24 मई को जब भारत में अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा था। प्रेसिडेंट ट्रंप भी इस इवेंट से फोन कॉल पर जुड़े। इस इवेंट का एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर माइक पर फोन लगाकर कहते हैं एक स्पेशल गेस्ट का कॉल आया है। ट्रंप ने कहा कि मैं बस यह कहना चाहता हूं कि आप लोग ग्रेट हैं। हम भारत के जितने करीब आज हैं, उतने पहले कभी नहीं थे और भारत मुझ पर हमारे देश पर 100% भरोसा कर सकता है। इस साल 4 जुलाई को अमेरिका अपनी आजादी के 250 साल पूरे कर लेगा। इस खास मौके पर दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में एक इवेंट ऑर्गेनाइज किया गया था। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी मौजूद थे जो अभी भारत दौरे पर आए हुए हैं। इस वक्त चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं वो। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की स्पीच से पहले प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप का कॉल आया।
उन्होंने कहा सर्जियो गोर मैं चाहता हूं कि आप अमेरिका की तरफ से अच्छी स्पीच दें क्योंकि आप भारत में हमारे देश के रिप्रेजेंटेटिव हैं। भारत को कभी भी जरूरत पड़े तो अमेरिका उसके साथ खड़ा रहेगा। मैं पीएम मोदी का बहुत बड़ा फैन हूं। यह वीडियो अमेरिकी दूतावास ने एक्स हैंडल से शेयर किया। फोन कॉल पर डोन्ड ट्रंप ने मार्को रूबियो की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री की भूमिका में रूबियो अच्छा काम कर रहे हैं। ट्रंप की कॉल के बाद सर्जियो ने अपनी स्पीच में राष्ट्रपति की बात को सपोर्ट किया। बोले यह भारत अमेरिका के रिश्ते का नया दौर है। सर्जियो गर ने 5 महीने पहले ही भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था। वे राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने अपनी स्पीच में बताया कि भारत अमेरिका के बीच एक अंतरिम ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। जल्द ही इस डील के लॉक होने की पूरी-पूरी संभावना है। इस पर मार्को रूबियो ने भी एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि डील आखिरी स्टेज पर पहुंच चुकी है और कुछ ही हफ्तों के अंदर साइन भी हो जाएगी। लेकिन डील साइन होने के बारे में अभी कोई ताजा आधिकारिक जानकारी नहीं सामने आई है।
जाहिर है इस इवेंट में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए। उन्होंने कहा, आज भारत और अमेरिका दोनों एक जैसे मजबूत इरादे के साथ दुनिया के सामने खड़े हैं। दोनों देशों में लोकतंत्र है। दोनों ओपन मार्केट रखते हैं। दोनों ही आजाद हैं। हमारी एक जैसी खूबियां अब हमारे फायदों और जरूरतों से जुड़कर और मजबूत हो गई है। जिससे हमारे पुराने मतभेद खत्म हो गए हैं। हमारी ये गहरी दोस्ती अब कई चीजों में साफ दिखती है। जैसे व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, नई तकनीकें। नई तकनीकें जैसे कि एआई और माइक्रो चिप्स। इवेंट में म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने भी परफॉर्मेंस दी। आगे एक और इवेंट भी है जब अमेरिका और भारत साथ आएंगे। 26 मई को कॉड विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच इंडोपेसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी।
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होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि इस मामले में अच्छी खबर है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। दिल्ली में रुबियो ने कहा कि ऐसी योजना पर प्रगति हुई है, जिससे होर्मुज को फिर से खोला जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इसकी घोषणा कर सकते हैं। इससे पहले, ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खेलने और युद्ध समझौते पर काफी हद तक बातचीत हो चुकी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर वार्ताकारों से कहा, 'ईरान के साथ समझौते में जल्दबाजी न करें। समाप्त करने को लेकर ईरान के साथ साथ समय हमारे साथ है।' साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, UAE, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, इजिप्ट, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं और अलग से इस्राइल से बात की। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने उम्मीद जताई कि वह ईरान-अमेरिका शांति वार्ता की जल्द मेजबानी करेंगे।
ईरान बोला, एटमी हथियार पर बात नहीं
एक्सियोस के अनुसार, समझौते में 60 दिनों के लिए युद्धविराम को बढ़ाना शामिल है। होर्मुज फिर से खोल दिया जाएगा। ईरान को तेल बेचने की अनुमति दी जाएगी। परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करेंगे। US ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटाएगा। उधर, ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि संभावित समझौते में परमाणु हथियार पर कोई बातचीत नहीं हुई है।
भारत को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका पर कोई आपत्ति नहीं
रुबियो ने कहा कि भारत पाकिस्तान को लेकर चिंतित है, लेकिन अमेरिका-ईरान संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभाने पर उसने कोई आपत्ति नहीं जताई है। उन्होंने कहा, वे हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं, ज़ाहिर है। भारत हमेशा इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि पाकिस्तानी क्षेत्र से सशस्त्र आतंकवादी समूह सक्रिय हैं जो भारत को निशाना बनाते हैं। वे हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं। उन्होंने आगे कहा, लेकिन ईरान संकट में मध्यस्थ और सहायक के रूप में उनकी भूमिका का ज़िक्र कभी नहीं हुआ। मुझे नहीं लगता कि वे इस बारे में कोई शिकायत करेंगे। मेरा मतलब है, पाकिस्तान के साथ उनका मुद्दा अलग है।
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