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मैं हाफिज सईद का गुलाम हूं... पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने आतंकियों की महफिल से भारत को दी धमकी

एक और घटना ने पाकिस्तान की असलियत सामने ला दी है और यह साबित कर दिया है कि यह देश आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। हाल ही में एक पूर्व मंत्री को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के साथ मंच साझा करते और भारत को धमकी देते देखा गया, साथ ही उन्होंने आतंकी संगठन के संस्थापक हाफ़िज़ सईद की तारीफ़ भी की। सोशल मीडिया पर बिना तारीख वाला एक वीडियो तेज़ी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार में पूर्व गृह मंत्री और अवामी मुस्लिम लीग के संस्थापक शेख रशीद अहमद को लश्कर कमांडर खालिद मसूद संधू और कारी मुहम्मद याकूब शेख के साथ देखा जा सकता है। अहमद को एक सभा को संबोधित करते हुए और यह कहते हुए भी देखा जा सकता है कि वह सईद का गुलाम और अनुयायी है। उसने यह भी दावा किया कि सईद का मोबाइल नंबर उसके फोन पर मिलने के बाद उसे अमेरिका (US) से निकाल दिया गया था।

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पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने कहा कि मैं हाफिज सईद का गुलाम हूं। मुजाहिदीनों ने खुद को पाकिस्तान के लिए समर्पित कर दिया है। इंशाअल्लाह, हम भी हाफिज सईद के साथ हैं। हम भाइयों की तरह हैं। वायरल वीडियो में अहमद ने कहा कि जब भी पाकिस्तान पर कोई संकट आया... भारत ने कभी भी मौका नहीं छोड़ा... अगर भारत ने पाकिस्तान की तरफ आंख उठाकर भी देखा तो हम उसे बर्बाद कर देंगे। न तो भारत में पक्षी चहचहाएंगे और न ही मंदिरों में घंटियां बजेंगी। उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हम पाकिस्तान और हाफिज सईद के साथ हैं। यह वायरल क्लिप कोई अकेली घटना नहीं है; पाकिस्तान में अक्सर आतंकवादियों को प्रभावशाली लोगों के साथ खुलेआम मंच साझा करते देखा गया है। इससे पहले जून में, सईद के बेटे तलहा सईद को इस्लामाबाद में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के अंतिम संस्कार में शामिल होते देखा गया था। वहाँ इनाम-उर-रहमान कंबोह, अब्दुल्ला टूर, हाफिज उमर और अमजद भट्टी जैसे कई अन्य आतंकवादी भी मौजूद थे।

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कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों, जिनमें अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट भी शामिल है, ने बार-बार चेतावनी दी है कि पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए, खासकर भारत के खिलाफ काम करने वाले आतंकवादियों के लिए, एक सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। नई दिल्ली ने इस बारे में बार-बार चेतावनी दी है और वैश्विक संस्थाओं से इस्लामाबाद के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले एक बयान में कहा था,जो देश दशकों से सीमा-पार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है, वह किसी भी तरह की मिली-जुली सांस्कृतिक विरासत का दावा नहीं कर सकता।

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Donald Trump का दावा: नाकेबंदी से Strait of Hormuz पर अमेरिका का नियंत्रण है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि नाकेबंदी से अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के ‘‘पूर्ण नियंत्रण’’ का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘मुझे लगता है कि हम इसे बनाए रखेंगे!’’ ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी के संदर्भ में थी। युद्ध से पहले दुनिया में कारोबार किए जाने वाले तेल का पांचवां हिस्सा इस महत्वपूर्ण मार्ग से होकर गुजरता था, लेकिन ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य अन्य यातायात के लिए काफी हद तक बंद है।

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ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान जहाजों पर हमले करता है।

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  Sports

Gautam Gambhir को भज्जी की सलाह: Rohit-Virat के Experience पर जताएं भरोसा, उम्र नहीं Performance है पैमाना

भारत के महान स्पिनर हरभजन सिंह ने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि अगर लियोनेल मेस्सी खेल सकते हैं, तो विराट कोहली और रोहित शर्मा क्यों नहीं? उन्होंने इन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर उनमें खेलने की प्रतिबद्धता है तो वे अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप में खेल सकते हैं। पीटीआई के मुख्यालय में एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में 46 वर्षीय पूर्व ऑफ स्पिनर ने रोहित और कोहली के भविष्य को लेकर चल रही अंतहीन बहस पर अपने विचार व्यक्त किए।

