Explainer: बॉलीवुड अवॉर्ड्स कैसे तय होते हैं? पब्लिक वोटिंग, परफॉर्मेंस और लॉबिंग से जुड़े इन सवालों को समझिए
Bollywood Awards Selection: बॉलीवुड से जुड़े हर साल कई अवॉर्ड शो होते हैं,जब भी सोशल मीडिया पर अवॉर्ड शो से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आते हैं तो पूरा माहौल फिल्मी दुनिया जैसा लगने लगता है. रेड कार्पेट पर सितारे, डिजाइनर कपड़े, शानदार स्टेज, सेलेब्स की परफॉर्मेंस और हाथ में ट्रॉफी लेकर इमोशनल स्पीच देते स्टार्स दिखाई देते हैं. लेकिन शो खत्म होते ही सोशल मीडिया पर एक अलग तरह की बहस शुरू हो जाती है. लोग पूछते हैं कि आखिर अवॉर्ड किस आधार पर दिया गया? क्या अवॉर्ड बेस्ट एक्टर को दिया गया या पॉपुलर एक्टर को? क्या जूरी ने बिना दबाव के फैसला लिया? और क्या किसी अवॉर्ड शो में स्टार पावर और पीआर का भी रोल होता है? आइए इन सवालों को आसान भाषा में समझते हैं.
अवॉर्ड शो सिर्फ ट्रॉफी नहीं, एक बड़ा एंटरटेनमेंट बिजनेस भी हैं
सबसे पहले इस बात को समझना चाहिए कि बड़े बॉलीवुड अवॉर्ड शो सिर्फ स्टार्स को सम्मानित करने के लिए रखे जाते हैं, ये बड़े मनोरंजन इवेंट भी होते हैं, जिनके पीछे प्रोडक्शन, स्पॉन्सरशिप, टेलीविजन और डिजिटल राइट्स का पूरा बिजनेस जुड़ा रहता है. एक बड़े अवॉर्ड शो को करने के लिए शानदार स्टेज, लाइटिंग, कैमरा, डांस परफॉर्मेंस, सेलिब्रिटी गेस्ट और प्रोडक्शन टीम पर काफी खर्च होता है. इसका खर्चा ए़ड, स्पॉन्सर और ब्रॉडकास्टिंग पार्टनर से होने निकाला जाता है. ऐसे में शो के आयोजकों के लिए यह भी जरूरी होता है कि शो को ज्यादा से ज्यादा लोग देखें.
यहीं से स्टार पावर की खेल शुरू होता है. अगर किसी शो में शाहरुख खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, रणबीर कपूर या आलिया भट्ट जैसे सुपरस्टार हैं तो लोग ज्यादा से ज्यादा उस शो देखेंगे. इसलिए अवॉर्ड शो की वैल्यू और बढ़ जाती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर पुरस्कार केवल TRP या स्टार पावर देखकर दिया जाता है.
कौन तय करता है कि किसे अवॉर्ड दिया जाएगा?
हर अवॉर्ड का प्रोसेस अलग-अलग हो सकता है. कुछ अवॉर्ड्स में जूरी फिल्मों और परफॉर्मेंस को देखा जाता है. जबकि कुछ पॉपुलर कैटेगरी में ऑडियंस से वोट भी करवाए जाते हैं. जूरी आधारित सिस्टम में आम तौर पर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े सीनियर्स लोग, कलाकार, डायरेक्टर, राइटर, तकनीकी विशेषज्ञ या फिल्म क्रिटिक्स शामिल हो सकते हैं. नॉमिनेशन के बाद फिल्मों और कलाकारों के काम को देखा जाता है और फिर जूरी मेंबर्स अपने मूल्यांकन के आधार पर वोट करते हैं.
दूसरी तरफ पब्लिक वोटिंग वाले अवॉर्ड में ऑडियंस की पसंद के हिसाब से चुनाव किया जाता है. यहां किसी कलाकार की एक्टिंग से ज्यादा उसकी पॉपुलैरिटी का असर दिखाई दे सकता है.यानी 'बेस्ट' और 'मोस्ट पॉपुलर' हमेशा एक ही चीज नहीं होते. किसी एक्टर का परफॉर्मेंस क्रिटिक्स को अच्छा लग सकता है जबकि ऑडियंस की कोई और पसंद हो सकता है.
क्या अवॉर्ड के लिए शो में आना जरूरी होता है?
