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नेगी के गीतों की गूंज पहुंची दुनिया तक, अंग्रेजी में कालजयी रचनाएं जारी; सीएम धामी ने किया पुस्तक का विमोचन

Uttarakhand News: देहरादून के हरिद्वार बाईपास पर स्थित सोशल बलूनी स्कूल में एक बेहद गरिमामय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की. यह विशेष आयोजन राज्य के महान लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 'नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह' के नाम से आयोजित हुआ. इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के साहित्यकार, कलाकार और संस्कृति प्रेमी बड़ी संख्या में एकत्र हुए. मुख्यमंत्री ने मंच से नरेंद्र सिंह नेगी को उनके जन्मदिन की हार्दिक बधाई दी और उनके उत्तम स्वास्थ्य तथा लंबी आयु की कामना की. उन्होंने नेगी जी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा ध्वजवाहक बताया.

नेगी जी की रचनाओं का अंग्रेजी में विमोचन

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐतिहासिक पुस्तक "Mountain Melodies of Narendra Singh Negi" का भव्य विमोचन किया. यह पुस्तक नरेंद्र सिंह नेगी के कालजयी लोकगीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक उत्तराखंड की लोकभाषा और लोक संस्कृति को वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम साबित होगी. इससे आने वाली नई पीढ़ी और अंतरराष्ट्रीय पाठक नेगी जी के पांच दशकों से चले आ रहे संगीतमय सफर, उनके विचारों और उत्तराखंड के जनजीवन की गहराई को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे. नेगी जी के गीतों में पहाड़ की पीड़ा, प्रकृति, सामाजिक सरोकार और जीवन के संघर्षों का सच्चा चित्रण मिलता है.

ताई तुगुंग को मिला नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान 2026

समारोह का मुख्य आकर्षण 'नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान 2026' का वितरण रहा. इस वर्ष यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अरुणाचल प्रदेश के जाने माने अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार ताई तुगुंग को प्रदान किया गया. मुख्यमंत्री ने ताई तुगुंग को सम्मानित करते हुए कहा कि उन्होंने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगकर्म और फिल्मों के जरिए पूर्वोत्तर भारत की लोक संस्कृति को देश दुनिया में एक नई पहचान दिलाई है. ताई तुगुंग के चर्चित नाटक 'लप्या' और उनकी प्रसिद्ध फिल्म 'संगी माई' की दुनिया भर में सराहना हुई है. इस फिल्म का प्रदर्शन कांस फिल्म फेस्टिवल जैसे वैश्विक मंच पर भी हो चुका है. यह सम्मान हिमालयी राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करता है.

कलाकारों और साहित्यकारों के लिए बड़े फैसले

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का विस्तार से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़ और छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत हमारी असली पहचान हैं. ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक और भंकोरा जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र राज्य की आत्मा में बसे हैं. राज्य सरकार इन सभी लोककलाओं के संरक्षण के लिए निरंतर काम कर रही है. कलाकारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से सूचीबद्धीकरण की प्रक्रिया को बहुत आसान बनाया गया है. अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सरकार द्वारा पंजीकृत किया जा चुका है, जिससे उन्हें निरंतर रोजगार और मंच मिल रहा है.

पेंशन और सहायता राशि में भारी वृद्धि

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों तथा साहित्यकारों की मासिक सहायता राशि को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है. पहले जहां कलाकारों को 3 हजार रुपये प्रति माह मिलते थे, वहीं अब इसे बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है. वर्तमान में 180 कलाकार इस योजना का सीधा लाभ उठा रहे हैं. इसके अलावा पारंपरिक वाद्ययंत्र ढोल दमाऊ को बचाने के लिए पात्र कलाकारों को हर साल मुफ्त में वाद्ययंत्र और पारंपरिक पोशाक दी जा रही है. नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए गुरु शिष्य परंपरा के तहत छह महीने की विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं.

