'टाइम100' फेम एरियाना ने हफिंगटन पोस्ट को ग्लोबल ब्रांड बनाया:आइडेंटिटी ट्रैप पर कहा- कई सीईओ जॉब से नाखुश, फिर भी नहीं छोड़ पाते पद
करोड़ों की सैलरी, सीईओ जैसा पद और दुनिया भर में रुतबा हासिल करने के बाद भी कई दिग्गज खुश नहीं हैं। ये कहना है ग्लोबल मीडिया ब्रांड हफिंगटन पोस्ट की संस्थापक एरियाना हफिंगटन (76) का। वो कहती हैं कि उनके कई सीईओ दोस्त अपनी नौकरी से लगाव खत्म होने के बावजूद छोड़ने से घबराते हैं। इसकी वजह ‘आइडेंटिटी ट्रैप’ यानी पहचान का जाल है। जब कोई बड़ा पद किसी व्यक्ति की पूरी पहचान बन जाता है, तो उसे छोड़ना सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को खोने जैसा लगने लगता है। 11 वर्ष में कंपनी शिखर पर पहुंचाई, फिर खुद ही छोड़ा पद एरियाना निजी अनुभवों से बताती हैं कि 11 वर्षों की कड़ी मेहनत से उन्होंने अपनी कंपनी को शीर्ष पर पहुंचाया। दो बार ‘टाइम 100’ सूची में आईं। हजार करोड़ नेटवर्थ वाली एरियाना ने 2016 में शीर्ष पर पहुंचकर पद छोड़ा और नई हेल्थ-वेलनेस कंपनी शुरू की। वे कहती हैं कि अगर पुरानी सफलता, पद और सुरक्षा को बचाए रखने के लिए वहां टिकी रहतीं, तो यह खुद के साथ धोखा होता। एरियाना का मानना है कि किसी नौकरी या सफलता को अपनी पूरी पहचान नहीं बनने देना चाहिए। पद कितना प्रतिष्ठित दिखता है, उससे ज्यादा अहम यह है कि वह काम व्यक्ति को भीतर से कैसा महसूस करा रहा है। 4 सीईओ बता रहे कामयाबी के बाद भी क्यों लगा अधूरापन शीर्ष पर पहुंचकर 4300 करोड़ कमाने के बावजूद भी खालीपन अमेरिकी फूड चेन कंपनी ‘विंगस्टॉप यूके’ के सह-संस्थापक टॉम ग्रोगन ने कंपनी को सफल बनाया। इस बीच शेयर्स बेचकर 4300 करोड़ रुपए कमाए। लक्ष्य तो हासिल हो गया, लेकिन खुशी के बजाय उन्हें सिर्फ खालीपन महसूस हुआ। उनका कहना था कि सफलता ही उनकी पहचान बन गई थी, लक्ष्य पूरा होते ही आगे बढ़ने की वजह और मकसद धुंधला पड़ गया। शोहरत और पैसा मिला, लेकिन जिंदगी का मकसद खो गया ट्रैवल कंपनी ‘एयरबीएनबी’ के सह-संस्थापक ब्रायन मानते थे कि सफलता सारी समस्याएं हल कर देगी। 2020 में वे अरबपति बनें, लेकिन बाद का समय उदासी भरा था। - टेक कंपनी लूम के को-फाउंडर विनय हायरमैथ ने कंपनी बेचने के बाद खुद को दिशाहीन पाया। कंपनी से जुड़ी पहचान हटते ही लगा कि खुद को खो चुके हैं। पद ही पहचान ‘बड़ा संकट’ अमेरिकी कंपनी (टीआईएए) की सीईओ थसुंडा कहती हैं कि नौकरी के बिना उनकी पहचान कुछ नहीं है। हालांकि, पद अस्थायी होते हैं लेकिन मौजूदा दिनों में इसके उलट भावना देखने को मिल रही है। लोग इन दिनों पद को ही पहचान मानने लगे हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- माल्या-SBI विवाद खत्म करें:इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा; ED से संपत्तियों का ब्योरा मांगा
बॉम्बे हाई कोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और बैंकों के बीच चल रहे कॉमर्शियल विवाद को अब खत्म करने की बात कही है। जस्टिस मिलिंद जाधव की सिंगल जज बेंच ने माल्या की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर दोनों पक्ष इस विवाद से आगे नहीं बढ़ते हैं, तो इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा। कोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जांच की मौजूदा स्थिति और अटैच की गई संपत्तियों का ब्योरा भी मांगा है। 1. एक दशक से चल रहे विवाद का खत्म होना जरूरी हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि लगभग एक दशक से चल रहे इस मामले को अब एक तार्किक अंत यानी लॉजिकल कंक्लूजन तक पहुंचना चाहिए। 