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करण जौहर@54; लड़कियों जैसा कहकर उड़ा मजाक:अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट करने के डर से बेहोश हुए, 'मेट गाला' में शामिल एकमात्र भारतीय डायरेक्टर

बचपन से ही करण जौहर की चाल, बोलने का तरीका और बॉडी लैंग्वेज मजाक का कारण बनी। जिसके चलते करण धीरे-धीरे इतने डर गए कि लोगों के बीच जाने से कतराने लगे। घरवालों से झूठ बोला कि वो कंप्यूटर क्लास जा रहे हैं, जबकि असल में वो आवाज बदलने की ट्रेनिंग ले रहे थे। माता-पिता नहीं चाहते थे कि वो फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनें। फिर एक दिन उसी अंडरकॉन्फिडेंट लड़के से शाहरुख खान ने कहा कि तुम्हें फिल्म डायरेक्ट करना चाहिए। मैं तुम्हारी फिल्म में एक्टिंग करूंगा और उनकी पहली ही फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ आई, जो ब्लॉकबस्टर रही। बाद में करण ने ‘कभी खुशी कभी गम’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ जैसी कई हिट फिल्में डायरेक्ट की। करण नेपोटिज्म को लेकर ट्रोल भी हुए, लेकिन संघर्ष, ताने और आलोचनाओं के बीच उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और उनकी गिनती बॉलीवुड के टॉप फिल्ममेकर्स में होती है। आज करण जौहर 54 साल के हो चुके हैं। उनके जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े किस्से- बचपन में करण जौहर का मजाक उड़ता था आज करण जौहर भले ही बॉलीवुड के सबसे कॉन्फिडेंट और स्टाइलिश फिल्ममेकर माने जाते हों, लेकिन बचपन में वो बेहद डरे हुए और अंडरकॉन्फिडेंट बच्चे थे। करण ने निखिल तनेजा को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'मेरे माता-पिता भी परेशान रहते थे क्योंकि मैं बहुत शर्मीला और इंट्रोवर्ट था। आज शायद लोग इस बात पर भरोसा नहीं करेंगे, लेकिन मैं लोगों के बीच जाने से डरता था। मैं बचपन में बहुत एफेमिनेट (लड़कियों जैसा) था और ओवरवेट भी था। जब भी मैं कोई खेल खेलने जाता था तो लोग मेरा मजाक उड़ाते थे। लोग कहते थे कि मैं अजीब तरीके से दौड़ता हूं या मेरे हाथों के हाव-भाव अलग हैं।' उन्होंने कहा था, ‘80 के दशक में लोग ‘पैंसी’ शब्द इस्तेमाल करते थे। आज जिस तरह ‘गे’ या ‘होमो’ शब्दों को गलत तरीके से कहा जाता है, उस वक्त 'पैंसी' कहा जाता था। इस शब्द ने मुझे पूरी तरह एक खोल में धकेल दिया। जब भी मैं फुटबॉल, बास्केटबॉल या क्रिकेट खेलने की कोशिश करता था, लोग मेरी बॉडी लैंग्वेज का मजाक उड़ाते थे। इसी वजह से मैं बहुत ज्यादा इंट्रोवर्ट हो गया था।’ पैरेंट्स से झूठ बोलकर वॉइस ट्रेनिंग ली करण ने जय शेट्टी के पॉडकास्ट में बताया था कि कॉलेज में उन्हें महसूस हुआ कि वह पब्लिक स्पीकिंग में अच्छे हैं, इसलिए वह इसे और बेहतर बनाना चाहते थे। इसी दौरान उन्होंने एक पब्लिक स्पीकिंग अकादमी जॉइन की। वहां के हेड ने उनसे कहा कि उनकी आवाज काफी गर्लिश (लड़कियों जैसी) लगती है और दुनिया उनके साथ सख्त हो सकती है। उन्होंने करण को आवाज में बैरीटोन लाने की सलाह दी ताकि उनकी आवाज ज्यादा मर्दाना लगे। करण ने बताया था कि उन्होंने उनसे 3 साल तक ट्रेनिंग ली थी। हालांकि, करण ने अपने माता-पिता को बताया था कि वह कंप्यूटर क्लास जा रहे हैं, क्योंकि वह असल वजह बताने में झिझकते थे। तीन साल बाद जब करण के पिता के ऑफिस में कंप्यूटर आया तो उन्होंने करण से कहा कि अब वह इसे इस्तेमाल करके दिखाएं, क्योंकि उन्होंने इतने साल कंप्यूटर सीखा है। फिल्ममेकर ने बताया था कि उन्होंने जिंदगी में एक दिन भी कंप्यूटर क्लास नहीं की थी, इसलिए उन्हें कंप्यूटर देखकर ऐसा लगा जैसे कोई एलियन सामने खड़ा हो। उस वक्त वह कोई जवाब नहीं दे पाए। पिता फिल्मों में आने के खिलाफ थे, मां ने एक महीने तक बात नहीं की आज करण जौहर फिल्म इंडस्ट्री के टॉप फिल्ममेकर हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब उनके अपने माता-पिता नहीं चाहते थे कि वो इंडस्ट्री में आएं। करण के फिल्मी करियर की शुरुआत फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' (DDLJ - 1995) से ही हुई थी। फिल्म में वो असिस्टेंट डायरेक्टर (AD) थे। करण ने जय शेट्टी के साथ बातचीत में बताया था कि उनके पिता यश जौहर और मां हीरू जौहर नहीं चाहते थे कि वह फिल्म इंडस्ट्री में आएं। जब आदित्य चोपड़ा ने करण से अपनी पहली फिल्म DDLJ में असिस्ट करने के लिए कहा, तब करण उस वक्त पेरिस जाकर फ्रेंच भाषा की पढ़ाई आगे बढ़ाना चाहते थे। करण ने बताया था कि उनके पिता का छोटा एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बिजनेस भी था और फ्रांस उनके बड़े क्लाइंट्स में शामिल था। इसलिए परिवार चाहता था कि वह फ्रेंच सीखकर बिजनेस संभालें। उनके पिता फिल्में बनाते जरूर थे, लेकिन उन्हें फिल्मों में लगातार नुकसान हुआ था। इसी वजह से वह नहीं चाहते थे कि उनका बेटा भी उसी इंडस्ट्री में जाए। करण ने यह भी बताया था कि जब उन्होंने फिल्मों में जाने का फैसला लिया तो उनकी मां ने उनसे करीब एक महीने तक बात नहीं की थी। करण के मुताबिक, आदित्य ने उनसे कहा था, ‘तुम फिल्मों के लिए बने हो। तुम ओवरड्रामैटिक हो, मेलोड्रामैटिक हो, तुम्हें गाने और डांस पसंद हैं। तुम फिल्मों से दूर क्यों भाग रहे हो?’ इसके बाद करण ने अपने परिवार से सिर्फ एक साल मांगा। उन्होंने कहा कि अगर वह फिल्म इंडस्ट्री में कोई पहचान नहीं बना पाए तो दूसरा रास्ता चुन लेंगे। इसी दौरान उन्होंने DDLJ के सेट पर काम किया, जहां उनकी मुलाकात शाहरुख खान और काजोल से और करीब से हुई। बाद में यही फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और करण जौहर का फिल्मी करियर भी शुरू हो गया। शाहरुख ने करण को डायरेक्शन की सलाह दी करण ने गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में बताया था कि DDLJ की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान ने उनसे कहा था कि उन्हें खुद की फिल्म डायरेक्ट करनी चाहिए और वो उसमें काम भी करेंगे। वहीं पास में मौजूद काजोल ने