बॉलीवुड अवॉर्ड शोज को लेकर लंबे समय से एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि क्या जो स्टार शो में शामिल होता है, उसके जीतने की गुंजाइश ज्यादा होती है? सच मानना सही नहीं होगा क्योंकि हर अवॉर्ड शो की अपनी प्रोसेस और रूल्स हो सकते हैं. लेकिन बिजनेस के नजरिए से देखें तो ऑर्गेनाइजर के लिए बड़े स्टार्स की प्रेजेंस काफी इंपोर्टेंट होती है. जरा सोचिए, किसी बड़े स्टार को अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया है, लेकिन वह इवेंट में मौजूद ही नहीं है. दूसरी तरफ कोई दूसरा पॉपुलर स्टार मंच पर मौजूद है और उसी के पास ट्रॉफी लेने का मौका है. ऑर्गेनाइजर के लिए दूसरा ऑप्शन शो को ज्यादा आकर्षक बना सकता है.यही वजह है कि 'नो शो, नो अवॉर्ड' जैसी बातें इंडस्ट्री में अक्सर बहस का मुद्दा बन जाती हैं. लेकिन इसे हर अवॉर्ड शो पर लागू होने वाला नियम मानना ठीक नहीं होगा.
स्टार्स की परफॉर्मेंस का कितना इंपोर्टेंट होती है?
अवॉर्ड शो का सबसे बड़ा अट्रैक्शन सिर्फ पुरस्कार नहीं, बल्कि लाइव परफॉर्मेंस भी होती है. बड़े स्टार्स स्टेज पर डांस करते हैं, होस्टिंग करते हैं और कई बार पूरी रात के शो में मैन कैरेक्टर बन जाते हैं. स्टार की परफॉर्मेंस के पीछे अलग से कॉन्ट्रैक्ट और फीस हो सकती है. किसी बड़े स्टार्स की पॉपुलैरिटी जितनी ज्यादा होगी, उसकी परफॉर्मेंस ऑडियंस के लिए उतनी ही खास होगी. यहीं से अवॉर्ड और परफॉर्मेंस को लेकर तरह-तरह की बातें की जाती हैं. हालांकि किसी कलाकार को परफॉर्म करने के बदले अवॉर्ड देने का दावा बिना ठोस सबूत के फैक्ट की तरह पेश करना सही नहीं है. लेकिन यह भी समझना ज्यादा जरूरी है कि एक अवॉर्ड शो में कलाकार, चैनल, स्पॉन्सर, प्रोडक्शन टीम और ऑडियंसस सभी का हित होता है. इसलिए यह सिर्फ जूरी का कमरा और एक वोटिंग वाला मामला नहीं है.
PR और लॉबिंग को लेकर क्यों उठते हैं सवाल?
फिल्म रिलीज होने के बाद उसकी पब्लिसिटी केवल थिएटर के बाहर खत्म नहीं हो जाती. PR एजेंसियां फिल्म और स्टार्स के लिए इंटरव्यू, सोशल मीडिया कैंपेन, मीडिया कवरेज और अवॉर्ड सीजन के दौरान प्रमोशन जैसी एक्टिविटीज भी संभालती हैं. जब किसी फिल्म को लगातार मीडिया में कवरेज मिलती है, उस फिल्म के कलाकरों के काम की तारीफ होती है और फिल्म को अवॉर्ड के लिए मजबूत दावेदार बताया जाता है, तो उसका नाम दर्शकों और इंडस्ट्री दोनों के बीच पॉपुलर हो जाता है. इसी वजह से अवॉर्ड सीजन के दौरान 'लॉबिंग' शब्द खूब सुनाई देता है.
पब्लिक वोटिंग में फैन वॉर भी होता है बड़ा फैक्टर
किसी कलाकार को अवॉर्ड देने के लिए जनता से वोट मांगे जाते हैं, वहां स्टोरी थोड़ी अलग हो जाती है. सोशल मीडिया के दौर में किसी बड़े स्टार के लाखों फैंस कुछ ही समय में बड़ी संख्या में वोट कर सकते हैं. इससे उनकी पॉपुलर कलाकार को फायदा मिल सकता है. जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा वोट पाने वाली सबसे अच्छी हो या वह अच्छा एक्टर हो. कई बार फैन फॉलोइंग के मुकाबले का अवॉर्ड जीता जा सकता है. इसे आप क्रिकेट के उदाहरण से समझ सकते हैं. अगर किसी खिलाड़ी के करोड़ों फैन हैं, तो उसकी पॉपुलैरिटी उसकी बड़ी ताकत होगी. लेकिन मैदान पर उसके प्रदर्शन का मूल्यांकन अलग तरह से देखा जाता है. यही अंतर फिल्म अवॉर्ड्स में भी दिखाई देता है.
एक ही शो में इतने सारे अवॉर्ड क्यों?
आजकल एक बड़े अवॉर्ड शो में कई कैटेगरी में अवॉर्ड दिए जाते हैं. Best Actor, Best Actress के अलावा Critics Award, Popular Award, Entertainer of the Year, Performance of the Year जैसी कई कैटेगरी बनाई जाती हैं. इसका एक कारण यह है कि फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले कलाकारों और फिल्मों से जुड़े बाकी लोगों को भी पहचान मिल सके. एक स्टार की पॉपुलैरिटी के आधार पर अवॉर्ड मिल सकता है, जबकि दूसरे को क्रिटिक्स की पसंद का अवॉर्ड दिया जा सकता है.
