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‘रामायणम्’ की रिलीज का महा प्लान:विदेशों में 50 हजार और भारत में 9 हजार स्क्रीन पर होगी रिलीज

नितेश तिवारी की ‘रामायणम्’ रिलीज से पहले ही ग्लोबल स्तर पर नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। फिल्म को भारत में करीब 9 हजार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 हजार स्क्रीन्स पर रिलीज करने की योजना है। यह किसी भारतीय फिल्म की अब तक की सबसे बड़ी ग्लोबल थिएट्रिकल रिलीज होगी। मेकर्स ने फिल्म का इंग्लिश लिप-सिंक ट्रेलर जारी करते हुए अंतरराष्ट्रीय रिलीज के बड़े प्लान की जानकारी दी है। भारत और विदेशों के स्क्रीन काउंट को मिलाकर ‘रामायणम्’ की कुल ग्लोबल स्क्रीन संख्या 59 हजार के आसपास पहुंच सकती है। हालांकि यह आंकड़ा रिलीज के अंतिम समय में बदल सकता है। ‘पुष्पा 2’ और ‘RRR’ से कई गुना बड़ा है रिलीज का प्लान अगर तय स्क्रीन काउंट लागू होता है तो ‘रामायणम्’ हाल की बड़े भारतीय ब्लॉकबस्टर्स से काफी आगे निकल जाएगी। ‘पुष्पा 2: द रूल’ करीब 12-13 हजार और ‘RRR’ करीब 10-11 हजार स्क्रीन्स पर दुनियाभर में रिलीज हुई थीं। ‘रामायणम्’ का प्रस्तावित इंटरनेशनल रिलीज स्केल हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों से भी तुलना खींच रहा है। ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ की रिलीज करीब 52 हजार स्क्रीन्स पर बताई गई थी। ऐसे में ‘रामायणम्’ का संभावित स्क्रीन काउंट इसे नए स्तर पर पहुंचा सकता है। 50 भाषाओं में भी रिलीज होगी, AI लिप-सिंक का हुआ है यूज फिल्म ‘रामायणम्’ को दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इसे 50 भाषाओं में रिलीज किया जा सकता है। इसके लिए नमित मल्होत्रा की DNEG की ओर से तैयार की गई AI तकनीक ‘ब्रह्मा AI’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंग्लिश ट्रेलर में इसी तकनीक की झलक देखने को मिली है, जिसमें कलाकारों की मूल आवाज को बरकरार रखते हुए उनके संवादों को लिप-सिंक किया गया है। बता दें कि यह फिल्म 8 नवंबर को भारत में रिलीज होगी। हालांकि उससे दो दिन पहले 6 नवंबर को विदेशों में ग्रैंड लेवल पर रिलीज की जाएगी।

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सावन सोमवार और Pradosh Vrat एक ही दिन पड़ जाए तो? पूजा विधि को लेकर Confusion छोड़ें, यहां जाने Shiv Puja का सटीक उपाय

श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। इस दौरान पड़ने वाला हर सोमवार का अपना एक खास महत्व है। सावन के महीने में साधक भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूब जाते हैं, सच्चे मन से व्रत रखते है और पूजा अर्चना करते हैं। कई भक्तजन सावन के महीने से 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं। वैसे हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो कि यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल के शिव-पूजन के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है।
हालांकि, कई बार पंचांग में ऐसा दुलर्भ संयोग बन ही जाता है जब सावन का सोमवार और प्रदोष व्रत दोनों एक ही दिन पड़ जाए। ऐसे में साधक भी दुविधा में चले जाते हैं कि पूजा कैसे करे? क्योंकि दोनों व्रतों की अपनी अलग मुख्यता है और भगवान का अभिषेक किस समय करना सही होता है, आइए आपको बताते हैं।

धार्मिक शास्त्र क्या कहते हैं?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब सावन सोमवार और प्रदोष व्रत की तिथि एक साथ पड़ जाए,तो भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा का महा-संयोग मानना चाहिए। इस दिन की गई श्रद्धापूर्ण पूजा से जीवन में सुख-शांति आती है। इसलिए आपको दोनों व्रत अलग-अलग रखने की कोई जरुरत नहीं है। आप एक ही दिन में दोनों व्रत के नियमों का पालन कर सकते हैं।

जाने सही पूजा-विधि
इस खास संयोग के दौरान आप सुबह और शाम को पूजा कर सकती हैं-

सुबह की पूजा (सोमवार व्रत के लिए)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। भगवान शिव का स्मरण करते हुए दोनों व्रत का एक साथ संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग का जल या पंचामृत से अभिषेक करें। 'ॐ नमः शिवाय'का जप करते हुए बेलपत्र अर्पित करें और सोमवार व्रत की कथा जरुर पढ़ें।

शाम की पूजा (प्रदोष व्रत के लिए)
वैसे प्रदोष व्रत की असली महत्व संध्या काल यानी 'प्रदोष काल' में होती है। यह समय सूर्यास्त से लेकर करीब 2 घंटे बाद तक रहता है। शाम के समय एक बार फिर स्नान करने करें या हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ हो जाएं। इसके बाद शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, धतूरा, चंदन और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा सुनें, दीपदान करें और आखिर में भगवान शिव की आरती करें। वहीं व्रत का पारण (खोलना) आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार शाम की पूजा या फिर अगले दिन सुबह कर सकते हैं। 

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  Sports

वैभव सूर्यवंशी से लेकर अभिषेक शर्मा तक... 7 लेफ्ट हैंड क्रिकेटर्स, जो बन चुके हैं भारतीय क्रिकेट का फ्यूचर

7 left hand cricketers Indian cricket future: आज के दौर में टीम इंडिया में लेफ्ट हैंड बल्लेबाजों का दबदबा और क्रेज पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है. जब मैदान पर कोई वामहस्त बल्लेबाज क्रीज पर उतरता है, तो गेंदबाजों की रणनीति से लेकर कप्तान की फील्डिंग तक सब कुछ बदल जाता है. वैभव सूर्यवंशी जैसे 'जेन-अल्फा' के सबसे युवा सितारे से लेकर ऋषभ पंत और यशस्वी जायसवाल जैसे इंटरनेशनल क्रिकेट में गदर मचा रहे स्थापित दिग्गजों तक.आज भारतीय क्रिकेट के पास ऐसे लेफ्ट-हैंडर खिलाड़ियों की एक बेहद आक्रामक फौज मौजूद है, जो विरोधी टीमों के पसीने छुड़ा देती है. Thu, 13 Aug 2026 21:39:29 +0530

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