भी इस बात में दिलचस्पी दिखाई थी। लेकिन करण को लगा कि दोनों सिर्फ मजाक में या यूं ही ये बातें कर रहे हैं। जब उन्होंने ये बात अपने पिता को बताई, तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ। करण ने बताया था कि उनके पिता ने कहा, 'ये लोग पागल हो गए हैं।' वहीं उनकी मां को भी लगा कि दोनों मजाक कर रहे हैं। इसके बाद शाहरुख ने खुद यश जौहर को फोन किया और कहा कि वो फिल्म ‘डुप्लीकेट’ के बाद करण की डायरेक्ट की हुई फिल्म में काम करेंगे। इस पर यश जौहर ने करण से कहा था, ‘ये पागल हो गया है, कह रहा है कि तुम्हारी डायरेक्ट की हुई फिल्म करेगा। तुम्हें डायरेक्शन के बारे में क्या पता है?’ बाद में शाहरुख ने ‘कुछ कुछ होता है’ की स्क्रिप्ट सुनी और 1997 में फिल्म की शूटिंग के लिए अपनी डेट्स दे दीं। 1998 में रिलीज हुई ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई। ‘कुछ कुछ होता है’ की कहानी राहुल (शाहरुख खान), अंजलि (काजोल) और टीना (रानी मुखर्जी) के लव ट्रायंगल पर आधारित थी। अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट करने के डर से सेट पर बेहोश हुए करण जौहर अपनी दूसरी फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ में अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, शाहरुख खान, काजोल, ऋतिक रोशन और करीना कपूर जैसे बड़े स्टार्स को डायरेक्ट कर रहे थे। लेकिन फिल्म शुरू होते ही करण की हालत खराब हो गई थी। राजीव मसंद के शो ‘पिक्चर के पीछे’ में करण ने खुद बताया था कि फिल्म का पहला शूट ‘बोले चूडियां’ गाना था। इतने बड़े सितारों को एक साथ डायरेक्ट करने का दबाव उन पर इतना ज्यादा था कि वो लगातार घबराए हुए थे। करण ने कहा था, ‘मैं बार-बार यही सोच रहा था- हे भगवान, मैं अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट कर रहा हूं।’ उन्होंने बताया कि शूटिंग शुरू होते ही घबराहट इतनी बढ़ गई कि उनका पेट खराब हो गया। वो बार-बार बाथरूम भाग रहे थे। तीसरे दिन हालत इतनी बिगड़ गई कि वो पूरी तरह कमजोर होकर गिर पड़े। करण ने बताया कि वो बाथरूम से बाहर निकले, फराह खान को आवाज दी और वहीं बेहोश होकर गिर गए। जब उन्हें होश आया, तो सामने अमिताभ बच्चन बैठे थे। करण के हाथ में ड्रिप लगी हुई थी और डॉक्टर आसपास खड़े थे। करण के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने उनसे कहा, ‘करण, चिंता मत करो… हम अच्छा डांस करेंगे, मैं वादा करता हूं।’ फिल्ममेकर ने कहा था कि उस पल उन्हें एहसास हुआ कि इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद अमिताभ बच्चन कितने विनम्र इंसान हैं। ओजेम्पिक के आरोपों पर बोले- अगर लेता, तो छिपाता नहीं पिछले कुछ सालों से करण जौहर अपने अचानक वजन घटाने को लेकर भी खूब चर्चा में रहे। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि करण ने वजन घटाने वाली दवा ओजेम्पिक का इस्तेमाल किया है। राज शमानी को दिए इंटरव्यू में करण ने कहा था, ‘मैं सिंगल पेरेंट हूं, मेरे दो बच्चे हैं। ये बात मैंने कभी छुपाई नहीं। मैंने अपनी किताब में भी अपनी जिंदगी की कई बातें खुलकर लिखी हैं। मैं ना चीजें डिनाई करता हूं और ना ही झूठ बोलता हूं।’ करण ने आगे कहा था, ‘लोग कहते हैं कि मेरी जिंदगी खुली किताब है। कुछ बातें ऐसी भी हैं जो मैंने नहीं लिखीं, लेकिन जब मैं अपनी जिंदगी के इतने बड़े सच नहीं छुपाता तो फिर मैं ये क्यों छुपाऊंगा कि मैंने ओजेम्पिक या मुनजारो लिया है?’ उन्होंने मजाकिया अंदाज में आगे कहा था, ‘अगर मैंने ये दवाइयां ली होतीं तो मैं डंके की चोट पर कहता कि हां, मैंने लिया है और मेरे लिए ये अच्छा है। मैं लोगों से ये भी कहता कि आप भी ले लो। शायद बाद में वो लोग मुझे अपना ब्रांड एंबेसडर भी बना लें। मैं तो उस दौर से भी गुजर जाता कि शायद मैं इसे मोनेटाइज भी कर लूं।’ करण बोले थे- उन्होंने कभी किसी का करियर बर्बाद नहीं किया करण जौहर को पिछले कई सालों से बॉलीवुड में नेपोटिज्म यानी भाई-भतीजावाद का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता रहा है। सोशल मीडिया पर अक्सर उन्हें स्टार किड्स को बढ़ावा देने और बाहरी कलाकारों को नजरअंदाज करने के आरोपों का सामना करना पड़ा। इन आरोपों को लेकर करण ने राज शमानी को दिए पॉडकास्ट इंटरव्यू में कहा था कि वह फिल्म इंडस्ट्री के इंसाइडर रहे हैं, क्योंकि उनके पिता इंडस्ट्री का हिस्सा थे। उन्होंने कहा था, ‘लोग मुझे नेपोटिज्म का ब्रांड एंबेसडर कहते हैं, लेकिन मेरे पिता ने सिर्फ संघर्ष देखा था। हां, मुझे पहला मौका उनकी वजह से मिला, लेकिन ऐसा हर प्रोफेशन में होता है।’ करण ने बताया था कि उनके पिता ने उन पर भरोसा करके बड़ा जोखिम उठाया था। उन्होंने कहा था, ‘अगर मेरी पहली फिल्म फ्लॉप हो जाती तो शायद हमें अपना घर तक बेचना पड़ जाता।’ फिल्ममेकर ने यह भी कहा था कि वह किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट नहीं मांगते। उनके लिए कर्म सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा था, ‘मैं सिर्फ मेहनत, जुनून और ईमानदारी से अपना काम करना चाहता हूं। मैंने कभी किसी का करियर बर्बाद नहीं किया, मैंने सिर्फ अपना काम किया है।’ दो बार टूटा है करण जौहर का दिल करण जौहर ने फिल्म ऐ दिल है मुश्किल सिर्फ 9 दिनों में लिखी थी। जय शेट्टी के साथ बातचीत में करण ने बताया था कि उनका दिल दो बार टूटा था और दूसरी बार का दर्द इतना गहरा था कि उसी से फिल्म ऐ दिल है मुश्किल की कहानी पैदा हुई। जब करण से पूछा गया था, 'क्या आपका दिल कभी टूटा है?' इस पर करण ने जवाब दिया था, ‘हां, दो बार। दूसरी बार ज्यादा मुश्किल था।’ करण ने बताया था कि उनका दूसरा रिश्ता काफी लंबा था और उस एकतरफा प्यार के दर्द को उन्होंने ऐ दिल है मुश्किल में उतार दिया। उन्होंने कहा था, ‘एकतरफा प्यार की कहानी मेरी अपनी कहानी है। उस फिल्म में रणबीर कपूर वाला किरदार मैं खुद हूं, क्योंकि मैं किसी ऐसे इंसान के पीछे था जिसे मैं पा नहीं सका।’ 