'पिता को दूध बेचते देख मुझे बुरा लगता...' जैवलीन थ्रो सिल्वर मेडलिस्ट ने कहा - ढूंढ रहा हूं नौकरी
उत्तर प्रदेश के रहने वाले 19 साल के आशीष यादव ने जैवलीन थ्रो में अपना करियर बनाने के लिए अपना गांव छोड़ दिया और हरियाणा के हिसार चले गए, जिसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया. सिर्फ 15 महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था. नीरज चोपड़ा के बाद इस प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतने वाले वे दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने थे. नीरज चोपड़ा ने साल 2016 यह कारनाम किया था. इसके ठीक 10 साल बाद आशीष यादव ने अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. हालांकि इतनी बड़ी सफलता के बाद भी आशीष यादव के परिवार की गरीबी दूर नहीं हुई है और वे अब भी नौकरी की तलाश कर रहे हैं.
मुझे बुरा लगता है कि मेरे पिता दूध बेचते हैं - आशीष यादव
हिसार जाने से पहले, आशीष मिर्जापुर में अपने पिता को दूध बेचने में मदद करते थे. फैमली में सिर्फ उनके पिता ही कमाने वाले थे. आशीष ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया, "मेरे पिता मिर्जापुर के हमारे गांव में दूध बेचते हैं. मेरे पिता के 6 भाई हैं, जिसमें 3 भाई सैनिक हैं और तीन भाई किसान हैं. मुझे बुरा लगता है कि मेरे पिता दूध बेचते हैं.
नौकरी की तलाश में है जैवलीन थ्रो का सिल्वर मेडलिस्ट
आशीष यादव ने आगे कहा, "मैं नौकरी की तलाश कर रहा हूं, लेकिन अभी तक मिली नहीं है. मैं हिसार में अच्छी तरह से ट्रेनिंग लूंगा और कड़ी मेहनत करूंगा ताकि देश के लिए मेडल जीत सकूं (और मुझे जॉब मिल जाए). घर की आर्थिक स्थिति वैसी ही है. उसमें कोई सुधार नहीं हो रहा है, क्योंकि मुझे कोई नौकरी नहीं मिल रही है.
ASHISH IS WORLD SILVER MEDALIST ????????
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 8, 2026
- Ashish Yadav became 2nd Indian after Neeraj Chopra to win medal at World U20 Athletics Championship! ????????????
Best Throw of 74.09m in his 3rd Attempt!
HUGE RESULT FOLKS!!! ???????????????????? pic.twitter.com/cUSMEmwkCK
आशीष यादव के खेल में आया है बड़ा सुधार
कोच अरविंद कुमार से ट्रेनिंग मिलने के बाद आशीष यादव के खेल में बहुत बड़ा सुधार हुआ है. अब वे पहले के मुकाबले करीब 20 मीटर ज़्यादा दूर तक भाला फेंक लेते हैं. साथ ही, अच्छे खान-पान और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की बदौलत उनका वजन भी 68 किलो से बढ़कर 85 किलो हो गया है.
सिल्वर मेडलिस्ट ने अपने कोच की तारीफ की
आशीष ने कहा "जब मैं अरविंद सर के पास गया, तो उनके साथ 60 मीटर फेंकने वाले खिलाड़ी थे, लेकिन मेरा लक्ष्य 70 मीटर फेंकना था. कोच अरविंद के साथ 6 महीने में मैंने अपनी दूरी 20 मीटर बढ़ा दी. जब मैं आया था, तब मुझे भाला फेंकने का सही तकनीक नहीं पता था. उन्होंने मुझे सही तरीका सिखाया, मेरी मांसपेशियों को मजबूत बनाने पर काम किया और मुझे पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर बनाया."
नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीतने पर आशीष यादव को दी थी बधाई
नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीतने पर आशीष को बधाई दी, लेकिन युवा खिलाड़ी का कहना है कि वह ओलंपिक चैंपियन से तुलना किए जाने के बजाय अपनी खुद की पहचान बनाना चाहता है. आशीष ने कहा, "मैं उनसे मिला नहीं हूं. इतनी जल्दी उनसे कैसे मिल सकता हूं? लेकिन मैं नहीं चाहता कि मेरी तुलना उनसे की जाए, मैं अभी उस लेवल पर नहीं हूं. इसके बजाय, मैं कड़ी मेहनत करना चाहता हूं. हमारे गांव में कोई भी भाला फेंक नहीं खेलता. मुझे उम्मीद है कि मेरे गांव के लोग इस खेल को जानेंगे और इसे खेलना शुरू करेंगे."
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क्या रात में फहरा सकते हैं तिरंगा? घर की बालकनी में झंडा लगाने से पहले जान लें नियम
Har Ghar Tiranga 2026: भारत इस बार अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. देशभर में 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाया जाएगा. पीएम मोदी ने इस खास मौके पर देशवासियों आजादी के इस जश्न में पूरे उत्साह के साथ भाग लेने का आह्वान किया है. लेकिन इससे पहले देशभर में हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है. जिसकी शुरुआत 9 अगस्त से की गई थी. ये अभियान 17 अगस्त तक चलेगा. इस अभियान में पूरा देश भाग ले रहा है.
