नवीन पटनायक को लगा तगड़ा झटका: राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने BJD से दिया इस्तीफा; BJP में जाने की अटकलें
BJD MP Debashish Samantaray Resigns: ओडिशा की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (BJD) को सोमवार को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने बीजेडी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
देबाशीष सामंतराय को नवीन पटनायक का बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था। ऐसे में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद उनका यह फैसला पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
इस्तीफे की चिट्ठी में छलका दर्द, लगाया ये बड़ा आरोप
सांसद देबाशीष सामंतराय ने 25 मई 2026 को बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक को अपना इस्तीफा पत्र भेजा। इस चिट्ठी में उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि वह पार्टी के भीतर व्यवस्थित रूप से (Systematically) खुद को छोटा और उपेक्षित महसूस कर रहे थे।
उन्होंने आगे लिखा कि अब ऐसा लगता है जैसे पार्टी को उनकी सेवाओं और काम की कोई जरूरत नहीं रह गई है। सामंतराय के मुताबिक, यह फैसला लेना उनके लिए काफी कठिन था, लेकिन सार्वजनिक हित को देखते हुए यह बेहद जरूरी हो गया था।
नवीन पटनायक का जताया आभार
पार्टी छोड़ने और उपेक्षा के आरोपों के बावजूद देबाशीष ने नवीन पटनायक के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह पटनायक के आभारी हैं जिन्होंने उन्हें राज्यसभा भेजा और कटक समेत पूरे ओडिशा की जनता की राष्ट्रीय स्तर पर सेवा करने का मौका दिया। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने हमेशा पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ पार्टी के लिए काम किया है।
राज्यसभा में कमजोर हुई बीजू जनता दल (BJD)
देबाशीष सामंतराय के इस इस्तीफे के बाद देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बीजू जनता दल की ताकत और कम हो गई है। संसद के इस सदन में अब बीजेडी के कुल सांसदों की संख्या घटकर केवल 5 रह गई है, जो पहले 6 थी। चुनावों में करारी शिकस्त के बाद दिल्ली की राजनीति में भी बीजेडी का कद अब लगातार घटता जा रहा है।
क्या बीजेपी में शामिल होंगे देबाशीष?
ओडिशा के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं अब बेहद तेज हो गई हैं कि देबाशीष सामंतराय जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी में शामिल होने के बाद, वे पार्टी के समर्थन से दोबारा संसद (राज्यसभा) पहुंच सकते हैं। ओडिशा में सरकार बनाने के बाद अब बीजेपी विपक्षी खेमे के बड़े चेहरों को अपने पाले में लाने की तैयारी में जुटी है।
संत प्रेमानंद महाराज की भक्तों से भावुक अपील: 'मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा, मेरी चिंता छोड़कर श्रीजी का ध्यान लगाइए'
वृंदावन के प्रख्यात और देश-दुनिया में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद बड़ी और भावुक खबर है। पिछले 9 दिनों से लगातार अस्वस्थ चल रहे महाराज जी ने केलि कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर 1 मिनट 19 सेकंड का एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया है।
इस वीडियो में उन्होंने अपने करोड़ों भक्तों और शिष्यों से किसी भी प्रकार की चिंता न करने की अपील की है। महाराज जी ने बेहद कड़े और आध्यात्मिक लहजे में कहा कि—"मैं इस नश्वर शरीर में रहूं या न रहूं, मैं हमेशा आंतरिक रूप से आपके साथ रहूंगा। आप लोग मेरी चिंता पूरी तरह छोड़ दें और केवल श्रीजी के नाम का जाप व ध्यान करें।"
दोनों किडनियां खराब होने के बावजूद रोजाना लाखों भक्तों को देते थे दर्शन
प्रेमानंद महाराज जी के स्वास्थ्य की स्थिति काफी समय से कड़े चिकित्सकीय दौर से गुजर रही है। महाराज जी की दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हैं, जिसके कारण उन्हें जीवित रखने के लिए हफ्ते में कम से कम 2 से 3 बार डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस गंभीर शारीरिक कष्ट के बावजूद, महाराज जी अपनी दैनिक दिनचर्या में कोई ढिलाई नहीं बरतते थे।
वे हर दिन तड़के 3:00 बजे अपने केलि कुंज आश्रम से निकलकर सौभरी वन और वराह घाट के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर की पैदल पदयात्रा पर निकलते थे, जहां आम दिनों में 20 हजार और वीकेंड पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए सड़कों के किनारे कड़े धीरज के साथ खड़े रहते थे।
17 मई से एकांतवास में हैं महाराज, शिष्यों ने लाउडस्पीकर से की थी घोषणा
बीती 17 मई से महाराज जी की शारीरिक स्थिति अचानक ज्यादा बिगड़ने के कारण उनकी यह प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा और एकांत वार्तालाप को पूरी तरह स्थगित कर दिया गया था। जब हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे, तो आश्रम के शिष्यों ने लाउडस्पीकर से आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया था कि महाराज जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए कृपया करके रोड के किनारे भीड़ न लगाएं। इसके बाद से ही महाराज जी पूरी तरह एकांतवास में चले गए थे। हालांकि, तीन दिन पहले वे अपने आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित अपने गुरु संत गोविंद शरण महाराज के आश्रम दर्शन करने जरूर गए थे।
'हमारा एकांतवास आपके लिए है, हमारे लिए नहीं'
लगातार फैल रही चिंताओं के बीच जारी किए गए इस नए वीडियो में प्रेमानंद जी महाराज ने अपनी आध्यात्मिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा, "हम वर्तमान में एकांतवास कर रहे हैं। यह एकांतवास आपके कल्याण के लिए है, हमारे लिए नहीं। हमारे लिए हम कोई अलग से भजन नहीं कर रहे और न ही हमारा मौन हमारे व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए है। हमारा जो कुछ होना था, वो हो गया।
अब जो कुछ भी हो रहा है, वह सब आप जैसे आश्रितों के लिए हो रहा है।" उन्होंने भक्तों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि गुरुदेव हमेशा आपके दिमाग में बैठे रहेंगे, इसलिए आप पूरी तरह निर्भय, निश्चिंत और निशोक होकर केवल राधा नाम का मंगल जप करते रहें।
कानपुर के नरवल से वृंदावन के राधावल्लभी संत बनने की पूरी कहानी
प्रेमानंद महाराज जी का प्रारंभिक जीवन और सन्यास यात्रा बेहद कड़े संघर्षों और वैराग्य की मिसाल रही है:
बचपन और नाम: उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम शंभू नारायण पांडे और माता का नाम रामा देवी है। बचपन में उनका नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था और वे तीन भाइयों में मंझले हैं।
13 साल की उम्र में त्याग: बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के अनिरुद्ध ने कक्षा 8 तक पढ़ाई करने के बाद महज 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था। वे कानपुर होते हुए सीधे मोक्ष नगरी काशी पहुंचे।
ब्रह्मचारी से सन्यासी तक: काशी में उन्होंने करीब 15 महीने बिना कुछ खाए-पिए कड़े सन्यास जीवन में बिताए, जहां उन्हें 'आरयन ब्रह्मचारी' नाम मिला। इसके बाद उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से दीक्षा ली और फिर वहां से हमेशा के लिए मथुरा-वृंदावन आ गए, जहां वे बांके बिहारी जी के दर्शन और राधा रससुधानिधि के श्लोकों से प्रभावित होकर पूरी तरह राधावल्लभी संत बन गए।
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