कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामला: लीड केस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत, 2 सितंबर को फिर सुनवाई
Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah Case: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े लीड केस यानी मुख्य या प्रतिनिधि मुकदमे के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की सुनवाई की. प्रतिवादी पक्ष की ओर से सुनवाई टालने के लिए समय मांगा गया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 2 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया.
पिछली सुनवाई में बातचीत का हुआ था जिक्र
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पिछली तारीख पर हुई बातचीत का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि पिछली बार यह बताया गया था कि कृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े कुछ वादियों के बीच बातचीत चल रही है और किसी तरह के समझौते की संभावना बन रही है. इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने साफ कहा कि वह इस बातचीत का हिस्सा नहीं हैं.
इस मामले का मुख्य सवाल यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह से जुड़े कई मुकदमों में किस मुकदमे को लीड या प्रतिनिधि केस के तौर पर आगे बढ़ाया जाए. इस फैसले का असर आगे होने वाली कानूनी कार्यवाही पर पड़ सकता है.
हाईकोर्ट भेजा जा सकता है मामला
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह संकेत मिला कि लीड केस से जुड़े मुद्दे को दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जा सकता है. कोर्ट का मानना है कि इस तरह के मामले में सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना जरूरी है. किसी ऐसे आदेश का असर दूसरे लंबित मुकदमों पर पड़ सकता है तो संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी और सुनवाई का मौका मिलना चाहिए.
जुलाई में हाईकोर्ट ने दी थी प्रतिनिधि मुकदमे की अनुमति
दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई में एक सिविल मुकदमे को प्रतिनिधि मुकदमे के रूप में आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी. इस मुकदमे में भगवान श्रीकृष्ण यानी ठाकुर केशव देव जी महाराज को पक्षकार बनाया गया है. हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि शाही ईदगाह का ढांचा उस स्थान पर बना है जिसे श्रीकृष्ण का जन्मस्थान माना जाता है. इसी से जुड़े विवाद में कई मुकदमे हाईकोर्ट में लंबित हैं.
Order 1 Rule 8 के तहत दाखिल हुआ था आवेदन
हाईकोर्ट में इस मुकदमे को सभी कृष्ण भक्तों की ओर से प्रतिनिधि तौर पर आगे बढ़ाने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के Order 1 Rule 8 के तहत आवेदन किया गया था. हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को आवेदन स्वीकार करते हुए संबंधित लोगों को इसकी जानकारी देने और आपत्तियां मंगाने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था.
2 सितंबर को तय होगी आगे की दिशा
सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सुनवाई विवाद के मूल अधिकार या जमीन के मालिकाना हक पर फैसला करने को लेकर नहीं है. फिलहाल सवाल मुकदमों की प्रक्रिया और लीड केस को लेकर है. कोर्ट यह देख रहा है कि इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों को उचित मौका मिला या नहीं. अदालत ने अभी इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं दिया है. 2 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय कर सकता है. अगर मामला हाईकोर्ट वापस भेजा जाता है तो वहां सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद लीड या प्रतिनिधि मुकदमे को लेकर दोबारा विचार हो सकता है.
दोनों पक्षों की नजर 2 सितंबर की सुनवाई पर
इस सुनवाई के बाद अब दोनों पक्षों की नजर 2 सितंबर पर है. उस दिन यह साफ हो सकता है कि लीड केस का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में आगे चलेगा या इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास वापस भेजकर वहीं सभी पक्षों की सुनवाई कराई जाएगी. यह मामला भगवान श्रीकृष्ण विराजमान एवं अन्य बनाम अंजुमन इस्लामिया कमेटी ऑफ शाही मस्जिद ईदगाह एवं अन्य के नाम से दर्ज है.
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योगी सरकार 45 साल के लिए देगी पट्टे पर जमीन, करना होगा ये काम; जानें क्या होगा फायदा?
UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य के विकास के लिए लगातार नई योजनाएं बना कर लागू कर रही है. अब सीएम योगी राज्य के निजी डेवलपर्स के लिए भी बेहद खास योजना लेकर आए हैं. जिसके तहत उन्हें बिजनेस पार्क विकसित करने होंगे. इस काम के जरिए योगी सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इसके लिए योगी सरकार कई सहूलियतें भी देने जा रही है. जिसमें जमीन से लेकर जरूरी संसाधन तक का इंतजाम राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा.
