'वर्कआउट किसी मेडिटेशन से कम नहीं', 71 की उम्र में खुद को ऐसे फिट रखते हैं अनुपम खेर, वीडियो में दिखाई झलक
71 साल की उम्र में भी बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर की फिटनेस कमाल की है. उन्होंने हाल ही में अपने जिम सेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए वर्कआउट को मेडिटेशन के समान बताया. उनका मानना है कि खुद को सेहतमंद रखना दिमाग को शांत रखने का सबसे बेहतरीन जरिया है. वीडियो में वर्कआउट करते अनुपम का यह जज्बा देखकर फैंस बेहद प्रभावित हैं और उनकी अनुशासन और लगन की दिल खोलकर तारीफ कर रहे हैं.
अगले 3 साल में कहां पहुंच सकता है Hindustan Copper का Share प्राइस?
Hindustan Copper Share Price: कॉपर की रिकॉर्ड कीमतों और दुनिया भर में इसकी जबरदस्त मांग की वजह से कॉपर स्टॉक्स के लिए यह साल शानदार रहा है. AI डेटा सेंटर्स, पावर ग्रिड, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और रिन्यूबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के तेजी से विस्तार ने कॉपर की खपत को काफी बढ़ाया है. वहीं, सप्लाई में रुकावट और नई माइनिंग कैपेसिटी की कमी के कारण बाजार में कॉपर की कमी बनी हुई है, जिससे कीमतों को सहारा मिला है. कॉपर की बढ़ती कीमतों ने माइनिंग कंपनियों के रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ाया है, जिससे उनकी कमाई मजबूत हुई है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है. इसी क्रम में हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) का शेयर भी इस साल उछला है. इसका शेयर 52-हफ्ते के निचले स्तर से दोगुने से ज्यादा चढ़ चुका है. तो आइए इस लेख में अगले 3 साल में हिंदुस्तान कॉपर के शेयर कहां तक जा सकते हैं, इसके बारे में जानते हैं.
कंपनी क्या करती है?
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) भारत की एकमात्र इंटीग्रेटेड कॉपर माइनिंग कंपनी है. यह खान मंत्रालय के तहत एक सरकारी उपक्रम है, जिसमें सरकार की हिस्सेदारी लगभग 66% है. 1967 में स्थापित यह कंपनी कॉपर की पूरी वैल्यू चेन में काम करती है. एक्सप्लोरेशन और माइनिंग से लेकर अयस्क के शोधन (Ore Beneficiation) और कॉपर कॉन्संट्रेट के उत्पादन तक. इसकी मुख्य खदानें मलंजखंड (मध्य प्रदेश), खेतड़ी (राजस्थान) और घाटशिला (झारखंड) में स्थित हैं.
यह भी पढ़ें- Q1 FY27 में FII ने इन 6 शेयरों में बढ़ाई सबसे ज्यादा हिस्सेदारी, Lenskart टॉप पर
शेयर को ऊपर ले जा सकते हैं ये फैक्टर
1. मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
FY27 की पहली तिमाही में, कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 82% बढ़कर ₹9.37 अरब हो गया. नेट प्रॉफिट 163% बढ़कर ₹3.53 अरब हो गया, जबकि EBITDA 173% बढ़कर ₹4.80 अरब पर पहुंच गया. EBITDA मार्जिन पिछले साल की इसी तिमाही के 34.3% से बढ़कर 51.2% हो गया और EPS ₹1.39 से बढ़कर ₹3.65 हो गया. यह शानदार परफॉर्मेंस ग्लोबल कॉपर की कीमतों में उछाल, मजबूत अयस्क उत्पादन, बेहतर रियलाइजेशन और बेहतर ऑपरेशनल क्षमता की वजह से रही.
2. बड़े विस्तार की योजना
मैनेजमेंट ने भारत में कॉपर की बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए अपने प्रोडक्शन बढ़ाने के प्लान को फिर से दोहराया है. कंपनी अगले 5 सालों में अपने घरेलू माइनिंग ऑपरेशन्स और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए ₹71.89 अरब का निवेश करने की योजना बना रही है. इसका लक्ष्य FY30-31 तक कुल कॉपर ओर प्रोडक्शन क्षमता को 4.21 मिलियन टन सालाना से बढ़ाकर 12.2 मिलियन टन सालाना करना है.