इस अभियान के तहत लोगों को अपने घर पर तिरंगा फहराना होता है. हालांकि तिरंगा फहराने से पहले आपको कुछ जरूरी नियम भी जान लेने चाहिए. जो आपको जानना जरूरी हैं. क्योंकि तिरंगा फहराने से लेकर उतारने तक कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है. हर घर तिरंगा अभियान के तहत अगर आप तिरंगे के साथ सेल्फी पोस्ट करते हैं, तो आपको सर्टिफिकेट भी मिलेगा. ऐसे में हम आपको बताते हैं कि तिरंगा लगाने के नियम क्या है क्या रात में भी तिरंगा फहराया जा सकता है और घर पर तिरंगा फहराने के नियम क्या हैं.
क्या है इस बार हर घर तिरंगा अभियान की थीम?
बता दें कि 'हर घर तिरंगा' भारत सरकार का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है. जिसकी शुरुआत 'आजादी का अमृत महोत्सव' के तहत की गई थी. इस बार के अभियान की खासियत ये है कि इस बार ये राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को समर्पित किया गया है. इसकी थीम वंदे मातरम की भावना है. बता दें कि भारत इस साल ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150वें वर्ष का भी उत्सव मना रहा है.
क्या रात में फहराया जा सकता है तिरंगा?
बता दें कि 2022 में भारतीय ध्वज संहिता 2002 में किए गए संशोधन के बाद नागरिकों को रात में तिरंगा फहराने की अनुमति दी गई है. हालांकि पहले नियम था कि तिरंगा सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता है. लेकिन बाद में ये नियम बदल दिया गया. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि रात में तिरंगा फहराने के लिए उचित रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि झंडा स्पष्ट रूप से दिखाई दे और उसकी गरिमा बनी रहे.
तिरंगा फहराने और क्या है नियम
1. तिरंगा फहराने के अन्य नियमों के मुताबिक, तिरंगे का केसरिया रंग हमेशा ऊपर और हरा रंग नीचे होना चाहिए. उल्टा तिरंगा फहराना अपमान माना जाता है.
2. इसके अलावा झंडा कटा-फटा, गंदा, या फीका नहीं होना चाहिए और ना ही इसे जमीन में रखा जाता है ना ही झुकाया जाता है तिरंगा को हमेशा अन्य झंडों से ऊंचा रखना चाहिए.
3. छत पर तिरंगा फहराते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह सम्मानजनक स्थान पर हो और हवा में स्वतंत्र रूप से लहरा सके. तिरंगे का उपयोग सजावट, परदा, या कपड़े के रूप में नहीं किया जा सकता.
4. इसके साथ ही झंडे को पानी में नहीं डुबाया जाना चाहिए. गंदा या फटा होने पर तिरंगे के सम्मान को ठेस पहुंचा माना जाता है.
5. तिरंगे का हमेशा सम्मान करें, इसके साथ ही आप अपने घर, ऑफिस, कॉलेज, स्कूल कहीं पर भी तिरंगा फहरा सकेत हैं लेकिन इसके सम्मान का पूरा ध्यान रखना चाहिए. घर घर तिरंगा अभियान के दौरान 9 अगस्त से 17 अगस्त के बीच तिरंगा झंडा घर पर फहराकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं.
6. अगर आप अपने घर की छत या बालकनी में तिरंगा फहरा रहे तो इस बात का ध्यान रखना होगा कि तिरंगा पानी में न भीगे.
7. अगर आप खुद से ही तिरंगा बनवाकर फहरा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि तिरंगे का कपड़ा सही हो. तिरंगे का कपड़ा हमेशा सूती, पॉलिएस्टर, ऊन, सिल्क या खादी का होना चाहिए. तिरंगे का इस्तेमाल कपड़ों के रूप में या सजावट के लिए नहीं करना चाहिए.
8. इसके अलावा तिरंगे के आकार का भी ध्यान रखना चाहिए. क्योंकि कई लोग तिरंगा घर पर बनाकर ही फहराते हैं, ऐसे में उसके सही आकार का ध्यान नहीं रखते. बता दें कि राष्ट्रीय ध्वज आयताकार होना चाहिए. इसकी लंबाई और ऊंचाई यानी चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए.
9. अगर रात में तिरंगा फहरा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि उस स्थान पर हल्की रोशनी होनी चाहिए.
10. तिरंगा फहराते वक्त इस बात का भी ध्यान रखें कि अशोक चक्र दिखना चाहिए. इसलिए तिरंगे को हमेशा ऐसे स्थान पर फहराएं कि जहां उस पर हवा लगने पर उड़े और अशोक चक्र साफ दिखाई दे. अशोक चक्र के डिजाइन या स्वरूप में भी किसी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए.
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