नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। देश भर में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। ऐसे में कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर (एसी) चलाने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन एसी को लेकर लोगों के मन में कई भ्रम फैले हुए हैं। सबसे आम भ्रम यह है कि एसी तभी अच्छा कूलिंग देता है जब उसे 18 डिग्री सेल्सियस पर सेट किया जाए।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन भ्रमों को दूर करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, एसी को 24 डिग्री सेल्सियस पर सेट करने से कमरे में आरामदायक ठंडक मिलती है और बिजली की खपत भी काफी कम हो जाती है। हर एक डिग्री तापमान बढ़ाने से लगभग 6 प्रतिशत बिजली बचाई जा सकती है। यानी 18 डिग्री की जगह 24 डिग्री पर चलाने से आप बिना किसी असुविधा के बिजली बिल में अच्छी बचत कर सकते हैं।
एसी का सही उपयोग न सिर्फ बिजली बिल घटाएगा बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी मदद करेगा। जलवायु परिवर्तन के दौर में छोटी-छोटी आदतें बड़े बदलाव ला सकती हैं।
मंत्रालय का कहना है कि “समझदारी से कूल रहें, जोर लगाकर नहीं।” एसी को बहुत कम तापमान पर चलाने से न सिर्फ बिजली ज्यादा खर्च होती है बल्कि सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है। अचानक गर्मी से ठंडे कमरे में जाना सर्दी-जुकाम और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
एक और बड़ा भ्रम स्टैंडबाय मोड को लेकर है। कई लोग सोचते हैं कि टीवी या एसी को रिमोट से बंद करने के बाद वह बिजली नहीं खाता। लेकिन वास्तव में ‘स्टैंडबाय मोड’ में भी ये उपकरण लगातार बिजली खींचते रहते हैं। मंत्रालय ने सलाह दी है कि उपयोग के बाद एसी और टीवी का प्लग दीवार के सॉकेट से निकाल दें। इससे अनावश्यक बिजली की बर्बादी रुकेगी।
गर्मी के इस मौसम में ऊर्जा संरक्षण बेहद जरूरी है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे एसी का तापमान 24 डिग्री तक रखें, पर्दे बंद रखें ताकि बाहर की गर्मी अंदर न आए और कमरे का दरवाजा-खिड़की बंद रखें। साथ ही, एसी के फिल्टर समय-समय पर साफ करते रहें, जिससे उसकी दक्षता बनी रहे।
--आईएएनएस
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इस समय पूरे भारत में बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां शुरु हो चुकी है। बच्चे समर वेकेशन को अच्छे से एन्जॉय कर रहे हैं, साथ ही मोबाइल भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। तेज गर्मी और लू कारण बच्चे धूप में नहीं निकालते हैं। जिससे बच्चे दिनभर मोबाइल, टीवी और अन्य गैजेट में लगे रहते हैं, ऐसा करने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक हेल्थ पर असर पड़ता है। इसलिए छोटी-छोटी एक्टिविटी के जरिए बच्चों को बिजी रखा जा सकता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कैसे बच्चों को तनावमुक्त रखें।
कैसी हो इनडोर एक्टिवटी?
घर में रहकर बच्चों के लिए कई तरह की रचनात्मक एक्टिविटी की जा सकती है। इस आर्टिकल में हम बच्चों की शारीरिक गतिविधियों की बात कर रहे हैं, जिससे वे शारीरिक रूप से एक्टिव रहें। अगर शरीर स्वस्थ रहेगा तो उनका मन भी प्रसन्न रहेगा।
इनडोर गेम्स
भीषण गर्मी में बाहर जाने से अच्छा है कि आप घर में ही रस्सी कूद सकते हैं, डांस या स्ट्रेचिंग जैसी एक्टिविटी कर सकते हैं। आस-पास के पड़ोस के बच्चे हो, तो उन्हें बुलाकर घर के ही अंदर कैरम, लूडो, चेस, सुडोकू, सांप-सीढ़ी, डांस, इनडोर बालिंग, ट्रेजर हंट, इनडोर बास्केटबाल और बैलून वालीबाल जैसे इनडोर गेम्स खेले जा सकते हैं।
सुबह की सैर
गौरतलब है कि दिन में धूप रहती है, इसलिए अपने बच्चों को सुबह पार्क में जरुर ले जाएं। सुबह-सुबह स्वच्छ और ताजी हवा होती है, मॉर्निंग वॉक करने से मन की सुकून और शांति प्राप्त होता है। घर के आने के बाद 15-20 मिनट योग एक्सरसाइज कर सकते हैं। ऐसा करने से बच्चों का मन पूरे दिन शांत रहेगा।
साइक्लिंग
जब शाम के समय धूप कम हो जाएं, तो आप बच्चों को पार्क में साइक्लिंग करवाएं या बच्चों के दोस्तों के साथ साइक्लिंग करवा सकते हैं। असल में यह एक एरोबिक व्यायाम है, जिससे रात में उन्हें अच्छी नींद आएगी। तनावमुक्त नींद आना बड़ा सुकून देता है।
क्या खिलाएं-पिलाएं?
- अक्सर गर्मियों में बच्चे पानी कम पीते है इसलिए उन्हें ओआरएस या नींबू मिलाकर पानी जरुर दें।
- दिन में बच्चों को छाछ, आम पन्ना, सत्तू का शरबत और तरबूज का जूस दे सकते हैं। इससे वे पूरा दिन ऊर्जावान बनें रहेंगे।
- इस मौसम में बच्चों के लिए सबसे फायदेमंद है मौसमी फल जैसे कि आम, स्ट्राबेरी, खरबूजा और केला। यदि आप चाहे तो बच्चों को ओट्स में केला, दूध या दही मिलाकर खिला सकती हैं।
- असल में यह जल्दी पच जाता है और पेट को ठंडा रखता है। दही में प्रोबायोटिक्स होता है, जो बच्चों के पाचन तंत्र के लिए लाभकारी हो सकता है।
इन चीजों से परहेज करता है
इस बात का ध्यान रखे कि दोपहार 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बच्चों का बाहर बिल्कुल न भेजें। बाहर का जंक फूड का सेवन न करने दें। इतना ही नहीं, चिप्स, चाकलेट, पैटिस, बर्गर, पास्ता, पिज्जा के खाने से बच्चों के पेट में जलन हो सकती है। क्योंकि ये आहार सुपाच्य नहीं होते हैं, इससे एसिडिटी की समस्या हो।
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