भारत ने विकासशील देशों के वैश्विक व्यापार प्रणाली में एकीकरण के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की
नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। भारत ने विकासशील देशों और अत्यंत पिछड़े देशों (एलडीसी) के विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सदस्यता का लगातार समर्थन किया है। इसी कड़ी में एथियोपिया के डब्ल्यूटीओ में शामिल होने के संदर्भ में जेनेवा में द्विपक्षीय प्रवेश प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत की ओर से यह प्रोटोकॉल डब्ल्यूटीओ में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि डॉ. सेंटिल पंडियन सी. और एथियोपिया की ओर से राजदूत और जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में स्थायी प्रतिनिधि त्सेगाब केबेब्यू डाका ने हस्ताक्षर किए।
मंत्रालय ने कहा कि हस्ताक्षर के बाद, प्रोटोकॉल और इसके परिशिष्टों को औपचारिक रूप से डब्ल्यूटीओ सचिवालय में सौंपा और जमा किया गया।
मंत्रालय ने बताया कि एथियोपिया जब डब्ल्यूटीओ प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से आर्थिक और व्यापार नीति सुधारों को आगे बढ़ाता है, तो भारत और एथियोपिया के बीच व्यापार, निवेश और व्यावसायिक सहयोग के लिए नए अवसर उभरने की संभावना है।
यह समझौता वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मार्गदर्शन में तेजी से निष्पादित किया गया।
डब्ल्यूटीओ प्रवेश प्रक्रिया में घरेलू आर्थिक और व्यापार नीतियों को डब्ल्यूटीओ नियमों के साथ संरेखित करना और मौजूदा सदस्यों के साथ बाजार पहुंच प्रतिबद्धताओं पर बातचीत करना आवश्यक होता है।
एथियोपिया वर्तमान में अपने प्रवेश प्रक्रिया के उन्नत चरण में है, और इसकी कार्यकारी समिति ने 22-23 अप्रैल 2026 को सातवीं बैठक की थी।
भारत मानता है कि विकासशील देशों का बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में पूर्ण समेकन एक अधिक समावेशी और संतुलित वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए आवश्यक है।
भारत, एथियोपिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और भारतीय कंपनियां वहां की प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर 2025 में एथियोपिया दौरे के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था।
--आईएएनएस
डीबीपी
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रवीना टंडन की पंजाब के CM से भावुक अपील:आवारा कुत्तों को मारने के आदेश पर कहा- इंसानियत का ध्यान रखें, दूसरे उपाय भी हैं
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आवारा कुत्तों के काटने के मामले पर आदेश दिया है कि खतरनाक कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारा जाए। इसके बाद 22 मई से पंजाब में आवारा कुत्तों को पकड़ने की मुहिम शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से इसकी जानकारी दी है। अब रवीना टंडन ने उनसे इंसानियत का ध्यान रखते हुए दूसरे रास्ते चुनने की अपील की है। रवीना ने कहा है कि बेजुबानों के साथ कैसा सलूक किया जाता है, वही बताता है कि हम कैसे इंसान हैं। रवीना टंडन ने शनिवार को आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, “माननीय मुख्यमंत्री भगवंत मान जी, आवारा जानवरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर पूरे देश में चर्चा हो रही है। लोगों की सुरक्षा बहुत जरूरी है, लेकिन उम्मीद है कि इस फैसले को लागू करते समय इंसानियत और संतुलन का भी ध्यान रखा जाएगा। नसबंदी, टीकाकरण, अच्छे शेल्टर और सही तरीके से पुनर्वास जैसे उपाय लोगों और जानवरों, दोनों की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं।” आगे रवीना ने लिखा है, “मुझे पूरा विश्वास है कि प्रशासन, पशु कल्याण संगठनों और विशेषज्ञों के सहयोग से पंजाब इस संवेदनशील मुद्दे को जिम्मेदारी और इंसानियत के साथ संभालने की मिसाल बन सकता है। हम बेजुबान जानवरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, वही आखिरकार बताता है कि हम एक समाज के रूप में कैसे इंसान हैं।” क्या है पूरा मामला? देश में आवारा कुत्तों के काटने के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिसका असर सरकारी खजाने पर भी पड़ रहा है। कई बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर आवारा कुत्तों की चपेट में आते रहते हैं। इस मामले पर नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और उन्हें शेल्टर हाउस भेजे जाने का आदेश दिया था। कई एनजीओ सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की। अब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक और आदेश दिया और कहा कि जानलेवा कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि खतरनाक या रेबीज से संक्रमित आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है, लोगों की जान की हिफाजत जरूरी है और गरिमा के साथ जीने में कुत्तों के खतरे से मुक्त होकर रहने का अधिकार भी शामिल है। 19 मई को दिए गए इस मामले पर आखिरी फैसले के साथ ही कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाएं खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी पर नवंबर 2025 में दिए गए निर्देश ही लागू होंगे। जो अफसर इनका पालन न करें, उन पर अवमानना का केस चले। इसके बाद से सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जमकर आलोचना हो रही है। नवजोत सिंह सिद्धू, सोनम बाजवा समेत कई सेलेब्स इसके खिलाफ बयान दे रहे हैं।
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