70 साल के विजय माल्या ने याचिका दाखिल कर संपत्तियों को बैंकों को सौंपने के आदेश को अनुचित बताया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि कॉमर्शियल विवादों का समाधान अक्सर खुद विवादों के भीतर ही छिपा होता है। पक्षों को आपसी उलझन में रहने की बजाय व्यावहारिक समाधान यानी प्रैक्टिकल सॉल्यूशन की तरफ बढ़ना चाहिए। 2. PMLA कोर्ट के आदेश को माल्या ने दी थी चुनौती साल 2020 में माल्या ने विशेष प्रीवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुआई वाले बैंकों के कंसोर्टियम को ED द्वारा अटैच की गई उसकी संपत्तियों का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। माल्या पर बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस (KFA) के लिए कई बैंकों से लिए गए ₹9,000 करोड़ के लोन डिफॉल्ट का आरोप है। 3. मार्च 2016 में देश छोड़कर भागा, 2019 में भगोड़ा घोषित विजय माल्या मार्च 2016 में यूके भाग गया था। इसके बाद साल 2019 में अधिकारियों ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था। कानून के तहत प्राधिकारियों को उसकी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिला है। भारत सरकार लगातार यूके से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। 4. भारत वापस आने तक राहत देने से कोर्ट का इनकार इससे पहले फरवरी में चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अनखड की बेंच ने माल्या की दो याचिकाओं पर सुनवाई की थी। इन याचिकाओं में FEOA के तहत खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। 12 फरवरी की सुनवाई में कोर्ट ने साफ कहा था कि जब तक माल्या भारत लौटकर उसके क्षेत्राधिकार में सरेंडर नहीं करता, तब तक उसकी याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। 5. वापसी पर अनिश्चितता, वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला 18 फरवरी को हुई अगली सुनवाई में माल्या ने कहा कि इंग्लैंड की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वह फिलहाल यह नहीं बता सकता कि भारत कब लौटेगा। माल्या की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट अमित देसाई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आग्रह किया कि याचिकाकर्ता की गैर-मौजूदगी में भी संवैधानिक अदालतें रिट याचिकाओं पर फैसला सुना सकती हैं, इसलिए दोनों याचिकाओं पर अलग से सुनवाई की जाए। क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA)? FEOA कानून उन आर्थिक अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया है जो भारतीय अदालतों की कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर भाग जाते हैं। इस कानून के तहत अदालतों को मामले की सुनवाई पूरी होने से पहले ही आरोपी की देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को अटैच यानी जब्त करने और उन्हें नीलाम/बेचकर बैंकों का बकाया वसूलने का अधिकार मिलता है। ये खबर भी पढ़ें… टाटा संस में चंद्रशेखरन की जगह ले सकते हैं नरेंद्रन: चेयरमैन की रेस में टाटा स्टील के MD सबसे आगे; सिलेक्शन कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे के बाद नए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने आज 13 अगस्त को एक प्रस्ताव पास कर 5 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पद की रेस में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन का नाम सबसे आगे है। नरेंद्रन 1988 से टाटा ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उनका पूरा करियर टाटा स्टील में ही रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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