Chandra Gochar 2026: आज रात सिंह राशि में प्रवेश करेंगे चंद्रमा, इन 3 राशियों के लिए बन सकते हैं शुभ योग
Chandra Gochar 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा आज 22 मई की देर रात कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और सूर्य-चंद्रमा के बीच मित्रता का संबंध माना जाता है। ऐसे में यह गोचर कुछ राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। खासतौर पर करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में लाभ के संकेत मिल रहे हैं। आइए जानते हैं वो कौन सी राशियां हैं, जिन पर चंद्र गोचर का शुभ प्रभाव पड़ सकता है?
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर अच्छा साबित हो सकता है। चंद्रमा आपके सुख और घरेलू जीवन से जुड़े भाव में संचरण करेंगे, जिससे परिवार के साथ बेहतर समय बिताने का अवसर मिल सकता है। माता-पिता का सहयोग मिलेगा और घर का वातावरण शांत रहने की संभावना है। आर्थिक मामलों में भी राहत मिल सकती है। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने के संकेत हैं। कुछ लोग इस अवधि में वाहन या संपत्ति खरीदने की योजना बना सकते हैं। छात्रों के लिए भी यह समय अच्छा माना जा रहा है और शिक्षा से जुड़े प्रयासों में सफलता मिलने की संभावना है।
सिंह राशि
चंद्रमा का गोचर सिंह राशि के प्रथम भाव में होगा, जिससे आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि हो सकती है। मानसिक रूप से आप खुद को अधिक मजबूत महसूस करेंगे और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर हो सकती है। करियर में नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिलने के संकेत हैं। कारोबार से जुड़े लोगों की रुकी हुई योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार आने की संभावना है और आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं। पुराने कर्ज या उधार को चुकाने में भी सफलता मिल सकती है।
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए चंद्रमा का यह गोचर लाभकारी माना जा रहा है। यह गोचर आपके लाभ भाव को सक्रिय करेगा, जिससे आय और लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं। निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है, खासकर शेयर बाजार या अन्य वित्तीय योजनाओं से जुड़े लोगों को फायदा हो सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने लगेंगे, जिससे मन प्रसन्न रहेगा। सामाजिक और पेशेवर क्षेत्र में भी सकारात्मक परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
क्रीमी लेयर पर SC की तल्ख टिप्पणी: 'यदि माता-पिता दोनों IAS हैं, तो बच्चों को आरक्षण क्यों मिलना चाहिए?'
भारत में आरक्षण की व्यवस्था और पिछड़े वर्गों के भीतर 'क्रीमी लेयर' की सीमा को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ी टिप्पणी की है। शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि जो परिवार शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में शीर्ष पायदान पर पहुंच चुके हैं, क्या उनकी अगली पीढ़ी को भी आरक्षण का लाभ मिलना न्यायसंगत है?
कोर्ट का यह कड़ा ऑब्जर्वेशन आने वाले समय में देश की आरक्षण नीतियों और क्रीमी लेयर के कानूनी ढांचे में एक बड़े बदलाव का आधार बन सकता है।
'दोनों माता-पिता IAS हैं, तो फिर बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों?'
यह महत्वपूर्ण सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ के समक्ष चल रही थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सरकारी सेवा और प्रशासनिक पदों पर बैठे परिवारों का उदाहरण देते हुए बेहद सीधा और तीखा सवाल दागा। उन्होंने पूछा, "यदि किसी परिवार में माता और पिता दोनों ही क्लास-वन यानी आईएएस अधिकारी हैं और समाज में बेहद प्रतिष्ठित व मजबूत स्थिति में हैं, तो फिर उनके बच्चों को पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण का लाभ आगे क्यों मिलना चाहिए? ऐसे सक्षम लोगों को खुद ही इस कोटे से बाहर आ जाना चाहिए।"
संतुलन जरूरी: अगली पीढ़ी भी आरक्षण मांगेगी तो समाज कभी बाहर नहीं निकल पाएगा
पीठ ने आरक्षण के मूल सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि इस पूरी व्यवस्था में एक तार्किक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन अपनी जगह है, लेकिन जब कोई परिवार आरक्षण का लाभ लेकर एक निश्चित प्रशासनिक और आर्थिक स्तर पर पहुंच जाता है, तो वहाँ 'सामाजिक गतिशीलता' साफ दिखाई देने लगती है।
जस्टिस नागरत्ना ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए टिप्पणी की, "अगर सशक्त हो चुकी पीढ़ियों के बच्चे भी लगातार आरक्षण की मांग करते रहेंगे, तो समाज का वह शोषित तबका जो आज भी सबसे पीछे खड़ा है, कभी आगे नहीं आ पाएगा और देश इस चक्रव्यूह से कभी बाहर नहीं निकल सकेगा।"
सामाजिक बनाम आर्थिक पिछड़ापन: EWS और क्रीमी लेयर के अंतर पर चर्चा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शशांक रतनू ने भी अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु रखे। उन्होंने दलील दी कि मौजूदा व्यवस्था में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी के कर्मचारियों के बच्चों को क्रीमी लेयर के नियमों के तहत सामाजिक दर्जे के आधार पर बाहर किया जाता है, न कि केवल उनकी सैलरी की वजह से।
इस पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए एडवोकेट रतनू ने कोर्ट से कहा कि इस मुद्दे पर गहराई से विचार करने की जरूरत है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और ओबीसी (OBC) की क्रीमी लेयर के बीच एक साफ अंतर होना चाहिए।
इस पर कोर्ट ने भी सहमति जताते हुए माना कि ईडब्ल्यूएस में केवल आर्थिक पिछड़ापन होता है, जबकि क्रीमी लेयर का मुद्दा सामाजिक और प्रशासनिक सशक्तिकरण से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने सरकार को ऐसे समृद्ध लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के आदेशों को कड़ाई से लागू करने पर विचार करने को कहा है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi




















