पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी की बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आक्रामक मुहिम के नतीजे अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगे हैं। सरकार के “पकड़ो, हटाओ, बाहर करो” अभियान के बाद उत्तर 24 परगना के बिथारी हाकिमपुर सीमा क्षेत्र में सैकड़ों बांग्लादेशी घुसपैठिये अपने देश वापस लौटने के लिए जमा हो गये हैं। वर्षों से भारत में अवैध तरीके से रह रहे इन लोगों में ऐसा भय बैठ गया है कि अब वे खुद ही सीमा पार कर भागने की कोशिश कर रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आयी कि बांग्लादेश लौटने के लिए एकत्रित हुए कई घुसपैठियों के पास भारतीय मतदाता पहचान पत्र भी पाये गये। इस खुलासे ने पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एसआईआर प्रक्रिया के दौरान संदिग्ध नाम मतदाता सूची से हटाये जा रहे थे, तब तृणमूल कांग्रेस लगातार हंगामा क्यों कर रही थी? आखिर क्यों कहा जा रहा था कि पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं और लोकतंत्र की हत्या की जा रही है?
अब सच्चाई धीरे धीरे सामने आ रही है। जिन लोगों के पास भारत में रहने का कोई वैध दस्तावेज नहीं था, जिन लोगों ने खुद स्वीकार किया कि वे दलालों की मदद से सीमा पार कर भारत आये, उन्हीं के पास भारतीय मतदाता पहचान पत्र मिलना यह साबित करता है कि वर्षों तक घुसपैठियों को संरक्षण देकर वोट बैंक की राजनीति की गयी। लोकतंत्र बचाने का ढोंग करने वालों ने ही लोकतंत्र को भीतर से खोखला करने का काम किया। अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में जोड़कर चुनावी व्यवस्था को दूषित किया गया और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया।
उधर, सीमा पर बने हालात बेहद गंभीर हैं। महिलाएं, बच्चे और पुरुष बड़ी संख्या में सीमा तक पहुंचे, जहां सीमा सुरक्षा बल ने उन्हें हिरासत में लेकर पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से बांग्लादेश को सौंपा जायेगा। यह दृश्य साफ बता रहा है कि अब अवैध घुसपैठियों के दिन पूरे हो चुके हैं और सरकार किसी भी कीमत पर देश की सुरक्षा से समझौता करने वाली नहीं है।
मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी अवैध घुसपैठिये भारत में छिपकर रह रहे हैं, वे तुरंत देश छोड़ दें, वरना सरकार कठोर कार्रवाई करेगी। प्रशासनिक बैठकों में अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि अवैध बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द वापस भेजा जाये। सरकार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि अब अवैध घुसपैठ को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
उधर, सीमा पर लौट रहे कई बांग्लादेशियों ने स्वीकार किया कि वे वर्षों से निर्माण स्थलों, होटलों, मछली कारोबार और घरेलू कामों में लगे हुए थे। कई लोगों ने माना कि उनके पास भारतीय नागरिकता से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज नहीं है। इसके बावजूद उनके पास मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों का मिलना यह संकेत देता है कि अवैध घुसपैठ को संगठित राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।
हम आपको यह भी बता दें कि राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठियों के लिए होल्डिंग सेंटर भी तेजी से तैयार करने शुरू कर दिये हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद में ऐसे पहले दो केंद्र सक्रिय हो चुके हैं जहां पकड़े गये घुसपैठियों को रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि अब अवैध लोगों को जेलों में रखकर जनता के पैसे से भोजन, कपड़े और दवाइयां नहीं दी जायेंगी। देखा जाये तो यह कानून पहले भी मौजूद था, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के कारण उस पर अमल नहीं किया गया। अब देश और राज्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
सीमा सुरक्षा बल लगातार पूछताछ कर घुसपैठियों की पहचान कर रहा है। उनके अंगुलियों के निशान लिये जा रहे हैं, तस्वीरें खींची जा रही हैं और फिर बांग्लादेश सीमा रक्षक बल से संपर्क कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का निर्णायक अभियान बन चुका है।
हम आपको बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच चार हजार किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे बड़ी जमीनी सीमाओं में गिनी जाती है। वर्षों से इस सीमा का फायदा उठाकर घुसपैठ, तस्करी और अवैध कारोबार चलाया जाता रहा है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। असम समेत कई सीमावर्ती राज्यों में हजारों संदिग्ध विदेशियों की पहचान की जा चुकी है और लगातार कार्रवाई जारी है।
