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मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे : पीरियड्स को लेकर चुप्पी तोड़ना जरूरी, स्वच्छता और जागरूकता से बनेगी बात

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। पीरियड्स या मासिक धर्म महिलाओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण होता है, लेकिन कई बार उन्हें इस दौरान सामाजिक भेदभाव और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिस वजह से वह खुलकर बात तक नहीं कर पातीं। ऐसे में हर साल 28 मई को दुनियाभर में ‘मासिक स्वच्छता जागरूकता दिवस’ (मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे) मनाया जाता है।

इसका उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान स्वच्छता, सुरक्षित देखभाल और सही जानकारी के प्रति जागरूक करना है। आज भी समाज के कई हिस्सों में इस विषय को लेकर झिझक और गलत धारणाएं व्याप्त हैं, जिसके कारण कई लड़कियां खुलकर इस विषय पर बात नहीं कर पातीं। हालांकि, यह एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है और इसे लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। ऐसे में इस दिवस की महत्ता और भी बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि माहवारी को लेकर खुलकर बातचीत और सही जानकारी देना समय की जरूरत है। इससे न केवल महिलाओं और किशोरियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि समाज में फैली भ्रांतियां भी दूर होंगी। मासिक स्वच्छता जागरूकता दिवस इसी संदेश को मजबूत करने का प्रयास है कि माहवारी कोई शर्म का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू है।

यूनिसेफ के अनुसार, मासिक धर्म किशोरियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण होता है, लेकिन कई बार उन्हें इस दौरान सामाजिक भेदभाव और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, ट्रांसजेंडर पुरुष और गैर-बाइनरी लोग भी अपनी पहचान के कारण जरूरी सुविधाओं और स्वच्छता उत्पादों से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।

नेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक, मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इस समय साफ और सुरक्षित सेनेटरी उत्पादों का उपयोग करना चाहिए। साथ ही हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि संक्रमण से बचा जा सके। स्कूल, कॉलेज या ऑफिस जाने वाली महिलाओं और लड़कियों को अपने साथ अतिरिक्त सेनेटरी पैड, पानी की बोतल और डिस्पोजल बैग रखना चाहिए। इसके अलावा, आरामदायक और ढीले कपड़े पहनने की सलाह भी दी जाती है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीरियड्स के दौरान सुझाए गए हल्के व्यायाम और योग करने से शरीर को आराम मिलता है और दर्द में भी राहत मिल सकती है। सोते समय साफ और नया सेनेटरी पैड इस्तेमाल करना जरूरी माना जाता है। सही दिनचर्या अपनाकर इस दौरान होने वाली असुविधाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ खानपान को भी इस दौरान बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। पौष्टिक और हल्का भोजन शरीर को एनर्जी देने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाए रखता है।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी जेब से क्यों लग रहे पैसे? इलाज से पहले जान लें ये नियम और सीमाएं

Ayushman Bharat -Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana: देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच बीमारी और अस्पताल का खर्च आज आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है. अगर घर में कोई बड़ी बीमारी दस्तक दे दे, तो इंसान की कई सालों की जमा-पूंजी और बचत पल भर में खत्म हो जाती है. ऐसे मुश्किल हालातों में केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना करोड़ों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी राहत बनकर सामने आई है. 

इलाज से पहले जान लें नियम

इस जनकल्याणकारी योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है. लेकिन आज भी देश के बहुत से लोगों के बीच यह बड़ी गलतफहमी है कि आयुष्मान कार्ड बनते ही हर तरह की बीमारी और इलाज पूरी तरह मुफ्त हो जाता है. हकीकत यह है कि इस योजना के भी कुछ कड़े नियम और सीमाएं हैं, जिनकी सही जानकारी न होने पर आपको अस्पताल में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

सिर्फ भर्ती होने पर ही मिलेगा योजना का पूरा लाभ

आयुष्मान भारत योजना का सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी नियम यह है कि इसका फायदा केवल अस्पताल में भर्ती होने पर ही दिया जाता है. अगर कोई व्यक्ति सामान्य मौसमी बुखार, खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द या किसी अन्य हल्की बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाता है, तो उसका पूरा खर्च इस योजना में शामिल नहीं होता है. इसका सीधा मतलब यह है कि डॉक्टर की परामर्श फीस, सामान्य चेकअप, ओपीडी विजिट, रूटीन ब्लड टेस्ट, एक्स-रे या बिना अस्पताल में भर्ती हुए कराई गई किसी भी तरह की जांच का पैसा मरीज को खुद ही अपनी जेब से देना पड़ता है. जब मरीज को डॉक्टर की सलाह पर कम से कम 24 घंटे के लिए अस्पताल के बेड पर भर्ती किया जाता है, तभी से आयुष्मान कार्ड के तहत मुफ्त इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है.

