गर्मियों का कहर पूरे भारत में देखने को मिल रहा है। जैसे-जैसे पारा बढ़ रहा है, वैसे ही लोग अपने घरों में ठंडा पानी रखने के लिए नए-नए देसी और सस्ते तरीके को फॉलो कर रहे हैं। गर्मी के सितम से बचने के लिए आजकल इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रही है।
सोशल मीडिया पर Viral Matka Hack for Cooler वाला जुगाड़ तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी कूलर की पामी वाली टंकी के अंदर मिट्टी का एक छोटा-सा मटका या बर्तन रखते हुए नजर आ रहे हैं। बता दें कि, वीडियो बनाने वाले इन्फ्लुएंसर्स का दावा है कि इस साधरण सी ट्रिक से कूलर एकदम एयर कंडीशनर (AC) जैसी ठंडी हवा देंगी। क्या यह सच है कि मिट्टी के मटके से कूलर का पानी और भी ज्यादा कूल हो जाता है। आइए आपको इस बारे में बताते हैं।
आखिर क्यों किया जा रहा है कूलर में मटके का इस्तेमाल?
गर्मियों के दौरान ज्यादातर लोग मटके का ठंडा पानी पानी पसंद करते हैं। पहले यह सिर्फ गांवों में ज्यादा इस्तेमाल होता था, लेकिन अब शहरों में भी लोग फ्रिज की जगह मटके का पानी पसंद करने लगे हैं। क्योंकि यह प्राकृतिक रुप से पानी को ठंडा करता है।
गौरतलब है कि मटके की मिट्टी में बहुत-बहुत छोटे-छोटे और अदृश्य छेद होते हैं। इन छेदों से थोड़ा-थोड़ा पानी बाहर की सतह तक पहुंचता है और हवा के संपर्क में आकर धीरे-धीरे भाप बनकर उड़ जाता है। इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहा जाता है। इसी कारण से मटके के अंदर का पानी अपने आप ठंडा रहता है।
इस ट्रिक की साइंस को समझकर लोगों ने कूलर की टंकी में छोटा-सा मटका रख दिया जाए, तो क्या इससे वहां भी पानी ज्यादा ठंडा रहेगा। जब कूलर का वही पानी उसके पैड्स पर आएगा, तो हवा पहले से भी ज्याद ठंडी हो जाएगी। इसी कारण से यह जुगाड़ सोशल मीडिया पर वायरल है।
क्या सच में कूलिंग बढ़ जाती है?
इस ट्रिक को लेकर एक्सपर्ट ने बताया है कि यह जुगाड़ काफी असरदार हो सकता है और पानी में थोड़ी बहुत ठंडक बढ़ सकती है, लेकिन इससे कूलिंग में कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। न ही यह कोई मैजिक ट्रिक है।
गौरतलब है कि कूलर से आने वाली ठंडी हवा इस बात पर निर्भर करती है कि कमरे में एयर फ्लो कैसा है और पानी का वाष्पीकरण कितनी तेजी से हो रहा है। मटका सिर्फ अपनी क्षमता भर के पानी को थोड़ा ठंडा रख सकता है, हालांकि पूरे कूलर की कार्यक्षमता को बदलकर उसको एसी जैसा बना देना नामुमकिन है।
कूलर खराब होने का खतरा
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के बहकावे में आकर अपनी टंकी में कोई बड़ा या भारी मटका रख देते हैं, तो वह टंकी के अंदर पानी के नेचुरल फ्लो को भी रोक सकता है। इससे पानी खींचने वाले पंप पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है, जिससे पंप समय से पहले फुंक या खराब भी हो सकता है। इसके साथ ही कूलर की काम करने की क्षमता भी कम हो सकती है।
बीमारी और गंदगी का डर
अगर मिट्टी का घड़ा लंबे समय तक कूलर के दूषित पानी में पड़ा रहता है और उसकी समय-समय पर सफाई नहीं होती, तो उसके छोटे-छोटे छिद्रों में गंदगी, फफूंदी और हानिकारक जीवाणु पनपने लगते हैं। बाद में यही दूषित कण कूलर की हवा के साथ कमरे में फैल सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
मटके के ट्रिक के चक्कर में न पड़ें, इन ट्रिक्स को बढ़ाएं कूलर की कूलिंग
अगर आप सच में कूलर की हवा को ठंडी बनाना चाहते हैं, तो इन तरीकों को जरुर अपनाएं-
