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DK Shivakumar ने Karnataka Cabinet में बांटे विभाग, कई मंत्रियों के बदले प्रभार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार के 10 दिन बाद नवनियुक्त मंत्रियों को बुधवार को उनके विभागों का आवंटन किया। इसके साथ ही उन्होंने पहले से पद संभाल रहे कुछ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल किया है। दिलचस्प बात यह है कि राज्य विधानसभा के मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले विभागों का बंटवारा किया गया।

शिवकुमार ने वित्त, मंत्रिमंडलीय कार्य, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, खुफिया विभाग और अन्य ऐसे विभाग अपने पास रखे हैं जिनका अभी किसी मंत्री को आवंटन नहीं किया गया है। पहले चरण में मंत्री बनाए गए कई प्रमुख मंत्रियों के विभागों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इनमें उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर (राजस्व एवं खेल) और प्रियंक खरगे (गृह, आईटी एवं बीटी, ई-गवर्नेंस आदि) शामिल हैं।

नए मंत्रियों को विभाग देने का फैसला शिवकुमार और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई दौर की चर्चा के बाद हुआ। मुख्यमंत्री रविवार शाम इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नयी दिल्ली गए थे, जहां उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की। सिद्धरमैया मंत्रिमंडल में पहले मंत्री रहे पांच नेता अपने पुराने विभाग बरकरार रखने में सफल रहे जिनमें बी. जेड. जमीर अहमद खान (आवास), शिवराज तंगडगी (पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं कन्नड़ और संस्कृति), मधु बंगारप्पा (प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा), संतोष लाड (श्रम एवं रोजगार) और एस. एस. मल्लिकार्जुन (खान एवं भूविज्ञान) शामिल हैं।

सिद्धरमैया मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री रहे चेलुवरयास्वामी अब प्रमुख और मध्यम सिंचाई मंत्री हैं। लक्ष्मण सावदी को सहकारिता मंत्री बनाया गया है। हाल तक विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे रुद्रप्पा मनप्पा लमाणी अब चीनी एवं वस्त्र मंत्री होंगे।

मंत्रिमंडल में दो ऐसे मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया गया है, जो पहले आवंटित विभागों से असंतुष्ट थे। रामलिंगा रेड्डी को वृहद सिंचाई विभाग से हटाकर वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, के एच मुनियप्पा को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से स्थानांतरित कर समाज कल्याण विभाग सौंपा गया है।

स्वास्थ्य मंत्री यू टी खादर को अल्पसंख्यक कल्याण, हज और वक्फ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। शिवराज तंगदागी को पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग, टी रघुमूर्ति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) कल्याण, अजय सिंह को लघु सिंचाई तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, और चेलुवरायस्वामी को वृहद एवं मध्यम सिंचाई विभाग का प्रभार मिला है। इसके अलावा, मधु बंगारप्पा को प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, बसवराज राय रेड्डी को उच्च शिक्षा और शिवलिंगे गौड़ा को आबकारी मंत्री बनाया गया है।

पुट्टरंगा शेट्टी पशुपालन और रेशम उत्पादन मंत्री बने हैं, जबकि विजयानंद काशप्पनवर को लघु उद्योग और सार्वजनिक उद्यम विभाग सौंपा गया है। संतोष लाड को श्रम एवं रोजगार, के एस बसवंतप्पा को धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग, मत्स्य पालन, पोत परिवहन और अंतर्देशीय जल परिवहन विभाग मिला है। एस एस मल्लिकार्जुन को खान एवं भूविज्ञान तथा बागवानी, रिजवान अरशद को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामले, नरेंद्र स्वामी को कृषि, एच सी बालकृष्ण को नगर प्रशासन और बी नागेंद्र को योजना एवं सांख्यिकी विभाग आवंटित किया गया है।

शिवकुमार के नेतृत्व वाले इस मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री शामिल नहीं है। मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के दो महीने बाद शिवकुमार ने तीन अगस्त को 19 नए मंत्रियों को शामिल करके अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था जिससे मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई है, जबकि एक पद अब भी खाली है। विभागों का यह आवंटन राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले हुआ है।

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Himachal Pradesh में भारी बारिश से मकान ढहा, गर्भवती महिला समेत 2 की मौत, दो बच्चे घायल

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बुधवार को भारी बारिश के बीच तीन-मंजिला मकान ढह जाने से आठ महीने की एक गर्भवती समेत दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि दो बच्चे घायल हो गए। राज्य भर में हो रही व्यापक बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। यह हादसा राजगढ़ उपमंडल के छिछड़िया धार गांव में हुआ।

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों ने बचाव अभियान शुरू किया और मलबे में फंसे चारों लोगों को बाहर निकाला। दोनों महिलाओं को तुरंत राजगढ़ के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्थानीय पंचायत प्रधान वेद प्रकाश ठाकुर ने मृतकों की पहचान निर्मला (60) और उनकी बेटी पूजा (32) के रूप में की है।

यह मकान निर्मला के पति भीम सिंह का था। आठ महीने की गर्भवती पूजा अपनी डेढ़ साल की बेटी ईरा के साथ मायके आई हुई थी। हादसे के दिन (बुधवार को) ही उसे अपने ससुराल वापस लौटना था।

घटना के समय भीम सिंह की बहू भी घर के अंदर मौजूद थी, लेकिन इमारत ढहने से कुछ ही पल पहले वह बाहर निकल आई थी। हालांकि, उनका डेढ़ साल का बेटा अरुण मलबे के नीचे दब गया। महिला ने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों से मदद की गुहार लगाई और बच्चों को बचाने का प्रयास किया।

