लोग—वे शूटिंग के दौरान साथ थे। उस समय जो शिकार हुआ था, सलमान खान की गिरफ्तारी और उन्हें मिली सज़ा—यह सब फिल्म में दिखाया गया है। और इसके पोस्टर का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा था। लोग लंबे समय से सलमान खान, लॉरेंस बिश्नोई और हिरण के शिकार के मामले पर आधारित एक फिल्मी कहानी का इंतज़ार कर रहे थे। 20 जून को हम इसका पहला लुक, यानी टीज़र रिलीज़ करने जा रहे हैं।”
इसे भी पढ़ें: जबरदस्त केमिस्ट्री और किलर स्टाइल, Cocktail 2 के प्रमोशन में Shahid-Kriti-Rashmika ने लूटी लाइमलाइट
लॉरेंस बिश्नोई, सलमान खान के पीछे इसलिए पड़ा है ताकि वह काले हिरण के अवैध शिकार का बदला ले सके। बिश्नोई समुदाय काले हिरण को पवित्र मानता है। बिश्नोई उन लोगों को निशाना बना रहा है जो सुपरस्टार के करीब हैं। अक्टूबर 2024 में, राजनेता बाबा सिद्दीकी—जो सलमान के करीबी थे—की मुंबई के बांद्रा इलाके में उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लॉरेंस बिश्नोई के गैंग ने इस राजनेता पर हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली थी।
हाथों में पाकिस्तान का झंडा लिए नहीं दिखेंगे ‘चाचा क्रिकेट:500 मैचों में बढ़ाया हौसला; संन्यास का ऐलान,1998 से कर रहे थे टीम को सपोर्ट
लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में अगले हफ्ते जब पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरा वनडे खेला जाएगा, तब मैदान में एक चेहरा ऐसा भी होगा जिसे देखकर करोड़ों पाकिस्तानी भावुक हो जाएंगे। हरे रंग का कुर्ता, टोपी, हाथ में पाकिस्तान का झंडा और चेहरे पर वही मुस्कान। यह होंगे ‘चाचा क्रिकेट’। 77 साल के अब्दुल जलील, जिन्हें पूरी दुनिया चाचा क्रिकेट के नाम से जानती है, इस मैच के बाद पाकिस्तान में मैचों में चीयर करना छोड़ देंगे। करीब पांच दशक तक टीम के साथ हर जीत-हार में खड़े रहने वाले चाचा अब रिटायरमेंट की तैयारी कर रहे हैं। 1968-69 में लाहौर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट देखकर उन्हें क्रिकेट से ऐसा प्यार हुआ कि जिंदगी ही बदल गई। बाद में नौकरी के लिए यूएई गए, लेकिन पाकिस्तान का मैच देखने के लिए अबु धाबी से शारजाह तक तीन-तीन बसें बदलकर पहुंचते थे। धीरे-धीरे उनका हरा पहनावा और जोश भरा अंदाज पाकिस्तान क्रिकेट की पहचान बन गया। 1996 में उन्हें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने शुभंकर घोषित किया। साल 1998 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी जिंदगी पाकिस्तान क्रिकेट को समर्पित कर दी। 1999 वर्ल्ड कप में वे इंग्लैंड तक पहुंचे। इसके बाद दुनिया के लगभग हर बड़े क्रिकेट मैदान में पाकिस्तान का झंडा लहराते दिखे। चाचा कहते हैं कि उन्होंने 500 मैचों में टीम को चीयर करने का सपना देखा था, जो पूरा हो चुका है। अब उनका सपना सियालकोट में एक रेस्टोरेंट और क्रिकेट म्यूजियम खोलने का है, जहां वह जुटाए गए अपने यादगार सामान को रखेंगे। हालांकि, टीम के हालिया खराब फॉर्म के कारण वे श्रीलंका में 2026 टी20 वर्ल्ड कप में टीम का समर्थन करने नहीं गए। भले ही हालिया प्रदर्शन खराब हो, लेकिन चाचा क्रिकेट ने पाक के दबदबे का सुनहरा दौर भी करीब से देखा है। उन्हें आज भी 1986 में जावेद मियांदाद का आखिरी गेंद पर छक्का याद है। वहीं, 2011 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल (मोहाली) और 2024 टी20 वर्ल्ड कप (न्यूयॉर्क) में भारत से हार उनके दिल में दर्द छोड़ गई। लेकिन चाचा क्रिकेट अब भी वही बात दोहराते हैं- ‘कभी खुशी, कभी गम... कभी तुम, कभी हम। खेल में ऐसा होता है।’ शायद यही वजह है कि चाचा क्रिकेट सिर्फ एक फैन नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट की चलती-फिरती याद बन चुके हैं।


















.jpg)