'मेट गाला' में शामिल एकमात्र भारतीय डायरेक्टर फिल्मों के अलावा करण जौहर के लुक्स और फैशन सेंस की भी काफी चर्चा होती है। बड़े-बड़े डिजाइनर आउटफिट्स, यूनिक जैकेट्स, स्टाइलिश चश्मे और लग्जरी लाइफस्टाइल की वजह से वो बॉलीवुड के सबसे फैशनेबल सेलिब्रिटीज में गिने जाते हैं। फिल्ममेकर करण जौहर साल 2026 के इंटरनेशनल फैशन इवेंट मेट गाला के रेड कार्पेट पर चलने वाले पहले भारतीय फिल्म डायरेक्टर बने। करण के लुक का नाम 'फ्रेम्ड इन इटर्निटी' रखा गया था। यह आउटफिट भारत के महान चित्रकार राजा रवि वर्मा की ऐतिहासिक कलाकृतियों और पेंटिंग्स (जैसे 'हंस दमयंती' और 'अर्जुन और सुभद्रा') से प्रेरित था। …………………………………… फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरीज भी पढ़ें… नवाजुद्दीन सिद्दीकी@52:वॉचमैन बने तो मालिक बोले- इस मरे हुए को किसने रखा, दोस्त की गुमशुदगी से मिली सरफरोश, सीन कटे तो थिएटर में रोए नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने संघर्ष, मेहनत और दमदार अभिनय से बॉलीवुड में पहचान बनाई। वॉचमैन से लेकर छोटे रोल तक निभाकर वो बेहतरीन कलाकार बने। पूरी खबर यहां पढ़िए…

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प्लेऑफ की टीमों में क्या रहा कॉमन फैक्टर:टॉप बैटर्स ने औसतन 1550+ रन बनाए; कोई टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी

IPL 2026 के लीग स्टेज के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स ने प्लेऑफ में जगह बनाई। 26 मई को बेंगलुरु और गुजरात के बीच क्वालिफायर-1 खेला जाएगा, जबकि 27 मई को हैदराबाद और राजस्थान एलिमिनेटर में भिड़ेंगे। चारों टीमों का सफर अलग रहा, लेकिन प्रदर्शन में कई कॉमन फैक्टर्स नजर आए। स्टोरी में प्लेऑफ में पहुंची चारों टीमों के कॉमन फैक्टर्स का एनालिसिस है। इसके लिए 4 पैरामीटर्स तय किए गए हैं.... 1. टॉप बैटर्स का प्रदर्शन 2. टॉप बॉलर्स का प्रदर्शन 3. किस टीम ने कितनी बार 200+ स्कोर बनाए 4. टीमों की विनिंग और लूजिंग स्ट्रीक 1. गुजरात-हैदराबाद के टॉप-3 बैटर्स का औसत 576 रन प्रति बल्लेबाज प्लेऑफ में पहुंची टीमों की सबसे बड़ी ताकत टॉप ऑर्डर रहा। बेंगलुरु के विराट कोहली (557), देवदत्त पडिक्कल (433) और रजत पाटीदार (393) ने मिलकर 1383 रन बनाए। गुजरात के साई सुदर्शन (638), शुभमन गिल (616) और जोस बटलर (469) ने 1723 रन जोड़े। हैदराबाद के हेनरिक क्लासन (606), ईशान किशन (569) और अभिषेक शर्मा (563) ने 1738 रन बनाए। राजस्थान के वैभव सूर्यवंशी (583), ध्रुव जुरेल (458) और यशस्वी जायसवाल (397) ने 1438 रन बनाए। चारों प्लेऑफ टीमों के टॉप-3 बल्लेबाजों ने मिलकर 6282 रन बनाए। प्रति टीम टॉप-3 बल्लेबाजों का औसत 1570.5 रन रहा। गुजरात और हैदराबाद के टॉप-3 बल्लेबाजों का औसत योगदान 576 रन प्रति बल्लेबाज रहा। राजस्थान के सूर्यवंशी ने 232.27 के स्ट्राइक रेट से टीम को तेज शुरुआत दिलाई। बेंगलुरु के कोहली ने 1 शतक और 4 फिफ्टी लगाईं। हैदराबाद के अभिषेक शर्मा ने 206.22 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। गुजरात के ओपनर साई सुदर्शन और शुभमन गिल ने मिलकर 1254 रन बनाए। 