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सऊदी अरब में फंसे शख्स की वतन वापसी के लिए CM धामी की पहल, विदेश मंत्री को लिखा पत्र
Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य में विकास कार्यों के साथ लोगों की सुरक्षा के लिए भी लगातार काम कर रहे हैं. रूस में फंसे दो भाइयों की स्वदेशी वापसी के बाद अब सीएम धामी ने सऊदी अरब में फंसे एक युवक की वापसी की कोशिशें तेज कर दी हैं. जिसके लिए सीएम धामी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने विदेश मंत्री से उत्तराखंड के युवक की सकुशल वापसी में मदद की मांग की है.
सऊदी अरब में फंसे हैं टिहरी गढ़वाल के इंद्रमणि नौटियाल
बता दें कि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के रहने वाले इंद्रमणि नौटियाल पिछले कई सालों से सऊदी अरब में फंसे हुए हैं. उनके परिवार से सीएम धामी से इंद्रमणि की सकुशल वापसी में मदद की गुहार लगाई थी. इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोशिशें शुरू कर दी और अब विदेश मंत्री को पत्र लिखकर इंद्रमणि नौटियाल की वतन वापसी में मदद करने का अनुरोध किया है. सीएम धामी ने अपने पत्र में इंद्रमणि नौटियाल की सकुशल स्वदेश वापसी के लिए भारत सरकार के स्तर से तत्काल आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया है. सीएम ने इस मामले में इंद्रमणि नौटियाल को आवश्यक न्यायिक एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा उन्हें बंधक अवस्था से मुक्त कराकर सकुशल भारत वापस लाने के लिए संबंधित स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप करने का भी आग्रह किया है.
2018 में सऊदी अरब गए थे इंद्रमणि
बता दें कि टिहरी गढ़वाल जनपद के जौनपुर ब्लॉक के गौरसाड़ा गांव के रहने वाले देवी राम नौटियाल का बेटा इंद्रमणि नौटियाल 2018 में रोजगार के लिए सऊदी अरब गया था. जहां इंद्रमणि नौटियाल पिकक रोड्स एंड कॉन्ट्रेक्टिंग कंपनी, रियाद (सऊदी अरब) में ट्रक चालक के रूप में कार्यरत थे. 2018 में जब वे ड्यूटी पर थे तभी एक गंभीर सड़क हादसा हो गया. इसके बाद सऊदी अरब की न्यायिक प्रक्रिया के तहत इंद्रमणि नौटियाल को एक वर्ष के कारावास तथा ट्रक बीमा एवं पंजीकरण संबंधी कमी के चलते कंपनी मालिक पर 9 लाख सऊदी रियाल का जुर्माना लगा था. जुर्माने की भारतीय मुद्रा में अनुमानित राशि लगभग 2.29 करोड़ रुपये बताई गई है.
कंपनी मालिक ने नहीं किया जुर्माने की राशि का भुगतान
इस हादसे के गई साल बीत जाने के बाद भी कंपनी मालिक ने जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं किया. जिसके चलते नौटियाल को कथित रूप से बंधक जैसी स्थिति में रखकर जुर्माना अदा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. उनकी पत्नी एवं पुत्री द्वारा अपने स्तर से नौटियाल की स्वदेश वापसी के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए, लेकिन अपेक्षित सहायता नहीं मिली. इसके कारण परिवार मानसिक एवं आर्थिक रूप से अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
सीएम धामी ने विदेश मंत्रालय से मानवीय हस्तक्षेप का किया अनुरोध
परिवार की गुहार पर सीएम धामी ने केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को भेजे पत्र में पूरे प्रकरण का संदर्भ देते हुए इंद्रमणि नौटियाल को बंधक अवस्था से मुक्त कराने, आवश्यक न्यायिक एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा उनकी सकुशल स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराने के लिए तत्काल संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया है.
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इसके साथ ही सीएम ने कहा है कि विदेश में कठिन परिस्थितियों में फंसे किसी भी उत्तराखंडी नागरिक की सहायता के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास करेगी. उन्होंने केंद्र सरकार एवं विदेश मंत्रालय से प्रकरण में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावी हस्तक्षेप की अपेक्षा की है, जिससे इंद्रमणि नौटियाल को राहत मिल सके और उनका परिवार उनकी सकुशल स्वदेश वापसी की उम्मीद पूरी कर सके. बता दें कि हाल में रूस में फंसे दो भाईयों की सीएम धामी की मदद से स्वदेश वापस हो सकी.
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