यह दोनों खिलाड़ी 35 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और अब केवल एक ही प्रारूप में खेलते हैं। हरभजन ने साक्षात्कार के दौरान यह भी खुलासा किया कि उनकी आत्मकथा तैयार है और उसके इस वर्ष के आखिर में प्रकाशित होने की उम्मीद है। हरभजन ने कहा, ‘‘खिलाड़ी कोई भी हो, मेरा मानना ​​है कि मापदंड प्रदर्शन होना चाहिए, उम्र नहीं।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्व कप में वैभव सूर्यवंशी जैसे होनहार लेकिन अपेक्षाकृत अनुभवहीन युवा खिलाड़ी की तुलना में कोहली और रोहित पर उम्मीदों का कहीं अधिक बोझ होगा। रोहित और कोहली ने अब तक जो प्रतिबद्धता दिखाई है, उसे देखते हुए हरभजन ने कहा कि वे वही कर सकते हैं जो 39 वर्षीय मेस्सी ने हाल ही में हुए फुटबॉल विश्व कप में दिखाया था।

मेस्सी ने अपने व्यक्तिगत कौशल के दम पर अर्जेंटीना को फाइनल तक पहुंचाया था। जब भी वह गेंद लेकर आगे बढ़ते तो विरोधी टीम की रक्षापंक्ति को भेद देते थे। जब अगले साल दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में वनडे विश्व कप होगा, तब रोहित 40 साल और कोहली 39 साल केहो जाएंगे। हरभजन ने कहा, ‘‘विराट भले ही 39 साल के हों, लेकिन अगर वह अभी भी मैदान पर 20 साल के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ रहे हैं, तो उनकी उम्र मायने नहीं रखती। लियोनेल मेस्सी को ही देख लीजिए। 40 (39) साल की उम्र में भी पांच खिलाड़ी उन्हें रोक नहीं पाते। अगर किसी खिलाड़ी के पास ऐसी फिटनेस और कौशल हो कि पांच विरोधी भी उसे रोक न सकें, तो हम जानते हैं कि कौशल ही सर्वोपरि है।’’

हरभजन ने कोहली को श्रेय देते हुए कहा कि उन्होंने खिलाड़ियों को लगातार यह कहकर जीत का आत्मविश्वास जगाया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिटनेस के मामले में कोहली ने ही उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उन्हें यह अहसास दिलाया कि उनकी क्षमता उनकी सोच से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, ‘‘यह बदलाव सबसे पहले विराट कोहली 2014-15 में कप्तान बनने के बाद लाए थे। उससे पहले हम यह नहीं सोचते थे कि हम आखिरी दिन 400 रन का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

विराट ने अपने साथियों से कहा, ‘चलो कम से कम कोशिश तो करते हैं। हम हार सकते हैं, लेकिन अगर हम कोशिश करते रहेंगे तो एक दिन हम आखिरी पारी में 400 से अधिक रन जरूर बना लेंगे।’’ हरभजन ने कहा, ‘‘अगर हमें आखिरी दिन 10 विकेट लेने हों, तो हम इसके लिए पूरी कोशिश करेंगे। जीतने की मानसिकता और ड्रॉ से संतुष्ट न होने का जज़्बा विराट कोहली में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान फिटनेस संस्कृति को बढ़ावा देना था। फिटनेस क्रांति लाने का 90 प्रतिशत श्रेय कोहली को जाता है।

फिटनेस के बारे में मेरी धारणा सहनशक्ति थी, लेकिन विराट ने इस टीम को यह विश्वास दिलाया कि अगर आप फिट हैं, तो आप हवा में उड़ सकते हैं।’’ इसलिए हरभजन की मुख्य कोच गौतम गंभीर को सलाह है कि वे इन दोनों खिलाड़ियों के अनुभव पर भरोसा करें। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं कोच होता तो मेरा काम उन्हें मंच प्रदान करना होता, क्योंकि रोहित और विराट से मेरी अपेक्षाएं वैभव सूर्यवंशी से कहीं अधिक होतीं। इन दोनों के पास अनुभव है। इनके पास 300 मैचों का अनुभव है जो सूर्यवंशी के पास नहीं है। यह जरूर है सूर्यवंशी आकर गेंदबाजों की जमकर धुनाई कर सकते हैं, लेकिन विराट और रोहित के पास वो अनुभव है।’’

