बरसात की गर्मी में चाय-कॉफी छोड़ पिएं ये 5 नेचुरल ड्रिंक्स, ताजगी और एनर्जी से बॉडी रहेगी कूल-कूल
Summer Cooling Tips: गर्मियों में ज्यादा चाय-कॉफी पीने के बजाय कुछ नेचुरल ड्रिंक्स को डाइट में शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है. नींबू पानी शरीर को हाइड्रेट रखने और ताजगी देने में मदद करता है. जबकि नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने में सहायक है. छाछ पाचन को बेहतर रखने के साथ शरीर को ठंडक देती है. वहीं, पुदीना-नींबू ड्रिंक भी ताजगी बनाए रखने में मदद कर सकता है. इन पेय पदार्थों का सेवन पर्याप्त पानी के साथ करें और अत्यधिक मीठे पेय से बचें. गर्मियों में संतुलित आहार और पर्याप्त हाइड्रेशन बेहद जरूरी है.
MP में बिजली महंगी होने की आहट, उमंग सिंघार बोले “जनता की जेब काटना नहीं, चोरी रोकना सरकार का काम”
मध्यप्रदेश में बिजली की दरों और लाइन लॉस को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता पहले से महंगाई का सामना कर रही है और अब बिजली को भी महंगा करने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ ड्राफ्ट में बिजली की दरों में करीब 10 फीसदी तक बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि “चोरी रोकना सरकार और बिजली कंपनी की जिम्मेदारी है, जनता की जेब काटना नहीं।”
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने कहा है कि विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ ड्राफ्ट में बिजली कंपनियों के नुकसान और लाइन लॉस की वसूली का बड़ा हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि 14 फीसदी के निर्धारित नुकसान की जगह 24.5 फीसदी तक नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं से कराने का प्रावधान चिंता का विषय है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बिल पर पड़ेगा।
बिजली व्यवस्था में निवेश को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपये के निवेश और बिजली नेटवर्क को आधुनिक बनाने की योजनाओं के बावजूद यदि लाइन लॉस और बिजली चोरी का बोझ ईमानदारी से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं पर डाला जाता है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने जारी किया नए टैरिफ नियमों का ड्राफ्ट
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने अगले पांच साल के लिए नए टैरिफ नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इस ड्राफ्ट में बिजली की वितरण हानि (लाइन लॉस) की स्वीकार्य सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। अभी मध्य क्षेत्र में यह सीमा लगभग 14 प्रतिशत है। ड्राफ्ट में इसे 24.5 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है। पूर्व क्षेत्र के लिए 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 23 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
इसका अर्थ ये है कि अगर सिस्टम में 100 यूनिट बिजली डाली जाती है तो अब 24.5 यूनिट तक का नुकसान जायज माना जा सकता है। इससे अतिरिक्त बिजली खरीद की लागत उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार इससे बिजली बिल पर करीब 10 प्रतिशत तक बोझ बढ़ने की आशंका है। यानी 1,000 का बिल 1,100 तक पहुंच सकता है। आयोग ने इस ड्राफ्ट पर 1 सितंबर तक जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं और इसपर अंतिम फैसला जनसुनवाई के बाद लिया जाएगा।
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