पाकिस्तान में उठी भेदभाव और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन को खत्म करने की मांग की
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जारी रहने के बीच, 'माइनॉरिटी राइट्स मार्च' और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने 'राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस' पर कराची में मजार-ए-कायद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने देश भर में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव और उत्पीड़न की निंदा की.
इस प्रदर्शन में पाकिस्तान के जाने-माने अधिकार कार्यकर्ता (राइट एक्टिविस्ट) और समुदाय के नेता शामिल हुए, जिनमें शीमा किरमानी, पादरी गजाला शफीक, विनेश आर्य, सज्जल शफीक, नाथन डेनियल और अनवर शेख शामिल थे.
पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जबरदस्ती धर्म परिवर्तन को अपराध घोषित करने और अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच शादी से जुड़े पर्सनल लॉ (व्यक्तिगत कानूनों) में संशोधन करने की मांग की, ताकि अल्पसंख्यक जीवनसाथी और बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सके.
उन्होंने अपनी 11-सूत्रीय मांगों को स्वीकार करने की भी अपील की, जिसमें जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपाय और ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग से सुरक्षा शामिल है.
अन्य मांगों में सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में सभी स्तरों पर अल्पसंख्यकों के लिए 10 प्रतिशत कोटा, अल्पसंख्यकों को सफाई और कम वेतन वाली अन्य नौकरियों तक ही सीमित रखने की प्रथा को खत्म करना, और अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों और संपत्तियों की सुरक्षा व बहाली शामिल थी.
प्रदर्शनकारियों ने रिकॉर्ड को डिजिटल करने और राष्ट्रीय व प्रांतीय अल्पसंख्यक अधिकार आयोग बनाकर सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले को लागू करने की भी मांग की.
उन्होंने स्कूल के सिलेबस और किताबों से भेदभावपूर्ण और नफरत फैलाने वाली सामग्री हटाने की भी मांग की और अल्पसंख्यकों के सम्मान, सहनशीलता, शांति और धार्मिक विविधता पर ज्यादा जोर देने को कहा. प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि संविधान और दूसरे कानूनों में 'गैर-मुस्लिम' शब्द की जगह विशिष्ट धार्मिक पहचानों का इस्तेमाल किया जाए.
पाकिस्तान हर साल 11 अगस्त को 'राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस' मनाता है. यह दिन 1947 में संविधान सभा में मोहम्मद अली जिन्ना के उस भाषण की याद में मनाया जाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लोग अपने मंदिरों, मस्जिदों या पूजा के अन्य स्थानों पर जाने के लिए स्वतंत्र हैं, और धर्म, जाति या पंथ के आधार पर राज्य के सामने उनकी स्थिति तय नहीं होगी.
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, "जिन्ना के समान नागरिकता के सिद्धांत और मौजूदा हकीकत के बीच के अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह बात इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि ये सुरक्षा उपाय पाकिस्तान के बनने के समय ही तय किए गए थे. धार्मिक अल्पसंख्यकों को आज भी मॉब लिंचिंग, पूजा-स्थलों पर हमलों, जबरन धर्म-परिवर्तन और सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है."
रिपोर्ट में कहा गया है, "धर्म की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का इस्तेमाल कभी-कभी झूठे आरोपों के जरिए हथियार के तौर पर किया जाता है, जिसके नतीजे कोर्ट-कचहरी से कहीं आगे तक जाते हैं. भले ही सरकार समानता की गारंटी देती हो, लेकिन सामाजिक भेदभाव और संस्थागत रुकावटें असल में उस गारंटी को कमजोर बना देती हैं. 'राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस' का आयोजन सिर्फ रस्म-अदायगी तक सीमित नहीं रहना चाहिए."
स्रोत- आईएएनएस
Tukiye plane Crash: तुर्किए वायुसेना का एफ-16 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित
देश के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को उत्तर-पश्चिमी प्रांत यालोवा में ट्रेनिंग उड़ान के दौरान तुर्किए वायुसेना का एफ-16 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन पायलट सुरक्षित बच गया.
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में मंत्रालय ने बताया कि विमान एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और क्रैश से पहले पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया.
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने कहा कि दुर्घटना के सही कारण का पता विस्तृत जांच के बाद चलेगा. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद दुर्घटना स्थल पर बड़ी संख्या में एम्बुलेंस और मेडिकल रेस्क्यू टीमें भेजी गईं.
तुर्किए के समाचार चैनल एनटीवी द्वारा दिखाए गए लाइव फुटेज में मलबे से आग का गोला और घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दिया, जो प्रांत में कई जगहों से देखा जा सकता था.
इससे पहले फरवरी में, तुर्किए के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि पश्चिमी बालिकेसिर प्रांत में तुर्किए का एफ-16 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें पायलट की मौत हो गई थी.
मंत्रालय ने 25 फरवरी को 'एक्स' पर कहा, "स्थानीय समय के अनुसार 0056 बजे (2156 जीएमटी), बालिकेसिर में 9वें मेन जेट बेस कमांड से उड़ान भरने वाले हमारे एफ-16 का रेडियो संपर्क और लोकेशन का पता नहीं चल पाया. तुरंत शुरू किए गए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के परिणामस्वरूप, यह पता चला कि हमारा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उसका मलबा मिल गया."
7 अगस्त को, सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक के खिलाफ कोई भी सशस्त्र हमला उन सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा.
इस समझौते पर सऊदी अरब के शहर मक्का में संयुक्त रक्षा के लिए आयोजित एक शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद, तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए.
इसमें प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा. हालांकि, प्रत्येक देश द्वारा ली गई विशिष्ट प्रतिबद्धताओं के बारे में अब तक बहुत कम विवरण सार्वजनिक किए गए हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते के तहत उन्हें एक-दूसरे की रक्षा के लिए किस हद तक ठोस सैन्य कार्रवाई करनी होगी.
स्रोत- आईएएनएस
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