मलबे में दबकर घायल हुए दोनों बच्चों -ईरा और अरुण- राजगढ़ के सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं। राजगढ़ के उपविभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) राजकुमार ठाकुर ने हादसे में दो महिलाओं की मौत और दो बच्चों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रभावित परिवार को फौरी तौर पर राहत राशि मुहैया करा दी गई है। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण बुधवार को 209 सड़कें बंद हो गईं और बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ।

मौसम विभाग ने 18 अगस्त तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है और कुछ इलाकों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। मंगलवार शाम से राज्य में सबसे अधिक 80.5 मिमी बारिश धौलाकुआं में दर्ज की गई। इसके अलावा जट्टन बैराज में 67 मिमी, धर्मशाला में 57.2 मिमी, पालमपुर में 54.6 मिमी, पांवटा साहिब में 50.8 मिमी, बजौरा में 37 मिमी और नाहन में 26.5 मिमी बारिश हुई।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, बुधवार शाम तक पूरे प्रदेश में 209 सड़कें, 70 जल आपूर्ति योजनाएं और 19 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित रहे। सड़कों के बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभावित मंडी जिला रहा, जहां 94 सड़कें बाधित हुईं। इसके बाद कुल्लू में 60, शिमला में 21, सिरमौर में 11, चंबा में 10, कांगड़ा में पांच और ऊना में चार सड़कें बंद रहीं।

किन्नौर और लाहौल-स्पीति में भी दो-दो सड़कें बंद होने की खबर है। एक से 12 अगस्त के बीच राज्य में सामान्य 116 मिमी की तुलना में 103.5 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 11 प्रतिशत कम है। अधिकारियों ने बताया कि 30 जून को मानसून के आगमन के बाद से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 75 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 14 लोग भूस्खलन और एक व्यक्ति अचानक आई बाढ़ की चपेट में आया।

मानसून के कारण राज्य को अब तक अनुमानित 911 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। मौसम विभाग ने 18 अगस्त तक राज्य के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी देते हुए येलो अलर्ट जारी किया है।

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  Sports

WTC Final की रेस में पिछड़ा India तो Gautam Gambhir पर उठे सवाल, बचाव में उतरे Amit Mishra ने मांगा थोड़ा और समय

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए सीमित ओवरों में तस्वीर भले ही मजबूत नजर आती हो, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में गौतम गंभीर के कार्यकाल का रिकॉर्ड चिंता बढ़ाने वाला है। गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारत ने 19 टेस्ट खेले हैं, जिनमें सात में जीत मिली, दस में हार हुई और दो मुकाबले बराबरी पर खत्म हुए हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि गंभीर के कार्यकाल में भारत को दो बड़ी घरेलू श्रृंखलाओं में करारी हार झेलनी पड़ी है। 2024 में न्यूजीलैंड ने भारत को तीन-शून्य से हराया था, जबकि 2025 में दक्षिण अफ्रीका ने दो-शून्य से घरेलू श्रृंखला अपने नाम की। इसके अलावा भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर श्रृंखला 1-3 से हार गया था और इंग्लैंड में 2025 की श्रृंखला 2-2 से बराबर रही थी।

हालांकि सीमित ओवरों में भारत का प्रदर्शन इसके मुकाबले काफी बेहतर रहा है। भारत ने 2024 से 2026 के टी-20 विश्व कप तक कोई टी-20 श्रृंखला नहीं गंवाई थी। इसके बाद सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर के कप्तान बनने के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 श्रृंखलाओं में भारत को हार मिली। एकदिवसीय क्रिकेट में भी भारत ने 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी।

टेस्ट में कमजोर प्रदर्शन के बीच अलग-अलग प्रारूपों के लिए अलग कोच रखने की चर्चा भी उठती रही है। हालांकि पूर्व भारतीय लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने गौतम गंभीर का समर्थन किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में मिश्रा ने कहा कि खिलाड़ियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और किसी कोच को काम करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

मिश्रा के मुताबिक गंभीर को लाल गेंद वाले क्रिकेट में कुछ और समय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम में कई नए खिलाड़ी हैं और उन्हें परिस्थितियों को समझने तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के हिसाब से ढलने में समय लगता है। उनके अनुसार कोच योजना बना सकता है और खिलाड़ियों को मार्गदर्शन दे सकता है, लेकिन मैदान पर योजना को लागू करने की जिम्मेदारी खिलाड़ियों की होती है।

बता दें कि गंभीर के कार्यकाल में बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव भी चर्चा का विषय रहा है। खासकर तीसरे नंबर पर करुण नायर, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों को आजमाया गया है। मिश्रा का मानना है कि टीम प्रबंधन खिलाड़ियों को नेट अभ्यास में देखकर परिस्थितियों के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ संयोजन तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारत अब 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट की श्रृंखला खेलेगा। इसके बाद न्यूजीलैंड में दो टेस्ट और 2027 की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट की महत्वपूर्ण बॉर्डर-गावस्कर श्रृंखला होनी है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में 48.15 प्रतिशत अंकों के साथ भारत पांचवें स्थान पर है और लगातार दूसरी बार फाइनल की दौड़ से बाहर होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में आने वाली टेस्ट श्रृंखलाएं गौतम गंभीर और भारतीय टीम के लिए बेहद अहम रहने वाली हैं।
Thu, 13 Aug 2026 20:58:19 +0530

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