सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मजबूत शुरुआत के बाद फिसले भाव
Gold and silver Price: वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू वायदा बाजार में गुरुवार को सोना और चांदी दोनों की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, लेकिन बाद में इनमें मुनाफावसूली देखने को मिली. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,450 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है, जिससे कीमती धातुओं को समर्थन मिल रहा है. निवेशकों की मांग और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है.
कारोबार के दौरान देखने को मिली गिरावट
दिन में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 189 रुपए की बढ़त के साथ 1,55,071 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला. हालांकि शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी और कारोबार के दौरान इसमें गिरावट देखने को मिली. खबर लिखे जाने तक गोल्ड फ्यूचर्स 1,082 रुपए यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,800 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. सत्र के दौरान सोना 1,55,145 रुपए के उच्चतम स्तर और 1,53,600 रुपए के निचले स्तर तक पहुंचा. हालांकि मौजूदा कीमतें अभी भी इस वर्ष के रिकॉर्ड उच्च स्तर 1,80,779 रुपए प्रति 10 ग्राम से काफी नीचे हैं.
चांदी की कीमत
वहीं, चांदी की कीमतों में भी शुरुआत में मजबूती दिखी. सितंबर डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 165 रुपए की बढ़त के साथ 2,38,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई. कारोबार के दौरान चांदी 2,535 रुपए यानी 1.07 प्रतिशत टूटकर 2,35,300 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई. दिन में इसने 2,38,000 रुपए का उच्चतम और 2,35,236 रुपए का निचला स्तर छुआ. चांदी का वार्षिक रिकॉर्ड उच्च स्तर 4,20,048 रुपए प्रति किलोग्राम रहा है. वैश्विक बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में सीमित गिरावट देखने को मिली.
कॉमेक्स पर सोना 4,468.80 डॉलर प्रति औंस पर खुला और बाद में 2.40 डॉलर की गिरावट के साथ 4,465.10 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया. वहीं, कॉमेक्स पर चांदी 65.45 डॉलर प्रति औंस पर खुली और बाद में 0.11 डॉलर की कमजोरी के साथ 65.59 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई. इसके बावजूद दोनों धातुएं हाल के ऊंचे स्तरों के आसपास बनी हुई हैं.
बुधवार को जारी सीपीआई रिपोर्ट
बुधवार को जारी सीपीआई रिपोर्ट के बाद, निवेशक अब गुरुवार को जारी होने वाले अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं. बाजार की दिशा फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति से जुड़ी उम्मीदों पर निर्भर है. हालिया आंकड़ों के अनुसार, सितंबर की बैठक में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना घटकर लगभग 40 प्रतिशत रह गई है, जो एक सप्ताह पहले करीब 54 प्रतिशत थी. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना कम होने से सोने को समर्थन मिलता है, क्योंकि कम ब्याज दरें ऐसे निवेश साधनों को आकर्षक बनाती हैं जो नियमित ब्याज नहीं देते.
अमेरिका में जुलाई के दौरान उपभोक्ता महंगाई दर (सीपीआई) 3.4 प्रतिशत रही, जो जून के 3.5 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है और बाजार के अनुमान के अनुरूप है. लगातार दूसरे महीने महंगाई में नरमी आने से निवेशकों को उम्मीद है कि फेड ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने से बच सकता है. अब निवेशकों की नजर अमेरिका के प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) के आंकड़ों पर है, जो यह संकेत दे सकती है कि कीमतों पर दबाव कितना कम हो रहा है और फेड अगला कदम क्या उठा सकता है.
सोने को मजबूत समर्थन मिलता रह सकता है
सोने की कीमतों को एक और बड़ा सहारा मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से मिल रहा है. समुद्री जहाजों पर हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है. वहीं ईरान से जुड़े विवादों के समाधान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. इन परिस्थितियों में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं में मांग बनी हुई है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं जारी रहेंगी, तब तक सोने को मजबूत समर्थन मिलता रह सकता है.