उत्तराखंड बनेगा साहित्य और संस्कृति का राष्ट्रीय केंद्र

राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को केवल एक पर्यटन प्रदेश तक सीमित न रखकर इसे देश का बड़ा सांस्कृतिक और साहित्यिक केंद्र बनाना है. इसके लिए राज्य में दो सर्वसुविधायुक्त 'साहित्य ग्राम' विकसित किए जा रहे हैं. इन साहित्य ग्रामों में लेखकों और शोधकर्ताओं के लिए ठहरने की व्यवस्था, अध्ययन केंद्र, पुस्तकालय और संगोष्ठी भवन बनाए जाएंगे. देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय का निर्माण इसी दूरगामी सोच का हिस्सा है. इसके अतिरिक्त वर्ष 2025 से शुरू किए गए 'दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान' के तहत 5 लाख रुपये तथा 'साहित्य भूषण पुरस्कार' के तहत 5 लाख 51 हजार रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है. अब तक 102 लेखकों को पुस्तक प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा चुकी है.

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संकल्प

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को बचाने के लिए 'विकल्प रहित संकल्प' के मूलमंत्र पर चल रही है. उन्होंने विश्वास जताया कि समाज के प्रबुद्ध वर्गों, कलाकारों और साहित्यकारों के साझा प्रयासों से उत्तराखंड की यह महान धरोहर और अधिक समृद्ध होगी. आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों पर गर्व कर सकेंगी और अपनी बोलियों तथा कला को आगे बढ़ाएंगी. इस कार्यक्रम ने राज्य के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया उत्साह भर दिया है और कलाकारों का मनोबल कई गुना बढ़ा दिया है.

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India vs Sri Lanka Test: Washington Sundar के बाहर होने से Team India की बढ़ी मुश्किलें, लगा बड़ा झटका

श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला शुरू होने से पहले भारतीय टीम की चोट से जुड़ी परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन के बाद अब वॉशिंगटन सुंदर को लेकर भी अच्छी खबर नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक सुंदर दूसरे टेस्ट मैच के लिए भी भारतीय टीम से नहीं जुड़ पाएंगे। उनकी वापसी की संभावना फिलहाल बेहद कम बताई जा रही है।

वॉशिंगटन सुंदर पहले ही 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से बाहर हो चुके हैं। वह पिछले महीने इंग्लैंड दौरे के दौरान लगी हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। फिलहाल वह भारत में बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उपचार और फिटनेस से जुड़ी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, क्रिकेट बोर्ड का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम प्रबंधन सुंदर को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता है। चोट से पूरी तरह ठीक हुए बिना उन्हें श्रीलंका भेजने की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। अगले सप्ताह उनकी फिटनेस का विस्तृत आकलन किया जाना है, जिसके बाद उनकी स्थिति को लेकर अंतिम तस्वीर और साफ हो सकती है।

दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट 15 से 19 अगस्त तक गॉल में खेला जाएगा। इसके बाद दूसरा मुकाबला 23 से 27 अगस्त के बीच कोलंबो के एसएससी मैदान पर होगा। ऐसे में सुंदर के पास दूसरे टेस्ट से पहले वापसी का सीमित समय ही बचा है।

गौरतलब है कि सुंदर भारतीय टीम के लिए गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी का विकल्प भी देते हैं। खासकर श्रीलंका की परिस्थितियों में एक ऐसे खिलाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है जो स्पिन गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में उपयोगी रन भी बना सके। उनकी गैरमौजूदगी से टीम संयोजन पर असर पड़ सकता है।

इससे पहले साई सुदर्शन भी दाएं पैर की चोट के कारण पूरी टेस्ट श्रृंखला से बाहर हो चुके हैं। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अनुसार वह बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ठीक हो रहे हैं और चिकित्सकों की निगरानी में हैं। उनके स्थान पर सरफराज खान को टीम में शामिल किया गया है।

वॉशिंगटन सुंदर की स्थिति पर अगले सप्ताह होने वाले आकलन के बाद ही यह तय होगा कि वह कोलंबो में होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए उपलब्ध हो पाएंगे या नहीं। फिलहाल भारतीय टीम प्रबंधन का पूरा जोर खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट रखने और चोट को दोबारा गंभीर होने से बचाने पर है।

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