कांग्रेस ने ‘मेलोडी’ बांटकर साधा मोदी सरकार पर निशाना, मनोज शुक्ला बोले – ‘मजदूर हो या छात्र, पेट्रोल पंपों के चक्कर काट रहे’
हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की #Melody वाली तस्वीरें खूब वायरल हुईं थी, जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा था। लेकिन एक तरफ जहां देश-विदेश में इस #Melody के चर्चे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश की राजधानी भोपाल में आम जनता पेट्रोल-डीजल की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है। इन दिनों दुगनी गर्मी का मौसम चल रहा है; एक तो मई की चिलचिलाती धूप, उसपर ईंधन की किल्लत ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में नेताओं को पल भर का चैन कहां? ज़ाहिर है, जनता की परेशानी पर भी सवाल उठेंगे और सरकार की प्राथमिकताएं भी सवालों के घेरे में आएंगी।
वहीं जब भोपाल के कई पेट्रोल पंप सूखे पड़े हैं और सड़कों पर वाहनों की कतारें लंबी होती जा रही हैं, ऐसे में कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला और उनके कार्यकर्ताओं ने एक अनोखे विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना। दरअसल उनकी यह पहल सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि सरकार की कथित संवेदनहीनता पर एक करारा तंज थी। शहर के बंद पड़े पेट्रोल पंपों के बाहर, जहां घंटों से लोग ईंधन का इंतज़ार कर रहे थे, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें ‘मेलोडी टॉफी’ बांटी। यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कह रहा था। एक तरफ लोग पसीने में लथपथ, परेशान और दूसरी तरफ उन्हें ‘मेलोडी’ थमाई जा रही थी।
“मोदी है तो मुमकिन है” के नारे गूंजे
दरअसल इस दौरान लाउडस्पीकर पर “मोदी है तो मुमकिन है” और “मेलोडी खाओ सब भूल जाओ” जैसे व्यंग्यात्मक गाने गूंज रहे थे। कहने को तो ये महज़ गाने थे, लेकिन इनके ज़रिए केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर तीखा प्रहार किया जा रहा था। मनोज शुक्ला ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आज देश का आम नागरिक, चाहे वह नौकरीपेशा हो, मजदूर हो या छात्र, पेट्रोल पंपों के चक्कर काट रहा है। सप्लाई चेन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, लेकिन हमारे देश के प्रधानमंत्री को जनता की इस तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है। उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री विदेश दौरों में व्यस्त हैं और सोशल मीडिया पर ‘मेलोडी टॉफी’ दिखाकर अपनी रील कूटनीति चमका रहे हैं। शुक्ला ने इस रवैये को जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया।
मनोज शुक्ला ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
वहीं कांग्रेस पदाधिकारियों ने इस प्रदर्शन के माध्यम से ‘मेलोडी’ राजनीति के खोखलेपन को उजागर करने की कोशिश की। उनका कहना था कि पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़ और बंद पड़े नोजल इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि सरकार कानून-व्यवस्था और सप्लाई चेन संभालने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। जब जनता को पेट्रोल की सख्त जरूरत है, तब यह ‘रील वाली सरकार’ उन्हें सिर्फ जुमले और ‘मेलोडी’ थमा रही है। इसीलिए आज प्रतीकात्मक रूप से जनता को टॉफी बांटकर इस सरकार का असली चेहरा बेनकाब किया गया।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना आक्रोश दर्ज कराया। इस अवसर पर अमित खत्री, पार्षद दानिश शब्बीर ख़ान, युवराज सिंह राय, महेश मेहरा, तारिक अली, विजेंद्र शुक्ला, दीपक दीवान, प्रिंस नवांगे, उस्मान अली, बाबर ख़ान, राहुल सेन, अलीम उद्दीन बिल्ले, अमजद लाला, शानू ख़ान, संदीप सरवैया जैसे कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह प्रदर्शन सिर्फ पेट्रोल की कमी के खिलाफ नहीं था, बल्कि उन प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का एक तरीका था जो एक तरफ जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसा रही हैं, और दूसरी तरफ ‘रील कूटनीति’ में व्यस्त दिख रही हैं।
एक बैंक और 2 फाइनेंस कंपनियों ने तोड़े नियम, RBI ने दिखाई सख्ती, लगाया भारी जुर्माना
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है। प्राइवेट सेक्टर के सिटी यूनियन बैंक पर 10.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा दो नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों पर भी पेनल्टी लगाई गई है। इस कार्रवाई की जानकारी सेंट्रल बैंक ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in/ पर दी है।
31 मार्च 2025 तक तक आरबीआई ने बैंक और दोनों कंपनियों के वित्तीय स्थिति को चेक करने के लिए एक संवैधानिक निरीक्षण किया था। इस दौरान दिशा निर्देशों में खामियों का खुलासा हुआ। इसके बाद बैंक और एनबीएफसी को कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया। इस पर मिली प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों पर विचार करने के बाद आप सही पाए गए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
बैंक ने तोड़े ये नियम
सिटी यूनियन बैंक में 25,000 रुपये तक के कुछ कृषि प्राथमिकता क्षेत्र के लोन पर लोन संबंधित शुल्क लगाए। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के स्तर का डेटा सूचना कंपनियों को रिपोर्ट भी नहीं किया। इसलिए आरबीआई ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी (रेगुलेशन) एक्ट 2005 के विभिन्न प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाने का फैसला दिया। हालांकि कार्रवाई का असर बैंक और ग्राहकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा।
PR315208CBAAA9C1C4AA4B0296B70551472A1इन दो कंपनियों पर लगी पेनल्टी, जानें वजह
नेवा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर 2.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस कंपनी ने निदेशकों की नियुक्ति करते समय आरबीआई से पहले लिखित अनुमति नहीं ली। जिसके परिणाम स्वरूप कुछ को छोड़कर 30% से अधिक निदेशकों में बदलाव हुआ। जिसका सीधा असर मैनेजमेंट पर पड़ा। मिंटीफी फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कंपनी ने ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपलोड नहीं किया। आरबीआई एक्ट 1934 के विभिन्न प्रावधानों के तहत इस कंपनियों पर पेनल्टी लगाई गई है। इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।
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