Tukiye plane Crash: तुर्किए वायुसेना का एफ-16 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित
देश के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को उत्तर-पश्चिमी प्रांत यालोवा में ट्रेनिंग उड़ान के दौरान तुर्किए वायुसेना का एफ-16 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन पायलट सुरक्षित बच गया.
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में मंत्रालय ने बताया कि विमान एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और क्रैश से पहले पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया.
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने कहा कि दुर्घटना के सही कारण का पता विस्तृत जांच के बाद चलेगा. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद दुर्घटना स्थल पर बड़ी संख्या में एम्बुलेंस और मेडिकल रेस्क्यू टीमें भेजी गईं.
तुर्किए के समाचार चैनल एनटीवी द्वारा दिखाए गए लाइव फुटेज में मलबे से आग का गोला और घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दिया, जो प्रांत में कई जगहों से देखा जा सकता था.
इससे पहले फरवरी में, तुर्किए के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि पश्चिमी बालिकेसिर प्रांत में तुर्किए का एफ-16 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें पायलट की मौत हो गई थी.
मंत्रालय ने 25 फरवरी को 'एक्स' पर कहा, "स्थानीय समय के अनुसार 0056 बजे (2156 जीएमटी), बालिकेसिर में 9वें मेन जेट बेस कमांड से उड़ान भरने वाले हमारे एफ-16 का रेडियो संपर्क और लोकेशन का पता नहीं चल पाया. तुरंत शुरू किए गए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के परिणामस्वरूप, यह पता चला कि हमारा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उसका मलबा मिल गया."
7 अगस्त को, सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक के खिलाफ कोई भी सशस्त्र हमला उन सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा.
इस समझौते पर सऊदी अरब के शहर मक्का में संयुक्त रक्षा के लिए आयोजित एक शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद, तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए.
इसमें प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा. हालांकि, प्रत्येक देश द्वारा ली गई विशिष्ट प्रतिबद्धताओं के बारे में अब तक बहुत कम विवरण सार्वजनिक किए गए हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते के तहत उन्हें एक-दूसरे की रक्षा के लिए किस हद तक ठोस सैन्य कार्रवाई करनी होगी.
स्रोत- आईएएनएस
होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ‘अमेरिका का पूरा कंट्रोल’, ईरान ने भी संघर्ष लंबा खींचने के दिए संकेत
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने दावा किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और फिलहाल इसे अपने नियंत्रण में ही रखने का इरादा है. उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच जारी टकराव को लेकर चर्चा और तेज हो गई है.
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है. उन्होंने अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी का जिक्र करते हुए इसे ऐसी ‘स्टील की दीवार’ बताया, जिसके सामने ईरान कुछ नहीं कर सकता.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ईरान को लेकर भी तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ईरान अब मध्य पूर्व में पहले की तरह प्रभाव जमाने की स्थिति में नहीं है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र में अमेरिकी और ईरानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है.
दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. खाड़ी क्षेत्र से होने वाले ऊर्जा निर्यात के लिए इसका रणनीतिक महत्व बेहद ज्यादा है.
ऐसे में इस समुद्री मार्ग को लेकर किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है. तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों और निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है.
ईरान के रुख से बढ़ी चिंता
दूसरी ओर, ईरान की ओर से भी संकेत मिल रहे हैं कि वह अमेरिका के साथ टकराव को जल्द खत्म करने के पक्ष में नहीं है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रजा नकदी ने संघर्ष को लंबा खींचने की संभावना की बात कही है.
उनके मुताबिक ईरान को अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमता इतनी मजबूत करनी होगी कि भविष्य में कोई भी देश उस पर हमला करने से पहले उसके संभावित परिणामों के बारे में सोचे.
ट्रंप के कार्यकाल तक जारी रह सकता है टकराव?
नकदी के बयान के मुताबिक ईरान के लिए एक रणनीति यह भी हो सकती है कि अमेरिका के साथ मौजूदा टकराव को तब तक जारी रखा जाए, जब तक ट्रंप का मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त न हो जाए.
उनका तर्क है कि लंबे संघर्ष के जरिए विरोधी को धीरे-धीरे कमजोर किया जा सकता है और भविष्य में किसी संभावित हमले की कीमत बढ़ाई जा सकती है. हालांकि, यह बयान ईरान की रणनीतिक सोच को दर्शाता है, इसे किसी औपचारिक युद्ध-नीति की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
तनाव का असर वैश्विक स्तर पर
होर्मुज को लेकर अमेरिकी दावे और ईरानी सलाहकार के बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका-ईरान टकराव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है. खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में बढ़ेंगे या होर्मुज जैसे रणनीतिक क्षेत्र में टकराव आने वाले दिनों में और गंभीर रूप लेगा.
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