--आईएएनएस
डीबीपी
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मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा संकेत, मतदाता पहचान के लिए लगा सकते हैं राष्ट्रीय आपातकाल
Voter Identification: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी प्रक्रिया में मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन को लेकर सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने इस दिशा में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।
ट्रंप का कहना है कि चुनावों की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके इस रुख से अमेरिका में वोटर आईडी, नागरिकता की जांच और चुनाव संचालन में संघीय सरकार की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। ट्रंप के संभावित कदम का असर मतदाता अधिकारों और राज्यों के चुनावी नियमों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में मध्यावधि चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी टकराव बढ़ने के आसार हैं।
रियल अमेरिकाज वॉयस
ट्रंप ने 'रियल अमेरिकाज वॉयस' पर वेन एलिन रूट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इससे भी ज्यादा असामान्य चीजें पहले हो चुकी हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा।” रूट ने ट्रंप से कहा कि अगर सीनेट 'सेव अमेरिका एक्ट' को मंजूरी नहीं देती, तो उन्हें आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। रूट ने सुझाव दिया कि ऐसी शक्तियों के जरिए फोटो पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य किया जा सकता है और डाक के जरिए भेजे जाने वाले मेल-इन बैलेट पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं।
क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने इस प्रस्ताव का साफ तौर पर समर्थन नहीं किया, लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों पर सीनेट को कार्रवाई करनी चाहिए। ट्रंप ने कहा, “सीनेट को 'सेव अमेरिका एक्ट' पर आगे बढ़ना होगा। मुझे सच में लगता है कि ऐसा होना चाहिए, क्योंकि लोग इसकी उम्मीद कर रहे हैं और यह जरूरी भी है।” उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि नागरिकता का प्रमाण हो। और मतदाता पहचान पत्र भी होना चाहिए।
ट्रंप ने किया विरोध का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि कुछ रिपब्लिकन सीनेटर इन उपायों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन की तारीफ की और कहा कि प्रतिनिधि सभा इस कानून को पांच बार मंजूर कर चुकी है, लेकिन यह हर बार सीनेट में जाकर अटक जाता है। राष्ट्रपति ने डाक से मतदान की व्यवस्था की भी फिर से आलोचना की। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि यह प्रणाली धोखाधड़ी के लिए संवेदनशील है और खास तौर पर कैलिफोर्निया की चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा कि मेल-इन बैलेट्स बहुत भ्रष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया चुनावों के मामले में सबसे भ्रष्ट जगहों में से एक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में रिपब्लिकन मतदाताओं को मतपत्र प्राप्त करने में कठिनाई होती है। रूट ने ट्रंप से कहा कि चुनाव संबंधी यह कानून शायद सीनेट से मंजूरी न पा सके। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस इसे पारित कर भी दे, तब भी इसे तुरंत कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बाद रूट ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे अगले एक महीने के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करें। रूट का दावा था कि इससे प्रशासन सीनेट की मंजूरी का इंतजार किए बिना फोटो पहचान पत्र, नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता और मेल-इन वोटिंग पर सीमाएं लागू कर सकेगा।
अदालती चुनौती से होगा सामना
ट्रंप की प्रतिक्रिया ने इस संभावना को जिंदा रखा, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की ओर से इस रास्ते को अपनाने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस कानून को पारित कर देती है तो इसे अदालत में चुनौती देना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। इंटरव्यू में जिस चुनावी प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत संघीय चुनावों में वोटर पंजीकरण करवाते समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य किया जाए।
समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी सुरक्षा और मजबूत होगी। वहीं विरोधियों का तर्क है कि जिन योग्य नागरिकों के पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वोटर पंजीकरण कराने में परेशानी हो सकती है। अमेरिकी संघीय कानून पहले से ही गैर-नागरिकों को संघीय चुनावों में मतदान करने से रोकता है। अमेरिका में चुनाव मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन की ओर से कराए जाते हैं, जो अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों द्वारा तय ढांचे के तहत काम करते हैं।
(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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