प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जो लगभग साढ़े चार घंटे तक चली। इस बैठक में सरकार की ओर से प्रशासनिक सुधार, जनसुविधा, आर्थिक मजबूती और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा की अगुवाई वाली समिति की सिफारिशों की भी समीक्षा की गई, जिनका उद्देश्य देश में अनावश्यक नियमों और प्रक्रियाओं को कम करके शासन व्यवस्था को अधिक सरल और प्रभावी बनाना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार का काम लोगों के जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि जरूरत के समय उनकी सहायता करना होना चाहिए। उन्होंने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि ऐसे सुधारों पर ध्यान दिया जाए, जिनसे आम नागरिकों का जीवन आसान बने और कारोबार करने में आने वाली दिक्कतें कम हों। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत 2047 केवल नारा नहीं, बल्कि देश का संकल्प है और इसे मिशन भावना के साथ पूरा करना होगा।
बैठक में कृषि, पर्यावरण एवं वन, वाणिज्य, श्रम, ऊर्जा, सड़क परिवहन, स्वास्थ्य, विदेश मंत्रालय और कॉरपोरेट मामलों सहित नौ प्रमुख मंत्रालयों ने अपने सुधारों और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रस्तुति दी। कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए गए सुधारों का समग्र विवरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों को निर्देश दिया कि फाइलों के निपटान में तेजी लाई जाए और निर्णय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी समाप्त की जाए। उन्होंने लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर भी जोर दिया तथा अनावश्यक विवादों से बचने की सलाह दी।
सूत्रों के अनुसार बैठक में उन मंत्रालयों का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने फाइल निपटान और प्रशासनिक कार्यों में बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले विभागों को सुधार लाने और कार्यान्वयन व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों का सबसे बड़ा उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए और शासन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम लोगों को अधिक सुविधा मिले।
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इस संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है और गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर भी देखा जा रहा है। सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए आपूर्ति सुधारने के साथ-साथ आर्थिक मजबूती के उपायों पर भी काम कर रही है। माना जा रहा है कि आगे और आर्थिक सुधार किए जा सकते हैं ताकि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिले और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत हो।
प्रधानमंत्री मोदी ने घरेलू रसोई गैस संकट का उल्लेख करते हुए जैव गैस उत्पादन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में स्वदेशी और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना समय की मांग है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर भी जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वह आम लोगों के बीच जाकर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दें। सरकार का मानना है कि आधारभूत ढांचे, डिजिटल सेवाओं, विदेश नीति, ऊर्जा, व्यापार और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में देश ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी की हाल की पांच देशों की सफल विदेश यात्रा की जानकारी मंत्रिपरिषद के समक्ष रखी। उन्होंने यात्रा के दौरान हुए समझौतों और कूटनीतिक उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। मंत्रियों ने प्रधानमंत्री को इस सफल दौरे और पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण जीत के लिए बधाई भी दी।
हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों की यात्रा पूरी कर गुरुवार को ही नई दिल्ली लौटे थे। 15 मई से शुरू हुई इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में भारत के संबंधों को मजबूत करना था। इस दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे और इटली का दौरा किया।
अबू धाबी में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, दीर्घकालिक रसोई गैस आपूर्ति, रक्षा और नौवहन से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। खाड़ी देश ने भारत में पांच अरब डॉलर निवेश की घोषणा भी की। प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान से पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत ने रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और अन्य क्षेत्रों से जुडे 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत किया और वैश्विक तेल आपूर्ति में आ रही बाधाओं पर भी चर्चा की।
स्वीडन में प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग पर आधारित एक व्यापक कार्ययोजना की घोषणा भी की गई।
ओस्लो में आयोजित भारत नार्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के नेताओं से मुलाकात की। भारत और नॉर्वे ने स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, नौवहन और आर्कटिक अनुसंधान को लेकर हरित रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की। वहीं रोम में प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने दोनों देशों के संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
इस विदेश यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले। उन्हें स्वीडन का रॉयल आर्डर आफ द पोलर स्टार, नॉर्वे का ग्रांड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट तथा इटली में खाद्य और कृषि संगठन का एग्रीकोला पदक प्रदान किया गया।
बताया जा रहा है कि मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार लोगों के जीवन को आसान बनाने और व्यापार सुगमता को मजबूत करने के लिए सुधारों को और गति देगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में कहा कि मंत्रिपरिषद की बैठक अत्यंत उपयोगी रही, जिसमें जीवन सुगमता, व्यापार सुगमता और विकसित भारत के साझा लक्ष्य को साकार करने के उपायों पर विचार विमर्श किया गया। हम आपको बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 30 कैबिनेट मंत्री, पांच स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 36 राज्य मंत्री शामिल हैं। बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा भारत बनाना है जहां शासन सरल, पारदर्शी और जनकेंद्रित हो।
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