यादों में ऋतुपर्णो घोष: बंगाली सिनेमा को दी नई पहचान, 'रेनकोट' से 'द लास्ट लियर' तक, हर फिल्म में दिखी उनकी अलग सोच
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। 31 अगस्त 1963 को कोलकाता के एक बंगाली परिवार में जन्मे सौराशिल घोष (जिन्हें दुनिया ने ऋतुपर्णो घोष के नाम से जाना) को कला विरासत में मिली थी। उनके पिता सुनील घोष एक चित्रकार और डॉक्यूमेंट्री निर्माता थे, और उनकी मां भी एक चित्रकार थीं।
यादों में ऋतुपर्णो घोष: बंगाली सिनेमा को दी नई पहचान, 'रेनकोट' से 'द लास्ट लियर' तक, हर फिल्म में दिखी उनकी अलग सोच
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। 31 अगस्त 1963 को कोलकाता के एक बंगाली परिवार में जन्मे सौराशिल घोष (जिन्हें दुनिया ने ऋतुपर्णो घोष के नाम से जाना) को कला विरासत में मिली थी। उनके पिता सुनील घोष एक चित्रकार और डॉक्यूमेंट्री निर्माता थे, और उनकी मां भी एक चित्रकार थीं।
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