कमरे का सही वेंटिलेशन
गौरतलब है कि कूलर कभी पूरी तरह बंद कमरे में काम नहीं करता। कूलर की बेहतर परफॉर्मेंस के लिए कमरे में हवा बाहर निकलने का रास्ता होना बेहद जरूरी है। इसलिए जिस कमरे में कूलर चल रहा हो, उसकी खिड़की या दरवाजा खुला रहे, जिससे बाहर की ताजी हवा अंदर आए और अंदर की उमस बाहर जा चुके।
कूलर की पैड्स की नियमित रुप सफाई करें
कूलर के किनारे लगे हनीकॉम्ब या घास के पैड्स यदि गंदे या पुराने हो जाए, तो उन पर नमक और धूल जम जाती है, जिससे हवा का फ्लो रुक ही जाता है। इन्हें समय-समय पर साफ रखने के लिए हमेशा क्लीन करें और जरुरत होने पर नए पैड्स लगवाएं।
साफ और पर्याप्त पानी
कूलर की टंकी में हमेशा स्वच्छ और पर्याप्त पानी बनाए रखना चाहिए। यदि पानी लंबे समय तक गंदा पड़ा रहे, तो कूलर से दुर्गंध आने लगती है और उसके कूलिंग पैड्स में गंदगी जमने के कारण हवा की ठंडक भी प्रभावित होने लगती है।
बर्फ का इस्तेमाल
जब पारा अधिक हो जाए, तो उस दिन गर्मी खूब लगती हैं। ऐसे में आप मटका रखने के लिए बजाय आप कूलर के पानी में कुछ बर्फ के टुकड़े (Ice Cubes) डाल सकते हैं। इससे कुछ देर के लिए पानी काफी ठंडा हो जाता है और हवा में तुरंत ज्यादा ठंडक महसूस होने लगते हैं।
टंकी और पंखे की रेगुलर क्लीनिंग
कम से कम हफ्ते में एक बार कूलर का पानी की टंकी को साफ करें। इसके साथ ही पंखे की ब्लेड्स पर जमी धूल को साफ करते रहते हैं, बैक्टीरिया और धूल जमा होने पर हवा की स्पीड कम हो जाती है।
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मेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बीच, वाशिंगटन से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश हुआ है। न्यूयॉर्क पोस्ट (New York Post) की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे बड़ी बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की एक भयावह साजिश रची गई थी। इवांका, जो ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनकी वरिष्ठ सलाहकार भी रह चुकी हैं, उन्हें ईरान के शक्तिशाली संगठन 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से प्रशिक्षित एक खतरनाक आतंकी ने अपना मुख्य निशाना बनाया था। मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी, जिसे हाल ही में 15 मई को तुर्की में गिरफ़्तारी के बाद अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था, वह अमेरिकी हमलों में अपने गुरु की हत्या का बदला लेना चाहता था।
32 वर्षीय इराकी नागरिक ने ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान, 2020 में एक ड्रोन हमले में ईरानी सैन्य प्रमुख कासिम सुलेमानी को मार गिराने के जवाब में इवांका को मारने की "कसम" खाई थी। सुलेमानी, जो एक रहस्यमयी हस्ती थे और IRGC की कुद्स फ़ोर्स के प्रमुख थे, 3 जनवरी, 2020 को बगदाद हवाई अड्डे के पास एक ड्रोन हमले में मारे गए थे।
इवांका ट्रंप की हत्या की साज़िश
अल-सादी की कसम कोई कोरा दिखावा नहीं थी। न्यूयॉर्क पोस्ट के सूत्रों के अनुसार, गिरफ़्तारी के समय उसके पास इवांका के फ़्लोरिडा स्थित घर का एक ब्लूप्रिंट मिला था। 2021 में, अल-सादी ने X पर एक नक्शे की तस्वीर भी पोस्ट की थी, जिसमें फ़्लोरिडा का वह इलाका दिखाया गया था जहाँ इवांका और उनके पति, जेरेड कुशनर का $24 मिलियन का घर है। इस तस्वीर के साथ उसने एक खौफ़नाक धमकी भी पोस्ट की थी: "बदला लेना बस समय की बात है"। मूल रूप से अरबी में पोस्ट किए गए इस संदेश में लिखा था मैं अमेरिकियों से कहता हूँ, इस तस्वीर को देखो और जान लो कि न तो तुम्हारे महल और न ही सीक्रेट सर्विस तुम्हारी रक्षा कर पाएगी। हम अभी निगरानी और विश्लेषण के चरण में हैं।
