भारतीय खेल जगत को बड़ा झटका, पहला शूटिंग गोल्ड दिलाने वाले रणधीर सिंह का निधन
भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। एशियाई खेलों में भारत को पहला शूटिंग गोल्ड दिलाने वाले दिग्गज निशानेबाज और वरिष्ठ खेल प्रशासक रणधीर सिंह का निधन हो गया है। 79 साल की उम्र में उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे।
उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। खिलाड़ियों से लेकर खेल अधिकारियों तक हर कोई उन्हें याद कर रहा है। रणधीर सिंह सिर्फ एक बेहतरीन निशानेबाज ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने भारतीय खेल प्रशासन को भी नई पहचान दिलाई थी।
1978 एशियाई खेलों में रचा था इतिहास
Asian Games में रणधीर सिंह ने वह कर दिखाया था, जो उस समय भारतीय शूटिंग के लिए एक सपना माना जाता था। साल 1978 में बैंकॉक एशियाई खेलों में उन्होंने ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। वह एशियाई खेलों में शूटिंग का गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने थे।
उस दौर में भारत की शूटिंग खेलों में ज्यादा पहचान नहीं थी, लेकिन रणधीर सिंह की इस जीत ने देश के युवाओं को नई प्रेरणा दी। उनकी उपलब्धि ने भारतीय शूटिंग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का काम किया।
पांच ओलंपिक में किया भारत का प्रतिनिधित्व
रणधीर सिंह का करियर सिर्फ एशियाई खेलों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 1968 से 1984 तक लगातार पांच ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
उनकी प्रतिभा और योगदान को देखते हुए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। खेल के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि शूटिंग से संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने खेल प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाई।
खेल प्रशासन में भी छोड़ी बड़ी छाप
खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद रणधीर सिंह ने खेल प्रशासन में भी शानदार काम किया। साल 1987 से 2014 तक वे इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के मानद सचिव-जनरल रहे।
इसके अलावा 1991 से 2015 तक उन्होंने ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के सचिव-जनरल के रूप में काम किया। इस दौरान एशियाई खेलों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। वे 2001 से 2014 तक इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के सदस्य भी रहे। खेल प्रशासन में उनकी मजबूत पकड़ और अनुभव के कारण उन्हें दुनिया भर में सम्मान मिला।
OCA अध्यक्ष बनने वाले पहले भारतीय थे रणधीर सिंह
सितंबर 2024 में रणधीर सिंह ने एक और बड़ा इतिहास रचा था। उन्हें ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया का अध्यक्ष चुना गया था। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय बने थे। 45 एशियाई देशों ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें निर्विरोध चुना था। हालांकि स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्होंने 26 जनवरी 2026 को इस पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का बड़ा पल माना गया था।
खेलों की विरासत परिवार से मिली
रणधीर सिंह का परिवार लंबे समय से खेलों से जुड़ा रहा है। उनके पिता राजा भलिंद्र सिंह भी अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों से जुड़े रहे थे। वे 1947 से 1992 तक IOC सदस्य रहे।
वहीं उनके चाचा महाराजा यादवेंद्र सिंह ने 1951 में दिल्ली में हुए पहले एशियाई खेलों के आयोजन में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे माहौल में पले-बढ़े रणधीर सिंह ने खेलों को सिर्फ करियर नहीं, बल्कि अपनी पहचान बना लिया।
खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने दी श्रद्धांजलि
रणधीर सिंह के निधन के बाद देशभर से उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। कई पूर्व खिलाड़ियों, खेल संगठनों और नेताओं ने उनके योगदान को याद किया। लोगों का कहना है कि उन्होंने भारतीय खेलों को दुनिया में नई पहचान दिलाई। खासकर शूटिंग खेल को आगे बढ़ाने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
रेत के विवाद में ताबड़तोड़ फायरिंग, एक युवक की मौत दूसरे की हालत गंभीर, आरोपी फरार पुलिस कर रही तलाश
ग्वालियर में रेत का खूनी खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है, आज बुधवार को रेत विवाद में गोलियां चल गई और एक युवक की हत्या कर दी गई जबकि एक अन्य घायल है जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है उसकी हालत गंभीर बनी हुई है, आरोपी फरार है जिनकी तलाश में पुलिस पार्टियाँ रवाना की गई हैं।
जानकारी के अनुसार दीनदयाल नगर पटरी रोड पर कुछ लोग रेत का कारोबार करते हैं, इन लोगों का बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई का काम है, सत्यभान गुर्जर और विष्णु दुबे भी पास पास में ही रेत डंप करते हैं और बेचते हैं आज सुबह जब विष्णु दुबे ने अपनी रेत डंप की तो सत्यभान के दामाद भोला गुर्जर भोलू ने उसे थोड़ा ध्यान से काम करने के लिए कहा इसी बात पर इन लोगों के बीच में विवाद होने लगा।
थोड़ी ही देर में दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और विष्णु ने अपनी कमर में लगी पिस्टल निकालकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी उसे साथियों ने भी रायफल से फायरिंग कर दी, गोली भोला और उसके ससुर सत्यभान गुर्जर को लगी, गोलियों की आवाज सुनकर लोग दौड़े तब तक आरोपी भाग निकले।
घायल की हालत गंभीर, परिजनों में आक्रोश
परिजनों ने पड़ोसियों की मदद से घायलों को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ भोला की मौत हो गई और सत्यभान की हालत गंभीर बनी हुई है डॉक्टर उसका इलाज कर रहे है। परिजनों ने बताया कि विष्णु दुबे रिटायर फौजी हैऔर वो इसी बात की ठसक में रहता है कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
आरोपियों की शीघ्र गिरफ़्तारी की मांग
हत्या के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है मृतक की उम्र 25-26 साल की बताई गई है, परिजनों का कहना है कि अब विष्णु की रंगदारी चलने नहीं दी जाएगी। उन्होंने मांग की है कि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाये और उनके घरों पर बुलडोजर चलाया जाए तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे।
पुलिस कर रही आरोपियों की तलाश
एडिशनल एसपी सुमन सिंह गुर्जर ने बताया कि रेत के विवाद पर विष्णु दुबे ने अपने साथियों के साथ गोलियां चलाई हैं, इसमें भोला गुर्जर नामक युवक की मौत हो गई है जबकि सत्यभान गुर्जर अस्पताल में भर्ती है , आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया है उनकी तलाश में पुलिस पार्टियाँ रवाना की गई हैं।




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