निजी डेवलपर्स को 45 साल के लिए मिलेगी जमीन
इस योजना के लिए योगी सरकार निजी डेवलपर्स को 45 साल के पट्टे यानी लीज पर जमीन देगी. इसके साथ ही इस जमीन की लीज को अतिरिक्त 45 सालों के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा. बता दें कि दूसरे राज्यों में यह अवधि सिर्फ 30 से 35 वर्ष ही है. गौरतलब है कि ऐसे बिजनेस पार्क महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में भी विकसित हो चुके हैं. ऐसे में सीएम योगी भी अब राज्य में इसी प्रकार के बिजनेस पार्क विकसित कराने पर ध्यान दे रहे हैं. योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में भी निजी बिजनेस पार्क विकास करने की इस योजना को मंजूरी दे दी है.
हाल ही में जारी की गई थी बिजनेस पार्क नीति
बता दें कि योगी सरकार ने हाल ही में बिजनेस पार्क नीति हाल में जारी की थी. जिसके तहत बिजनेस कंसोर्टियम, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REIT), और सूचीबद्ध कंपनियां औद्योगिक पार्क विकसित कर सकेंगी. इन बिजनेस पार्क के लिए कंपनियों की नेटवर्थ कम से कम एक हजार करोड़ होनी चाहिए. साथ ही पिछले तीन वित्तीय सालों में न्यूनतम 500 करोड़ का औसत वार्षिक टर्नओवर भी जरूरी है. ऐसे कंसोर्टियम (औद्योगिक समूह) को ही मौका दिया जाएगा. जिनके पास रियल एस्टेट विकास तथा कॉमर्शियल बिजनेस में कम से कम सात वर्ष का अनुभव होगा.
आईटी, नॉलेज कंपनियों को भी मौका देगी योगी सरकार
बता दें कि इन बिजनेस पार्क को कम के कम 10 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किया जाएगा. जिसे 20 से 30 एकड़ तक विस्तार दिया जा सकेगा. इस योजना के तहत 10 एकड़ तक का बिजनेस पार्क तीन साल में विकसित करना होगा. इसके अलावा बिजनेस पार्क के 50 फीसदी हिस्सा आईटी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, नॉलेज बेस्ड सेवा इकाइयों के लिए आरक्षित होगी.
इसके सात ही अधिकतम 10 प्रतिशत इलाके में फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट तथा अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. बाकी हिस्से में प्रशिक्षण केंद्र, कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करनी होंगी, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने में सक्षम और कुशल कामगार तैयार किए जा सकें.
इसके लिए न्यूनतम अग्रिम भूमि प्रीमियम 5 फीसदी तथा राजस्व हिस्सेदारी 7 प्रतिशत रखी गई है. इस योजना में शामिल होने के लिए विकासकर्ता कंपनी को सभी जरूरी एनओसी, स्वीकृति तथा परमिट हासिल करना होगा. साथ ही भवन उपविधि के मुताबिक लेआउट, वास्तुशिल्प तथा डिजाइन भी तैयार करना होगा.
राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी फ्रीहोल्ड जमीन
इस योजना के लिए यूपी सरकार निजी बिजनेस पार्क के लिए फ्रीहोल्ड भूमि उपलब्ध कराएगी. जिसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनुमोदन और स्वीकृति भी दी जाएगी. साथ ही औद्योगिक विकास प्राधिकरण के जरिए ही निजी विकासकर्ता को भूमि मुहैया कराने सुनिश्चित होगा.
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बता दें कि राज्य सरकार बिजनेस पार्कों के विकास के लिए उपयुक्त भूखंड़ों का निर्धारण भी करेगी. जिसमें नीलामी के जरिए निजी डेवलपर्स को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं बिजनेस पार्क विकसित करने वाली कंपनी को जमीन के रजिस्ट्रेशन पर स्टांप ड्यूटी में 100 फीसदी की छूट दी जाएगी. बताया जा रहा है कि इन बिजनेस पार्कों से युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार भी खुलेंगे.
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