Horoscope 13 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल
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होर्मुज स्ट्रेट कब तक बंद रहेगा? ईरान ने कर दिया साफ, भारत पर पड़ेगा ये असर
Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से चल रहा शांति समझौता अपने मुकाम पर नहीं पहुंच पा रहा है. आए दिन दोनों के बीच होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम, नाकाबंदी पर बात अटक जाती है. अमेरिका का दावा है कि होर्मुज पर उसका कंट्रोल है, वहीं ईरान होर्मुज को खोलने के लिए अपनी शर्तें मनवाने पर अड़ा हुआ है.
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के नव नियुक्त प्रमुख मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी है कि तेहरान रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को तब तक पूरी तरह से नहीं खोलेगा जब तक कि संयुक्त राज्य अमेरिका सभी शर्तों को पूरा नहीं कर लेता. एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में रेजाई ने फारस की खाड़ी के शिपिंग मार्ग पर ईरान की स्थिति को रेखांकित किया और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए आवश्यक शर्तों को स्पष्ट किया.
क्या हैं ईरान की सभी शर्ते?
रेजाई ने पोस्ट में लिखा कि ईरान का संदेश स्पष्ट है. होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक दोबारा नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका युद्ध और नाकाबंदी समाप्त नहीं कर देता, ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को जारी नहीं कर देता और लेबनान और गाजा सहित पूरे क्षेत्र में युद्धविराम के लिए सहमत नहीं हो जाता.
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रेजाई ने आगे कहा कि जब तक सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक जलडमरूमध्य बंद रहेगा. इससे पहले, प्रेस टीवी के अनुसार, रेजाई ने पुष्टि की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलना, जहां ईरान ने अमेरिका-इजरायल आक्रामकता के कारण मार्च की शुरुआत से पारगमन प्रतिबंध लगा रखे हैं, तभी होगा जब वाशिंगटन तेहरान की शर्तों को स्वीकार करेगा.
होर्मुज बंद होने से भारत पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक आवाजाही रुकने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति से लेकर महंगाई और उद्योग तक पर व्यापक असर पड़ सकता है. भारत अपने कच्चे तेल के आयात का 40% से 50% हिस्सा इसी रास्ते से मंगाता है. इसके अलावा भारत की कुल एलपीजी (LPG) आयात का लगभग 90% हिस्सा इसी मार्ग से आती है.इसलिए इसके बंद होने पर तेल और गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और आपूर्ति संकट की आशंका बढ़ जाती है. इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र से आने वाले उर्वरक, अमोनिया, सल्फर और मेथनॉल जैसे औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से कई उद्योग प्रभावित हो सकते हैं. लंबे समय तक संकट जारी रहने पर भारत का आयात बिल बढ़ेगा, व्यापार घाटा बढ़ सकता है और अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा.
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