पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हमला, निहंग ने कृपाण से किया वार; अस्पताल में भर्ती
महाराष्ट्र में पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री पर हमला बड़ा हमला हो गया है. उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है. मामले में सीएम देवेंद्र फडणवीस एक्शन मोड में आ गए हैं. उन्होंने घटना की जानकारी ली.
#WATCH | Nanded, Maharashtra | Former Deputy CM of Punjab, Sukhbir Singh Badal rushed to a hospital after being attacked by a Nihang inside Nanded Gurudwara. He has sustained injuries to his hand. pic.twitter.com/PnO2n4wGe9
— ANI (@ANI) August 13, 2026
Explainer: कुरिल द्वीपों पर रूस-जापान में क्यों है विवाद? पुतिन के दौरे से फिर गरमाया 80 साल पुराना मुद्दा
Kuril Islands Dispute: जापान और रूस के बीच द्वीपों का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. एक दो नहीं पूरे चार चार दक्षिणी कुरिल द्वीपों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. ये द्वीप जापान के होक्काइडो और रूस के कामचटका प्रायद्वीप के बीच स्थित कुरिल द्वीप समूह का हिस्सा हैं. ओखोत्स्क सागर को प्रशांत महासागर से अलग करते हैं. आइए समझते हैं कि पूरा विवाद क्या है.
जापान और रूस के बीच कुरिल द्वीपों का विवाद मुख्य रूप से 1951 की सैन फ्रांसिस्को शांति संधि और उसके बाद हुए समझौतों की अलग-अलग व्याख्या पर टिका है. संधि में जापान ने कुरिल द्वीपों पर अपने अधिकार और दावे छोड़ने की बात स्वीकार की थी, लेकिन इसमें यह साफ नहीं किया गया था कि इन द्वीपों पर सोवियत संघ की संप्रभुता को मान्यता दी गई है या नहीं.
जापान का है ये तर्क
जापान का तर्क है कि विवादित चार द्वीपों में से कुछ कुरिल द्वीप समूह का हिस्सा ही नहीं हैं, इसलिए संधि उन पर लागू नहीं होती. वहीं रूस का कहना है कि युद्ध के बाद हुए समझौतों के तहत इन द्वीपों पर उसका अधिकार तय हो चुका था. 1956 में दोनों देशों ने संयुक्त घोषणा के जरिए युद्ध की स्थिति खत्म कर दी, लेकिन शांति संधि नहीं हो सकी. उस समय सोवियत संघ ने जापान को शिकोतान और हाबोमाई के छोटे द्वीप लौटाने की पेशकश की थी, लेकिन जापान इटुरुप और कुनाशीर जैसे दो बड़े द्वीपों समेत अधिक क्षेत्र वापस चाहता था. दोनों देशों की मांगों में यही अंतर आज तक इस विवाद के बने रहने की बड़ी वजह है.
1855 में हुई पहली संधि
रूस और जापान के बीच सखालिन और कुरिल द्वीपों को लेकर सीमा तय करने वाला पहला प्रमुख समझौता 1855 की शिमोदा संधि थी. इस संधि के तहत दोनों देशों ने तय किया था कि रूस और जापान की सीमा इटुरुप और उरुप द्वीपों के बीच से गुजरेगी. इटुरुप और उसके दक्षिण में स्थित द्वीपों को जापान के अधिकार में माना गया, जबकि उरुप और उससे उत्तर के कुरिल द्वीप रूस के अधीन रहे. कुनाशिरी, शिकोटन और हाबोमाई का संधि में अलग से उल्लेख नहीं किया गया था, लेकिन उस समय इन्हें जापान का हिस्सा माना जाता था. वहीं, सखालिन द्वीप को लेकर दोनों देशों ने तय किया था कि उसका बंटवारा नहीं होगा और वह रूस-जापान के साझा नियंत्रण में रहेगा.
19वीं सदीं तक हैं विवाद की जड़ें
रूस और जापान के बीच कुरिल द्वीपों और सखालिन को लेकर विवाद की जड़ें 19वीं सदी में हुए समझौतों तक जाती हैं. 1875 की सेंट पीटर्सबर्ग संधि में दोनों देशों ने क्षेत्र बदलने पर सहमति जताई थी. जापान ने सखालिन पर अपना दावा छोड़ दिया, जबकि रूस ने पूरे कुरिल द्वीप समूह पर अपने अधिकार जापान को सौंप दिए. हालांकि, संधि के आधिकारिक फ्रांसीसी पाठ में अनुवाद की कुछ गड़बड़ियों के कारण बाद में यह विवाद बना रहा कि कुरिल द्वीप समूह में कौन-कौन से द्वीप शामिल हैं.
1905-05 में रूस की हुई हार
साल 1904-05 के रूस-जापान युद्ध में रूस की हार हुई. युद्ध के बाद 1905 की पोर्ट्समाउथ संधि के तहत सखालिन द्वीप का दक्षिणी हिस्सा जापान को मिल गया. वहीं, 1917 की रूसी क्रांति के बाद गृहयुद्ध के दौरान जापान ने रूस के सुदूर पूर्व के कुछ इलाकों में सैनिक भेजकर कब्जा किया था, लेकिन उसने इन क्षेत्रों को आधिकारिक तौर पर अपने देश में शामिल नहीं किया और 1920 के दशक के मध्य तक वहां से अपनी सेना हटा ली.
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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का हाल
कुरिल द्वीपों को लेकर आज का रूस-जापान विवाद मुख्य रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद हुए समझौतों की अलग-अलग व्याख्या से जुड़ा है. 1945 में हुए याल्टा समझौते में अमेरिका, ब्रिटेन और सोवियत संघ ने जापान के खिलाफ युद्ध में सोवियत भागीदारी की शर्तों पर सहमति बनाई थी. इसमें तय किया गया था कि युद्ध में शामिल होने के बदले सोवियत संघ को दक्षिणी सखालिन और उससे जुड़े द्वीप वापस मिलेंगे, जबकि कुरिल द्वीप समूह सोवियत संघ को सौंपा जाएगा. बाद में पॉट्सडैम घोषणा और 1951 की सैन फ्रांसिस्को शांति संधि की अलग-अलग व्याख्याओं ने इस सवाल को और जटिल बना दिया कि इन समझौतों के तहत वास्तव में किन द्वीपों पर किसका अधिकार तय हुआ था. यही मतभेद आगे चलकर रूस और जापान के बीच मौजूदा क्षेत्रीय विवाद की बड़ी वजह बने.
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