2. बेंगलुरु के बॉलर्स ने 50 विकेट निकाले प्लेऑफ टीमों के गेंदबाजों ने पूरे सीजन लगातार विकेट लेकर मैचों का रुख बदला। बेंगलुरु के भुवनेश्वर कुमार (24), रासिख सलाम (14) और जोश हेजलवुड (12) ने 50 विकेट लिए। गुजरात के कगिसो रबाडा (24), राशिद खान (19) और मोहम्मद सिराज (17) ने 60 विकेट लिए। हैदराबाद के ईशान मलिंगा (19), साकिब हुसैन (15) और प्रफुल हिंगे (11) ने 45 विकेट लिए। राजस्थान के जोफ्रा आर्चर (21), बृजेश शर्मा (13) और नांद्रे बर्गर (11) ने 45 विकेट निकाले। प्लेऑफ टीमों के टॉप-3 गेंदबाजों ने औसतन 50+ विकेट लिए। बेंगलुरु और गुजरात के टॉप गेंदबाजों ने मिलकर 110 विकेट निकाले। औसतन हर गेंदबाज ने 18.33 विकेट लिए। भुवनेश्वर और रबाडा ने 24-24 विकेट लेकर अपनी टीमों की गेंदबाजी अटैक लीड की। राशिद खान और सिराज ने मिडिल व डेथ ओवर्स में असर छोड़ा। राजस्थान के लिए आर्चर और हैदराबाद के मलिंगा ने नई गेंद से लगातार विकेट निकाले। 3. 200+ स्कोर बनाए तो जीत पक्की प्लेऑफ की चार टीमों में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर हैदराबाद ने बनाए। टीम ने 9 बार 200+ रन बनाए, जिनमें 7 मैच जीते और 2 हारे। बेंगलुरु के खिलाफ 255/4, मुंबई के खिलाफ 249/4, दिल्ली के खिलाफ 242/2 और पंजाब के खिलाफ 235/4 जैसे बड़े स्कोर बनाए। हैदराबाद का रनरेट 10.66 रहा, जो चारों प्लेऑफ टीमों में सबसे ज्यादा था। बेंगलुरु ने 8 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम को 5 मैचों में जीत और 3 में हार मिली। चेन्नई के खिलाफ 250/3, मुंबई के खिलाफ 240/4 और पंजाब के खिलाफ 222/4 जैसे बड़े टोटल बनाए। टीम का रनरेट 10.50 रहा। इसी बल्लेबाजी की वजह से बेंगलुरु का नेट रनरेट +0.783 रहा, जो प्लेऑफ टीमों में सबसे बेहतर था। गुजरात ने 5 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम ने 3 मैच जीते और 2 गंवाए। राजस्थान और चेन्नई के खिलाफ 229-229 रन बनाए, जबकि दिल्ली के खिलाफ 210 रन बनाए। टीम का रनरेट 9.37 और नेट रनरेट +0.695 रहा। यही टॉप-2 फिनिश की बड़ी वजह बना। राजस्थान ने 7 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम को 5 जीत और 2 हार मिलीं। पंजाब के खिलाफ 228/4, लखनऊ के खिलाफ 225/3 और गुजरात के खिलाफ 210 रन बनाए। राजस्थान का रनरेट 10.24 रहा। टीम +0.189 नेट रनरेट के साथ चौथे स्थान पर रही। 4. कोई भी टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी प्लेऑफ में पहुंची चारों टीमों का बड़ा कॉमन फैक्टर उनकी निरंतरता रही। बेंगलुरु पूरे सीजन लगातार 2 से ज्यादा मैच नहीं हारी। गुजरात ने शुरुआती दो मैच हारने के बाद लगातार 3 जीत दर्ज कीं। हैदराबाद ने अप्रैल के पहले हफ्ते में लगातार 2 हार झेलीं, लेकिन बाद में लगातार 5 मैच जीतकर वापसी की। राजस्थान को सीजन में लगातार 3 हार मिलीं, लेकिन टीम ने बाद में लखनऊ और मुंबई को हराकर वापसी