हरभजन ने कहा, ‘‘फिटनेस हमारी प्राथमिकता है और प्रदर्शन मायने रखता है। प्रदर्शन ही अंतिम मापदंड है। इसलिए यदि ये दोनों खिलाड़ी रन बना सकते हैं और श्रेयस (अय्यर) या यशस्वी (जायसवाल) जैसी फिटनेस रखते हैं तो बाकी कुछ भी मायने नहीं रखता।’’ जालंधर के रहने वाले हरभजन ने अपने शानदार करियर में टेस्ट क्रिकेट में 416 और वनडे क्रिकेट में 269 विकेट लिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी आमतौर पर जानते हैं कि उन्हें अपने करियर को कब समाप्त करना है। उन्होंने याद किया कि कैसे उनके शरीर ने उन्हें संन्यास लेने की औपचारिक घोषणा करने से पूरे छह साल पहले ही रुकने का संकेत दे दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘रोहित और विराट को इसका जवाब अपने भीतर से ही मिलेगा। आपको तब अहसास होता है जब आप उस मुकाम पर पहुंच जाते हैं जहां आपको संन्यास लेना पड़ता है।’’ हरभजन ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2021 में संन्यास लिया, लेकिन उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2015 में गॉल में श्रीलंका के खिलाफ खेला था, जहां दिनेश चांदीमल ने उनकी गेंद की जमकर धुनाई की थी जिससे उन्हें अहसास हुआ कि शायद लाल गेंद के क्रिकेट को अलविदा कहने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपको तब अहसास होता है जब आप उस मुकाम पर पहुंच जाते हैं जहां अगर आपको खेलना जारी रखना है, तो आपको पहले से ज्यादा मेहनत करनी होगी। आप 35 साल से अधिक उम्र के हैं और आपसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आप वही करें जो आप 18 या 20 साल की उम्र में करते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उस समय आपके नाम पर 400 विकेट दर्ज होते हैं और आपसे उसी स्तर का प्रदर्शन करने की अपेक्षा की जाती है। कई खिलाड़ी प्रदर्शन में आई गिरावट से उबर सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होंगे जिन्हें लगेगा, ‘बस अब बहुत हो गया।’ अगर आप में हिम्मत है तो खेलना जारी रखने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो अपने शरीर की बात सुननी चाहिए।’’ हरभजन ने स्वीकार किया कि रविचंद्रन अश्विन का अच्छा प्रदर्शन करने वाले ऑफ-स्पिनर के रूप में उभरना भी उस समय उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘‘अश्विन पहले से ही अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। आपको यह वास्तविकता स्वीकार करनी होगी कि यह खिलाड़ी (अश्विन) अच्छा खेल रहा है। अगर मुझे अश्विन को पीछे छोड़ना होता तो मुझे बिल्कुल नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ती और उतनी ही मेहनत करनी पड़ती जितनी मैंने अपने पहले 400 विकेट के लिए की थी।

क्या मैं ऐसा कर पाता? मेरी अंतरात्मा ने इसका जवाब दिया कि मैं ऐसा नहीं कर सकता।’’ हरभजन ने 2027 में होने वाले विश्व कप के लिए भारत की वनडे टीम के बारे में बात करते हुए कहा कि अभी एक साल बाकी है, इसलिए वह फिलहाल उसके संयोजन को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब आपके पास बहुत सारे विकल्प होते हैं, तो यह भी एक समस्या हो सकती है, हालांकि विकल्प होना अच्छी बात है। अब जब वनडे विश्व कप की बात आती है, तो मेरा मानना ​​है कि टूर्नामेंट के शुरू होने से छह महीने पहले ही टीम प्रबंधन को मुख्य टीम को लेकर स्पष्ट हो जाना चाहिए और खिलाड़ियों को पता होना चाहिए कि उनकी भूमिका क्या है।

Thu, 13 Aug 2026 13:42:46 +0530

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