पीयूष गोयल ने कनाडा में भारतीय ग्रोथ स्टोरी में निवेश का दिया न्योता
टोरंटो/नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कनाडा के टोरंटो में ‘राजनीतिक पुनर्संतुलन से वाणिज्यिक परिणाम तक’ शीर्षक वाले उद्घाटन मंत्री स्तरीय पूर्ण सत्र को संबोधित किया।
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू की मौजूदगी में इवेंट को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने बिजनेस को आसान बनाने और इन्वेस्टर-फ्रेंडली माहौल बनाने के लिए भारत की लगातार कोशिशों के बारे में बात की। उन्होंने कनाडा के व्यवसायिक और औद्योगिक लीडर्स को भारत की ग्रोथ स्टोरी में सक्रिय भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।
गोयल ने कहा, इस बात पर जोर दिया कि कैसे व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने में एक अहम कैटलिस्ट का काम करेगा, साथ ही अलग-अलग सेक्टर में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा।”
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने आगे कहा कि उन्हें भरोसा है कि भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी का अगला अध्याय भरोसे से आगे बढ़ेगा, जिससे हमारे देशों की खुशहाली बढ़ेगी।
सरकार ने मंगलवार को कहा कि ओटावा में हाई-लेवल ट्रेड बातचीत के बाद गोयल ने टोरंटो में इंडस्ट्री राउंडटेबल और बी2बी मीटिंग के एक बड़े प्रोग्राम में भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल को लीड किया, जिसका मकसद मंत्रीस्तरीय कमिटमेंट को प्राथमिक क्षेत्रों में ठोस कमर्शियल पार्टनरशिप में बदलना है।
यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम मार्क कार्नी द्वारा मार्च 2026 में कनाडाई पीएम के नई दिल्ली दौरे के दौरान तय किए गए काम को आगे बढ़ाता है। इसके साथ ही यह 2025 के मध्य से दोनों देशों के बीच लगातार उच्चस्तरीय जुड़ाव को आगे बढ़ाता है।
अभी दोनों देशों के बीच लगभग 8.5 बिलियन डॉलर का व्यापार है, दोनों सरकारों ने इसे 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का एक बड़ा साझा लक्ष्य रखा है।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार गोयल कनाडा में अब तक के सबसे बड़े भारतीय बिजनेस डेलिगेशन को लीड कर रहे हैं। इस डेलिगेशन में 100 से ज्यादा कंपनियों के औद्योगिक लीडर्स शामिल हैं। यह भारत-कनाडा आर्थिक संबंध को पूरी तरह से ठीक करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मंत्रालय ने आगे कहा कि कनाडा के तीन दिन के दौरे का मकसद भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध को आगे बढ़ाना है, जिसमें भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) के लिए चल रही बातचीत को तेज़ करने पर खास फोकस होगा।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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दिल्ली में राशन कार्ड धारकों को राहत, कमाई की सीमा हुई 2.5 लाख; लाखों कामकाजी परिवारों को सीधा फायदा
Delhi Ration Card Income New Limit: दिल्ली सरकार की कैबिनेट बैठक में आम जनता के हित में कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं. सरकार ने राशन कार्ड योजना का लाभ उठाने वाले परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी राहत का ऐलान किया है. अब दिल्ली में राशन कार्ड बनवाने के लिए सालाना पारिवारिक आमदनी की सीमा को बढ़ा दिया गया है. पहले यह सीमा केवल एक लाख रुपए सालाना थी, जिसे अब बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर दिया गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद और निम्न-मध्यम आय वर्ग के परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जा सके. इस फैसले से दिल्ली के लाखों कामकाजी परिवारों को सीधा फायदा पहुंचेगा.
