अमेरिका में भारतीय की बेइज्जती पर रुबियो से सीधा सवाल, लेकिन जयशंकर की मुस्कान छा गई
Marco Rubio Press Conference S Jaishankar smile Video: भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने के दौरान जयशंकर की एक हल्की मुस्कान चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने रूबियो से अमेरिका में भारतीयों और भारतीय-अमेरिकियों के साथ नस्लभेदी (Racist) टिप्पणियों को लेकरसवाल पूछ लिया. पत्रकार ने पूछा कि ऐसे नस्लभेदी कमेंट्स भारत-अमेरिका संबंधों के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ जाते हैं, इस पर उनका क्या कहना है? यह सवाल सुनते ही रूबियो थोड़े असहज हो गए. उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि 'दुनिया के हर देश में बेवकूफ लोग होते हैं.' लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कैमरा एस जयशंकर की ओर घूमा और उनके चेहरे पर एक बेहद हल्की मुस्कान देखी गई. जयशंकर का यह रिएक्शन अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है. आखिर, इस मुस्कान के पीछे क्या सच्चाई छिपी हुई है.
भारत-रूस की यारी एक दम पक्की वाली है! देखें रुबियों के सामने जयशंकर ने कैसे कर दिया साफ
नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मौजूदगी में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने साफ कर दिया कि भारत किसी एक पाले में खड़े होने की पुरानी कूटनीति पर नहीं चलता. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वैश्विक संघर्षों के बीच भारत के हित लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए नई दिल्ली के रिश्ते सभी पक्षों के साथ बेहद मजबूत हैं. रूस के साथ भारत की पक्की यारी का हवाला देते हुए उन्होंने यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण दिया, जहां भारत के संबंध रूस, यूरोप, यूक्रेन और अमेरिका, सभी के साथ स्वतंत्र रूप से कायम हैं. जयशंकर ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए इसे भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के भारत के पास हितों का एक ऐसा विस्तृत दायरा है, जिसके तहत हमें एक साथ कई कूटनीतिक खातों को संभालना होता है. साफ है कि भारत किसी के प्रभाव में आकर रूस से अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते कमजोर नहीं करेगा.नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की मौजूदगी में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने साफ कर दिया कि भारत किसी एक पाले में खड़े होने की पुरानी कूटनीति पर नहीं चलता. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वैश्विक संघर्षों के बीच भारत के हित लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए नई दिल्ली के रिश्ते सभी पक्षों के साथ बेहद मजबूत हैं. रूस के साथ भारत की पक्की यारी का हवाला देते हुए उन्होंने यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण दिया, जहां भारत के संबंध रूस, यूरोप, यूक्रेन और अमेरिका, सभी के साथ स्वतंत्र रूप से कायम हैं. जयशंकर ने अमेरिकी दबाव को दरकिनार करते हुए इसे भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के भारत के पास हितों का एक ऐसा विस्तृत दायरा है, जिसके तहत हमें एक साथ कई कूटनीतिक खातों को संभालना होता है. साफ है कि भारत किसी के प्रभाव में आकर रूस से अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते कमजोर नहीं करेगा.
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