दरअसल, सुलेमानी की हत्या के बाद, अल-सादी, जो उन्हें अपना गुरु मानता था, ने अपने साथियों से कहा था कि वह "ट्रंप के घर को जलाकर राख कर देगा"। वॉशिंगटन में इराकी दूतावास के एक पूर्व सैन्य अधिकारी, एंटिफाध क़ानबर ने 'द पोस्ट' को बताया, "अल-सादी लोगों से घूम-घूमकर कह रहा था, 'हमें इवांका को मारना होगा, ताकि हम ट्रंप के घर को उसी तरह जला सकें, जिस तरह उसने हमारे घर को जलाया था।'"
हालांकि, यह पता नहीं चल पाया है कि अल-सादी ने इवांका को निशाना बनाने की योजना क्यों बनाई थी। गौरतलब है कि ट्रंप की 44 वर्षीय सबसे बड़ी बेटी ने, रियल एस्टेट टाइकून कुशनर से शादी करने से पहले, 2009 में ऑर्थोडॉक्स यहूदी धर्म अपना लिया था। इस दंपति के तीन बच्चे हैं। हाल ही में, ट्रंप 2.0 प्रशासन में विशेष दूत के तौर पर काम कर रहे कुशनर, ईरान के साथ शांति वार्ता में शामिल रहे हैं।
कौन है दाऊद अल-सादी?
इस चौंकाने वाले खुलासे ने अल-सादी और उसके आपराधिक इतिहास को सुर्खियों में ला दिया है। लंबे समय से अमेरिका की नज़र में रहा अल-सादी, अमेरिका और यहूदी ठिकानों पर हुए कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है; इनमें इस साल मार्च में एम्स्टर्डम स्थित 'बैंक ऑफ़ न्यूयॉर्क मेलन' पर हुआ बम धमाका भी शामिल है।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, अल-सादी कथित तौर पर अप्रैल में लंदन में दो यहूदियों पर चाकू से किए गए हमले और इसी साल टोरंटो स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की इमारत पर हुई गोलीबारी की घटना में भी शामिल था। अल-सादी न केवल ईरान के IRGC से जुड़ा था, बल्कि वह 'कताइब हिज़्बुल्लाह' नामक एक इराकी शिया अर्धसैनिक समूह का भी सक्रिय सदस्य था; इस समूह को तेहरान का समर्थन प्राप्त है। अमेरिका ने 'कताइब हिज़्बुल्लाह' को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है।
तो, आखिर अल-सादी सुलेमानी के इतना करीब कैसे आ गया कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी की हत्या की साज़िश रचने तक की हिम्मत कर ली? यह समझने के लिए हमें उसके इतिहास और बचपन पर नज़र डालनी होगी। अल-सादी का जन्म बगदाद में हुआ था और उसकी परवरिश मुख्य रूप से उसकी इराकी माँ ने की थी। उसके पिता, अहमद काज़ेमी, ईरान की सेना में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर कार्यरत थे।
बहुत कम उम्र में ही उसे प्रशिक्षण के लिए तेहरान भेज दिया गया, जहाँ उसने IRGC के साथ ट्रेनिंग ली; यह संगठन सीधे तौर पर 'सर्वोच्च नेता' (Supreme Leader) के प्रति जवाबदेह होता है और ईरानी सेना से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। हालांकि, वर्ष 2006 में अल-सादी के पिता के निधन के साथ ही उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
इसके बाद, क़ानबर के अनुसार, सुलेमानी ही अल-सादी का सबसे बड़ा सहारा और मार्गदर्शक बन गया। आखिरकार वे एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए, और अल-सादी उन्हें पिता तुल्य मानने लगे। अमेरिकी हमलों में सुलेमानी की अचानक हुई मौत से अल-सादी पूरी तरह हिल गए, और तभी इवांका की हत्या की साज़िश ने आकार लेना शुरू कर दिया।
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