उधर, बांग्लादेश में भी इस कार्रवाई के बाद बेचैनी बढ़ गयी है। सीमा रक्षक बल ने कई इलाकों में गश्त तेज कर दी है और लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी जा रही है। बांग्लादेशी अधिकारियों को डर है कि बड़ी संख्या में अवैध लोगों की वापसी हो सकती है। इसलिए सीमा क्षेत्रों में लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि कोई अवैध घुसपैठ या जबरन प्रवेश की कोशिश न हो सके।
देखा जाये तो यह पूरा घटनाक्रम उन सभी अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए अंतिम चेतावनी है जो अब भी भारत में फर्जी पहचान और अवैध दस्तावेजों के सहारे छिपे बैठे हैं। उन्हें समझ लेना चाहिए कि अब बच निकलने का समय खत्म हो चुका है। सरकार, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। अब या तो वे खुद लौट जायें, वरना कानून उन्हें खोजकर बाहर करेगा।
हम आपको यह भी बता दें कि इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "बांग्लादेशी यहां क्यों रहेंगे? वे केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। वे गरीबों कल्याण योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्हें नागरिकता देकर, वोटर ID और आधार कार्ड देकर और उन्हें मतदाता बनाकर वोट लिया जाता था...ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें अलग किया जाएगा और गृह मंत्री पहले ही बोल चुके हैं कि उन सभी को वापस भेजा जाएगा।"
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खजुराहो, 27 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी खजुराहो मे ‘योग महोत्सव 2026’ के दौरान घोषणा की है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) 2026 का मुख्य समारोह 21 जून को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित किया जाएगा।
केंद्रीय आयुष मंत्री जाधव ने बताया कि इस वर्ष की थीम स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग रखी गई है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली में योग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल खजुराहो के पश्चिमी समूह मंदिर परिसर में आयोजित योग महोत्सव 2026 को काउंटडाउन की शुरुआत का प्रतीक माना गया है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई), आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों योग साधकों ने सामूहिक रूप से कॉमन योग प्रोटोकॉल का प्रदर्शन किया।
सभा को संबोधित करते हुए जाधव ने कहा कि भारत की पारंपरिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना से समृद्ध कोलकाता आईडीवाई 2026 के मुख्य आयोजन की मेजबानी करेगा। स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग थीम बढ़ती आयु में समग्र स्वास्थ्य और संतुलित जीवन के लिए योग की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है। खजुराहो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के कारण भारत की प्राचीन परंपराओं और वेलनेस संस्कृति के समन्वय का प्रतीक है, तथा इसमें वैश्विक योग एवं वेलनेस केंद्र बनने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप आयुष मंत्रालय योग को गांव-गांव, घर-घर, विद्यालयों, कार्यालयों और समुदायों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
निवारक स्वास्थ्य सेवा के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि योग और आयुष आहार जैसी पहल संतुलित पोषण, अनुशासित जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने आईडीवाई 2026 में जनभागीदारी बढ़ाने और ऑनलाइन पंजीकरण को सुगम बनाने हेतु ‘योग संगम पोर्टल’ का पुनः शुभारंभ किया तथा राज्यों और संस्थानों में समर्पित योग स्थलों के विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘योग पार्क पोर्टल’ लॉन्च किया।
उन्होंने योग, स्वास्थ्य और वेलनेस का संदेश देने वाली नई योग टी-शर्ट का भी अनावरण किया और बताया कि योग 365 अभियान के अंतर्गत आयोजित 100-दिवसीय निशुल्क योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में दो लाख से अधिक लोगों ने भाग लेकर ‘योग मित्र’ प्रमाणन प्राप्त किया है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होते हुए अपने संदेश में कहा कि योग और खजुराहो भारत की सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न प्रतीक हैं।
खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग वैश्विक स्वास्थ्य एवं वेलनेस आंदोलन बन चुका है और आज लगभग 190 देशों में इसका अभ्यास किया जा रहा है।
--आईएएनएस
एसएनपी/एसके
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