राशन वितरण के लिए डिजिटल करेंसी
इस कैबिनेट बैठक में दूसरा सबसे बड़ा और क्रांतिकारी फैसला राशन वितरण की प्रणाली को लेकर किया गया है. दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए एक नया डिजिटल करेंसी सिस्टम शुरू करने की घोषणा की है. इस नई व्यवस्था के तहत अब लाभार्थियों को राशन की दुकानों पर नकद लेनदेन नहीं करना होगा. डिजिटल करेंसी की रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी. इस आवंटित राशि का इस्तेमाल करके ही लोग राशन खरीद सकेंगे. सरकारी अधिकारियों ने साफ किया है कि अब दिल्ली में राशन केवल इसी डिजिटल करेंसी सिस्टम के जरिए मिलेगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में होने वाली पुरानी गड़बड़ियों और राशन की चोरी पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी.
सात लाख से ज्यादा राशन कार्ड रद्द
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में जांच के बाद कुल 7.71 लाख अमान्य राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं. सरकार ने जब पुरानी राशन व्यवस्था और लाभार्थियों के आंकड़ों की गहराई से जांच की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर इन फर्जी और गलत राशन कार्डों को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने का फैसला लिया गया. मुख्यमंत्री ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के कारण असली हकदारों तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पा रही थी, जिसे ठीक करना बहुत जरूरी हो गया था.
जांच में सामने आई बड़ी धांधली
सरकार द्वारा कराई गई जांच में यह बात सामने आई कि दिल्ली में 1,44,000 राशन कार्ड ऐसे बने हुए थे, जो तय किए गए इनकम क्राइटेरिया यानी आय सीमा के दायरे में फिट नहीं बैठते थे. इसके अलावा 35,800 लोग ऐसे पाए गए जिनके नाम पर राशन कार्ड तो चालू था, लेकिन उन्होंने पिछले पूरे एक साल में एक बार भी दुकान से राशन नहीं लिया था. हद तो तब हो गई जब जांच में पता चला कि 29,580 राशन कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर चल रहे थे जिनकी मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी है. इन सभी अमान्य मामलों को देखते हुए सरकार ने इन्हें बंद कर दिया है और अधिकारियों ने कहा है कि अब इनकी जगह पर नए और पात्र लोगों के राशन कार्ड जारी किए जाएंगे.
तेरह सालों का सूखा होगा खत्म
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में पिछले 13 सालों से कोई भी नया राशन कार्ड जारी नहीं किया गया था. इस वजह से बहुत से गरीब परिवार इस जरूरी सरकारी सुविधा से वंचित रह गए थे. सरकार ने अब 7.72 लाख अमान्य कार्डों को पूरी तरह साफ करने के बाद नए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं. इस प्रक्रिया से अब उन परिवारों को मौका मिलेगा जो लंबे समय से राशन कार्ड बनवाने के लिए इंतजार कर रहे थे. नए आवेदकों की जांच भी पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी ताकि केवल असली जरूरतमंदों को ही इसका लाभ मिल सके.
पूरी तरह पारदर्शी होगी राशन प्रणाली
सालाना आय की सीमा को बढ़ाकर ढाई लाख रुपए करने से समाज के एक बहुत बड़े कामकाजी वर्ग को सीधा संबल मिलेगा. इसमें दिल्ली के सुरक्षाकर्मी, ऑटो चालक, छोटे दुकानदार और दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं, जिन्हें अब मुफ्त या बेहद किफायती राशन की सुरक्षा मिल सकेगी. इसके साथ ही ई-रुपी या डिजिटल करेंसी का अनिवार्य इस्तेमाल राशन माफियाओं पर आखिरी चोट साबित होगा. अभी तक अक्सर यह शिकायतें मिलती थीं कि कोटेदार राशन की कालाबाजारी करते हैं या गरीबों को बाजार में अनाज बेचने पर मजबूर करते हैं. अब जब सरकार सीधे खाते में डिजिटल करेंसी भेजेगी, तो उसका उपयोग केवल राशन की दुकान पर ही हो सकेगा. इससे नकद की हेराफेरी खत्म होगी और दिल्ली की राशन वितरण प्रणाली सौ फीसदी साफ और पारदर्शी बन जाएगी.
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