कहीं आप भी तो नहीं खा रहे कार्बाइड से पका आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान
आम के सीजन की शुरुआत के साथ बाजार में पीले आम दिखने लगे हैं, लेकिन इन्हें खरीदते समय सावधानी जरूरी है. डॉक्टरों के मुताबिक कई जगह आम को जल्दी पकाने के लिए खतरनाक केमिकल, खासकर कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे पेट दर्द, उल्टी और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, प्राकृतिक रूप से पके आम में हल्का हरा और पीला रंग होता है, जबकि केमिकल से पके आम पूरी तरह पीले और चमकदार दिखते हैं. ऐसे आम से हल्की केमिकल जैसी गंध भी आ सकती है. आम खरीदने के बाद उसे पानी में डालकर जांच करें. अगर आम डूब जाए तो वह प्राकृतिक रूप से पका माना जाता है, जबकि तैरने वाला आम केमिकल से पका हो सकता है.
कांग्रेस ने ‘मेलोडी’ बांटकर साधा मोदी सरकार पर निशाना, मनोज शुक्ला बोले – ‘मजदूर हो या छात्र, पेट्रोल पंपों के चक्कर काट रहे’
हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की #Melody वाली तस्वीरें खूब वायरल हुईं थी, जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा था। लेकिन एक तरफ जहां देश-विदेश में इस #Melody के चर्चे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश की राजधानी भोपाल में आम जनता पेट्रोल-डीजल की बूंद-बूंद के लिए तरस रही है। इन दिनों दुगनी गर्मी का मौसम चल रहा है; एक तो मई की चिलचिलाती धूप, उसपर ईंधन की किल्लत ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में नेताओं को पल भर का चैन कहां? ज़ाहिर है, जनता की परेशानी पर भी सवाल उठेंगे और सरकार की प्राथमिकताएं भी सवालों के घेरे में आएंगी।
वहीं जब भोपाल के कई पेट्रोल पंप सूखे पड़े हैं और सड़कों पर वाहनों की कतारें लंबी होती जा रही हैं, ऐसे में कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला और उनके कार्यकर्ताओं ने एक अनोखे विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना। दरअसल उनकी यह पहल सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि सरकार की कथित संवेदनहीनता पर एक करारा तंज थी। शहर के बंद पड़े पेट्रोल पंपों के बाहर, जहां घंटों से लोग ईंधन का इंतज़ार कर रहे थे, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें ‘मेलोडी टॉफी’ बांटी। यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कह रहा था। एक तरफ लोग पसीने में लथपथ, परेशान और दूसरी तरफ उन्हें ‘मेलोडी’ थमाई जा रही थी।
“मोदी है तो मुमकिन है” के नारे गूंजे
दरअसल इस दौरान लाउडस्पीकर पर “मोदी है तो मुमकिन है” और “मेलोडी खाओ सब भूल जाओ” जैसे व्यंग्यात्मक गाने गूंज रहे थे। कहने को तो ये महज़ गाने थे, लेकिन इनके ज़रिए केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर तीखा प्रहार किया जा रहा था। मनोज शुक्ला ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आज देश का आम नागरिक, चाहे वह नौकरीपेशा हो, मजदूर हो या छात्र, पेट्रोल पंपों के चक्कर काट रहा है। सप्लाई चेन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है, लेकिन हमारे देश के प्रधानमंत्री को जनता की इस तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है। उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री विदेश दौरों में व्यस्त हैं और सोशल मीडिया पर ‘मेलोडी टॉफी’ दिखाकर अपनी रील कूटनीति चमका रहे हैं। शुक्ला ने इस रवैये को जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया।
मनोज शुक्ला ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
वहीं कांग्रेस पदाधिकारियों ने इस प्रदर्शन के माध्यम से ‘मेलोडी’ राजनीति के खोखलेपन को उजागर करने की कोशिश की। उनका कहना था कि पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़ और बंद पड़े नोजल इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि सरकार कानून-व्यवस्था और सप्लाई चेन संभालने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। जब जनता को पेट्रोल की सख्त जरूरत है, तब यह ‘रील वाली सरकार’ उन्हें सिर्फ जुमले और ‘मेलोडी’ थमा रही है। इसीलिए आज प्रतीकात्मक रूप से जनता को टॉफी बांटकर इस सरकार का असली चेहरा बेनकाब किया गया।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना आक्रोश दर्ज कराया। इस अवसर पर अमित खत्री, पार्षद दानिश शब्बीर ख़ान, युवराज सिंह राय, महेश मेहरा, तारिक अली, विजेंद्र शुक्ला, दीपक दीवान, प्रिंस नवांगे, उस्मान अली, बाबर ख़ान, राहुल सेन, अलीम उद्दीन बिल्ले, अमजद लाला, शानू ख़ान, संदीप सरवैया जैसे कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह प्रदर्शन सिर्फ पेट्रोल की कमी के खिलाफ नहीं था, बल्कि उन प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का एक तरीका था जो एक तरफ जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसा रही हैं, और दूसरी तरफ ‘रील कूटनीति’ में व्यस्त दिख रही हैं।
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