की। चारों टीमों ने सीजन में कम से कम एक बड़ा विनिंग स्ट्रीक बनाया। बेंगलुरु ने मुंबई, कोलकाता और पंजाब को हराकर लगातार 3 जीत दर्ज कीं। राजस्थान ने सीजन की शुरुआत लगातार 4 जीत के साथ की थी। टीम ने चेन्नई, गुजरात, मुंबई और बेंगलुरु को हराकर शुरुआती बढ़त बनाई। गुजरात ने चेन्नई, बेंगलुरु, पंजाब, राजस्थान और हैदराबाद को हराकर लगातार 5 मैच जीते। हैदराबाद ने राजस्थान, चेन्नई, दिल्ली, राजस्थान और मुंबई के खिलाफ लगातार 5 मैच जीते।

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  Sports

KKR की लगातार हार पर Ajinkya Rahane का बड़ा बयान, कहा- मैं पीछे हटने वालों में से नहीं

कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मौजूदा सत्र में टीम की निराशाजनक शुरुआत के बावजूद उनके मन में कभी भी कप्तानी छोड़ने का विचार नहीं आया। केकेआर की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी और उसे अपने पहले छह मैचों में से पांच में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उसने अपने अंतिम आठ मैचों में से छह जीतकर अच्छी वापसी की लेकिन उसकी टीम प्लेऑफ में जगह नहीं बना पाई।

रहाणे ने इस सत्र का अपना आखिरी मैच खेलने के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने अपने पूरे जीवन में अच्छी मानसिकता के साथ क्रिकेट खेला है। मेरे लिए अपना जज्बा बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण रहा है।’’ रविवार को केकेआर को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 40 रन से हार का सामना करना पड़ा था। रहाणे ने कहा, ‘‘मैं कभी पीछे हटने वालों में से नहीं हूं। जब टीम मुश्किल में हो, जब टीम संघर्ष कर रही हो तब अपना जज्बा दिखाना बहुत जरूरी होता है। मैं कभी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटता। मेरे मन में कभी कप्तानी छोड़ने का विचार नहीं आया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दबाव तो होता है। यह स्वाभाविक है, लेकिन दबाव उन लोगों पर होता है जो विशेषाधिकार प्राप्त हैं। हर कोई इस दबाव को सहन नहीं कर सकता। मेरे लिए मजबूत बने रहना और किसी भी स्थिति में घबराना नहीं महत्वपूर्ण था। जब आप 5-6 मैच हार जाते हैं तो आपका ध्यान अतीत और भविष्य पर केंद्रित हो जाता है।’’

रहाणे का बल्लेबाजी में प्रदर्शन निराशाजनक रहा। इस अनुभवी सलामी बल्लेबाज ने 14 मैचों में 135 के स्ट्राइक रेट से 335 रन बनाए। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे कुछ प्रमुख खिलाड़ी चोटिल होने के कारण नहीं खेल पा रहे थे और यह हमेशा एक चुनौती होती है, लेकिन मैं उस पर ध्यान नहीं दे रहा था। मुझे भारतीय गेंदबाजों पर भरोसा था और मैं उन्हें समय देना चाहता था। मुझे विश्वास था कि अगर हम उनका साथ दें, अगर हम उन्हें समय दें, तो वे दबाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

Mon, 25 May 2026 12:01:12 +0530

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