UCC की राह पर जाने वाला तीसरा राज्य बना असम, उत्तराखंड और गुजरात के बिल से इसमें क्या है अलग?
उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम ऐसा तीसरा राज्य बन गया है, जहां समान नागरिक संहिता लागू होने जा रहा है। हालांकि, तीनों ही राज्यों का मूल ढांचा एक समान है लेकिन उन्हें लागू करने के तौर-तरीकों में थोड़ी भिन्नता है।
CBSE Syllabus: सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली, कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मातृभाषा के रूप में पढ़ेंगे छात्र
Maithili Language: बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र के लोगों और मैथिली भाषा प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को भी आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है। इस बड़े फैसले के बाद अब देशभर के सीबीएसई स्कूलों में मैथिली भाषा की पढ़ाई हो सकेगी।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर यह अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने इस फैसले को मिथिलांचल के इतिहास में एक मील का पत्थर और बेहद गर्व की बात बताया है।
कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मिलेगी जगह
सम्राट चौधरी ने बताया कि सीबीएसई के नए सिलेबस के तहत कक्षा 1 से लेकर माध्यमिक स्तर (Secondary Level) तक मैथिली को एक मातृभाषा विषय के रूप में शामिल किया गया है। सरकार के इस कदम से नई पीढ़ी न केवल अपनी समृद्ध भाषा से रूबरू होगी, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और परंपरा से और अधिक मजबूती से जुड़ने का मौका मिलेगा।
मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में लिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक एवं अत्यंत स्वागतयोग्य है।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) May 25, 2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के… pic.twitter.com/PCcTnMEXDv
सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार
इस बड़े फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में देश की सभी क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं को एक नई ताकत मिल रही है। मैथिली को सीबीएसई के नेशनल करिकुलम में शामिल करना हमारी सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
मिथिला की समृद्ध संस्कृति को मिलेगा वैश्विक सम्मान
हम सब जानते हैं कि मैथिली भाषा का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। मिथिला की लोक संस्कृति, अद्भुत साहित्य, मधुर गीत-संगीत और विश्व प्रसिद्ध कला (मधुबनी पेंटिंग) में मैथिली भाषा का एक विशेष और अटूट स्थान है। अब एक राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड में जगह मिलने के बाद मैथिली भाषा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और नया सम्मान हासिल होगा।
मातृभाषा में शिक्षा से छात्रों को होगा बड़ा फायदा
शिक्षाविदों और मिथिला के बुद्धिजीवियों का मानना है कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा अगर उनकी मातृभाषा में हो, तो उनके सीखने और समझने की क्षमता कई गुना बेहतर हो जाती है। सीबीएसई के इस फैसले से मिथिलांचल के लाखों छात्र-छात्राओं को सीधा फायदा पहुंचने वाला है। अपनी भाषा में पढ़ाई करने से बच्चों के लिए विषय को समझना काफी आसान हो जाएगा और वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे।




Hindustan
Haribhoomi

