इन गंभीर बीमारियों का खर्च होता है कवर

सरकार ने इस योजना के दायरे में कई ऐसी गंभीर बीमारियों और महंगी सर्जरीज को शामिल किया है, जिनका खर्च उठाना किसी भी आम परिवार के बस की बात नहीं होती है. इसके तहत दिल की गंभीर बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, बायपास सर्जरी और हाई बीपी का पूरा इलाज कवर किया जाता है. इसके अलावा जानलेवा कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी, रेडिएशन और ब्रेस्ट, फेफड़े, पेट और मुंह के कैंसर की सर्जरी भी इस कार्ड के जरिए मुफ्त होती है.

दिमाग सहित किडनी-लीवर के रोगों का इलाज

दिमाग से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल बीमारियां जैसे स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, पार्किंसन और मिर्गी के साथ-साथ किडनी और लीवर के गंभीर रोगों का इलाज भी इसके दायरे में आता है. इसमें क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीजों के लिए डायलिसिस और सिरोसिस व हेपेटाइटिस का इलाज शामिल है. 

हड्डियों के बड़े ऑपरेशन भी हैं शामिल

हड्डियों के बड़े ऑपरेशन जैसे फ्रैक्चर, हिप और नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के अलावा महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं जैसे नॉर्मल डिलीवरी, सी-सेक्शन डिलीवरी और नवजात शिशुओं के लिए एनआईसीयू केयर की सुविधा भी इस योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त मिलती है.

इस इलाज का नहीं मिलेगा एक भी पैसा

आयुष्मान योजना में जहां कई बड़े और गंभीर इलाज शामिल हैं, वहीं कुछ ऐसी चिकित्सा सुविधाएं भी हैं जिन्हें इस योजना से पूरी तरह बाहर रखा गया है. अस्पताल में बिना भर्ती हुए लिया जाने वाला ओपीडी परामर्श इस कार्ड से कवर नहीं होता है. इसके साथ ही सुंदरता बढ़ाने के लिए कराई जाने वाली कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जरी, निसंतानता के लिए आईवीएफ तकनीक और टेस्ट ट्यूब बेबी का इलाज भी इस योजना के तहत नहीं कराया जा सकता है. दांतों का सामान्य इलाज, शरीर के लिए जरूरी विटामिन और सप्लीमेंट्स की दवाइयां, और किसी भी प्रकार के नशे की लत को छुड़ाने या खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश से जुड़े इलाज का खर्च भी सरकार इस योजना के माध्यम से नहीं उठाती है.

हर अस्पताल में नहीं चलता यह कार्ड 

अक्सर लोग सही जानकारी के अभाव में किसी भी प्राइवेट अस्पताल में मरीज को लेकर पहुंच जाते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि वहां आयुष्मान कार्ड काम ही नहीं कर रहा है. आपको यह बात अच्छी तरह समझनी होगी कि इस योजना का लाभ देश के केवल उन्हीं सरकारी और चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों में मिलता है जो सरकार के पैनल में आधिकारिक रूप से शामिल हैं. इसलिए जब भी आप किसी मरीज का इलाज शुरू कराने जाएं, तो सबसे पहले अस्पताल के काउंटर पर जाकर या आयुष्मान मित्र से यह जरूर पता कर लें कि वह अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़ा हुआ है या नहीं.

ये लोग नहीं उठा सकते इस योजना का फायदा

यह महत्वपूर्ण योजना मुख्य रूप से देश के आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब और जरूरतमंद परिवारों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. समाज का हर वर्ग इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र नहीं माना गया है. ऐसे लोग जो सरकारी नौकरी करते हैं, हर साल इनकम टैक्स भरते हैं, जिनका पीएफ कटता है या जिन्हें ईएसआईसी की स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं, वे आमतौर पर इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं. अगर कोई अपात्र व्यक्ति गलत तरीके से इस कार्ड को बनवाता है, तो जांच के बाद उसका कार्ड रद्द किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: आयुष्मान भारत की बड़ी उपलब्धि: 100 करोड़ हेल्थ रिकॉर्ड आभा खातों से हुए लिंक

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