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फिल्म अभिनेता आर.माधवन के संघर्ष की कहानी:फौजी नहीं बन पाए, सर्जरी ने 3 साल रोक दिया करिअर; आज हैं पैन-इंडिया स्टार

हिंदी और तमिल सिनेमा जगत में आर.माधवन आज न सिर्फ एक स्थापित अभिनेता, बल्कि जाने-माने निर्माता-निर्देशक भी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 25 मई को उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी… जमशेदपुर में एक मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में 1 जून 1970 को जन्मे आर.माधवन का जीवन आर्थिक व शारीरिक संघर्षों और करिअर की चुनौतियों से भरा रहा है। माधवन कॉलेज के दिनों में सर्वश्रेष्ठ एनसीसी ​कैडेट थे। फौज में अफसर बनना उनका सपना था, लेकिन उम्र संबंधी नियमों के चलते वह परीक्षा में अयोग्य कर दिए गए। संघर्ष -गुजारे के लिए कोचिंग देते, फिल्मों में रिजेक्शन झेले 1993 में माधवन मुम्बई आए तो उनके पास पैसे नहीं थे। वे पब्लिक स्पीकिंग की कोचिंग और छोटी-मोटी मॉडलिंग से गुजारा करते थे। तमिल फिल्म "इरुवर' के लिए स्क्रीन टेस्ट में मणिरत्नम ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। चॉकलेटी छवि के कारण उन्हें गंभीर भूमिकाओं के लिए कई रिजेक्शन झेलने पड़े। माधवन जब करिअर के शिखर पर थे तो थ्री ईडियट्स की शूटिंग में उनके घुटने में चोट आई। डॉक्टरों की सलाह को अनदेखा कर वे तमिल फिल्म शूट करने लगे और वापस उसी घुटने में इतनी गंभीर चोट लगी कि उनकी ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में दो सर्जरी करनी पड़ीं। यह कॅरिअर का सबसे बुरा दौर था। 3 साल तक वे फिल्मों से दूर रहे। फिर "रॉक्रेट्री' की शूटिंग के दौरान कोरोना आ गया। माधवन बताते हैं कि तब चार साल तक उनकी कोई कमाई नहीं हुई। सफलता - तमिल सिनेमा से चमके, रहना है से बने स्टार माधवन उन गिने-चुने अभिनेताओं में हैं, जो अंग्रेजी, हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं में 70 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं। सबसे पहले 1997 में माधवन ने अंग्रेजी फिल्म "इन्फर्नो' में छोटी-सी भूमिका निभाई। इससे पहले वे टीवी एड और धारावाहिक करते थे। 1998 में "शांति,शांति,शांति' से कन्नड डेब्यू किया। 2000 में तमिल ब्लाॅकबस्टर "अलाईपायुथे' उनके कॅरिअर का टर्निंग पॉइंट रही। इससे पहचान मिली और माधवन ने "रहना है तेरे दिल में' से धमाकेदार बॉलीवुड डेब्यू किया। 2006 से 2015 के बीच माधवन ने रंग देे बसंती, थ्री ईडियट्स, तनु वेड्स मनु में दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। "रॉक्रेट्री: द नंबी इफेक्ट' से वो निर्माता भी बन गए। माधवन को आइफा, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, टेलीविजन अकादमी अवॉर्ड के अलावा कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।

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बॉलीवुड की वो 7 हसीनाएं, जिनके टॉवल सीन देख थिएटर में खूब बजी थीं तालियां, 1 ने तो सीन को बना दिया यादगार

हर साल 25 मई को दुनियाभर में ‘टॉवल डे’ मनाया जाता है. आज इसी मौके पर बॉलीवुड की उन हसीनाओं के बारे में आपको बताते हैं, जिन्होंने इंडस्ट्री में टावल वाला ऐसा सीन दिया कि वो यादगार बन गया. कई ऐसी एक्ट्रेसेस हैं, जिन्होंने टॉवल सीन देकर बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था.

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जिस लड़के की बैट स्पीड देखकर कोच हैरान थे, 3 महीने में उसने ऐसा क्या बदला कि बन गया इंटरनेशनल गेंदबाजों का काल, मेंटोर ने खोला राज

Zubin Bharucha statemen on vaibhav sooryavanshi: राजस्थान रॉयल्स के मेंटोर जुबिन भरूचा के अनुसार वैभव सूर्यवंशी की असली ताकत उनकी गहरी समझ और साफ सोच है. जो उन्हें 15 साल की उम्र के युवा सचिन तेंदुलकर की याद दिलाती है. ट्रायल्स के दौरान वैभव की बैट स्पीड कम थी, लेकिन तीन महीने की कड़ी मेहनत से इसमें 30 प्रतिशत सुधार हुआ. कम फुटवर्क के बावजूद, गेंद को देर से खेलने की काबिलियत और जबरदस्त आत्मविश्वास उन्हें खास बनाता है. 2025 के मुकाबले 2026 में उनका ऑफ-साइड गेम और इंटरनेशनल गेंदबाजों के खिलाफ भरोसा काफी मजबूत हुआ है. Thu, 28 May 2026 22:01:20 +0530

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