3. संरचनात्मक मांग और ग्रीन एनर्जी की लहर
आधुनिक इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए कॉपर सबसे जरूरी कंडक्टर है. EV, सोलर पावर प्लांट, विंड टर्बाइन, पावर ग्रिड अपग्रेड और डिफेंस इक्विपमें सभी कॉपर पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. भारत में घरेलू सप्लाी की कमी है, जिससे HCL के प्रोडक्शन के लिए एक मजबूत लॉन्ग टर्म घरेलू बाजार बना हुआ है.
4. बड़े रिजर्व्स तक पहुंच
हिंदुस्तान कॉपर के पास भारत के कुल कॉपर ओर रिसोर्सेज का करीब 45% हिस्सा है, जो ग्रोथ के लिए लंबा रास्ता खोलता है.
5. मजबूत बैलेंस शीट
कंपनी कर्ज-मुक्त है, जिससे वह कम फाइनेंशियल रिस्क के साथ अपनी विस्तार योजनाओं को फंड कर सकती है.
यह भी पढ़ें- गिग वर्कर्स एनपीएस में 99 रुपए के छोटे योगदान से शुरू कर सकते हैं निवेश, रिटायरमेंट फंड बनाने में मिलेगी मदद
कंपनी के सामने चुनौतियां क्या हैं?
कंपनी के सामने सबसे पहली चुनौती कॉपर की कीमतों पर इसकी निर्भरता है. कंपनी की कमाई ग्लोबल कॉपर कीमतों के साथ ऊपर-नीचे होती है. कीमतों में गिरावट मुनाफे को तेजी से घटा सकती है. ब्रांडेड कंपनियों के उलट, हिंदुस्कान कॉपर की कीमतें तय करने की क्षमता सीमित है. इसका मुनाफा मुख्य रूप से मेटल की कीमतों, उत्पादन की मात्रा और लागत पर निर्भर करता है. इसके बाद उनके सामने एग्जीक्यूशन रिस्क आता है. कंपनी की ग्रोथ माइनिंग कैपेसिटी के सफल विस्तार पर निर्भर करती है. मंजूरी मिलने में देरी या माइन डेवलपमेंट या प्रोजेक्ट को पूरा करने में आने वाली रुकावटों का असर भविष्य की कमाईइ पर पड़ सकता है. कंपनी आने वाले सालों में विस्तार पर हजारों करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है. ऐसे में लागत बढ़ने या देरी होने से रिटर्न घट सकता है. फिलहाल Hindustan Copper का शेयर 46.5 के PE और 14 के भारी-भरकम PB पर ट्रेड कर रहा है.
अगले तीन साल में कहां पहुंचेगा शेयर?
आने वाले तीन सालों में हिंदुस्तान कॉपर के शेयर की कीमत मुख्य रूप से 3 बातों पर निर्भर करेगी. पहला, दुनिया भर में कॉपर की कीमतें. कीमतें ज्यादा होने से रेवेन्यू और मुनाफे में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. जबकि कीमतें कम होने से कमाई पर दबाव पड़ सकता है. दूसरा, कंपनी की खदानों का विस्तार और क्षमता बढ़ाना. हिंदुस्तान कॉपर का लक्ष्य आने वाले सालों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अयस्क (Ore) के उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी करना है. तीसरा, एग्जीक्यूशन सबसे अहम कड़ी होगी. विस्तार परियोजनाओं का समय पर पूरा होना, उत्पादन वॉल्यूम बढ़ना और लागत पर नियंत्रण, ये सब मिलकर कमाई की ग्रोथ तय करेंगे. देरी, लागत में बढ़ोतरी या ऑपरेशनल दिक्कतें अनुकूल कॉपर डिमांड आउटलुक के बावजूद फायदे को सीमित कर सकती हैं.
यह भी पढ़ें- जुलाई में बढ़ी खुदरा महंगाई, 4.45% पर पहुंची दर; प्याज-लहसुन-अदरक ने बढ़ाई रसोई की चिंता
डिस्क्लेमर: निवेशकों को निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और शेयर के वैल्यूएशन जैसे अहम पहलुओं पर ध्यान से रिसर्च करनी चाहिए.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
News Nation









