Bhojshala Case: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा भोजशाला केस, मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट पर लगाया ये आरोप
Bhojshala Case: भोजशाला विवाद में हाई कोर्ट ने गत 15 मई को फैसला सुनाया था। भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया था। अब मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। धार के मुस्लिम निवासी जिब्रान अंसारी के वकील अशहर वारसी ने कहा कि हमने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से यह निवेदन किया है कि यह पूरा फैसला एकतरफा और एकतरफा है।
वकील अशहर वारसी ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला तथ्यों की जांच किए बिना सुनाया गया है और इसमें 'सबूतों की पुष्टि' शामिल है, जो मूल रूप से रिट याचिका के दायरे में अस्वीकार्य है। हमने इसे चुनौती दी है... चूंकि धार में पहले से ही एक दीवानी मुकदमा लंबित है, इसलिए हमने उस चल रहे मुकदमे के संबंध में विशेष तर्क दिए थे।
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मुस्लिम पक्ष ने दिया ये तर्क
अशहर वारसी ने कहा कि हमने तर्क दिया कि चूंकि एक दीवानी मुकदमा पहले से ही चल रहा है, इसलिए सभी संबंधित पक्षों को उस मंच पर निर्देशित किया जाना चाहिए। हमने अपनी याचिका दायर कर दी है। अब हम न्यायालय द्वारा मामले को सूचीबद्ध करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण), केंद्र सरकार, राज्य सरकार और राजस्व विभाग को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
#WATCH | Indore, MP | On Bhojshala Case, Ashhar Warsi, lawyer for Dhar Muslim residents Jibran Ansari, says, "... We have specifically submitted before the Supreme Court that this entire judgment is one-sided and unilateral. It was delivered without examining the facts and… pic.twitter.com/SQI2ZcySI3
— ANI (@ANI) May 28, 2026
हाई कोर्ट ने सुनाया था ये फैसला
गत 15 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के जज विजय कुमार शुक्ला और जज आलोक अवस्थी की पीठ ने धार भोजशाला को लेकर 242 पेज का फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भोजशाला मस्जिद नहीं, बल्कि मंदिर है। साथ ही 7 अप्रैल 2023 को जारी ASI के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अनुमति दी गई थी।
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