अगर EC मे रजिस्टर्ड होती है 'कॉकरोच जनता पार्टी' तो क्या 'तिलचट्टा' होगा चुनाव चिन्ह? जानिए चुनाव आयोग के नियम
डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में राजनीति का एक नया और बेहद अनोखा व व्यंग्यात्मक चेहरा सामने आया है। महज कुछ ही दिन पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अस्तित्व में आई 'कॉकरोच जनता पार्टी' (Cockroach Janta Party - CJP) इस समय इंटरनेट और रील्स की दुनिया में सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बन चुकी है। अपने मजेदार मीम्स, तीखे राजनीतिक कटाक्ष और पूरी तरह से सरकार-विरोधी व व्यवस्था-विरोधी अंदाज की वजह से इस आभासी पार्टी ने सोशल मीडिया पर भारी लोकप्रियता हासिल कर ली है।
लेकिन इस भारी डिजिटल रफ़्तार के बीच अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं कि क्या सोशल मीडिया पर चमकने वाली यह पार्टी कभी हकीकत के चुनावी मैदान में उतर पाएगी? और यदि ऐसा होता है, तो क्या भारतीय चुनाव आयोग के कड़े नियमों के तहत इसे अपनी पसंद का चुनाव चिन्ह मिल पाएगा?
अमेरिका से संचालित हो रही है CJP, इंस्टाग्राम पर बीजेपी को भी पछाड़ा
इस अनोखे डिजिटल पेज और वर्चुअल राजनीतिक दल को अभिजीत दिपके नाम के एक भारतीय शख्स ने तैयार किया है, जो वर्तमान में अमेरिका के बोस्टन शहर से इसे संचालित कर रहे हैं। इस पेज का क्रेज इस कदर बढ़ा कि इंस्टाग्राम पर रील्स और फॉलोअर्स के एंगेजमेंट के मामले में इसने दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा तक को पीछे छोड़ दिया।
यहाँ तक कि तृणमूल कांग्रेस के दो मौजूदा सांसदों ने भी इस पेज की कूटनीति और रील्स में अपनी दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, कड़े डिजिटल प्रतिबंधों और नियमों के चलते गुरुवार को इस पार्टी का मुख्य एक्स (X) अकाउंट भारत में पूरी तरह से सस्पेंड यानी बंद कर दिया गया है, जिससे इसके प्रशंसकों में भारी निराशा है।
1991 के कड़े नियम बने बड़ी बाधा, पशु-पक्षियों के सिंबल देने पर है रोक
यदि यह पार्टी भविष्य में वास्तविक रूप से चुनाव लड़ना चाहे, तो सबसे बड़ी चुनौती इसके नाम और चुनाव चिन्ह 'कॉकरोच' (तिलचट्टा) को लेकर खड़ी होगी। भारतीय चुनाव आयोग के वर्ष 1988 और 1991 के चुनाव चिन्ह आदेश के तहत बेहद साफ और कड़े नियम बने हुए हैं। साल 1991 में पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की गंभीर शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने राजनीतिक रैलियों और प्रचार के दौरान असली जानवरों व जीवों के इस्तेमाल और उन पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए नए पशु-आधारित प्रतीकों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।
साल 2012 में आयोग ने कड़े निर्देश जारी कर नए जानवर वाले चिन्ह देना पूरी तरह बंद कर दिया था। केवल बहुजन समाज पार्टी का हाथी और फॉरवर्ड ब्लॉक का शेर जैसे पुराने आरक्षित चिन्ह ही अपवाद के रूप में चल रहे हैं क्योंकि उन्हें पहले से छूट मिली हुई है। चूंकि कॉकरोच एक जीव/कीट की श्रेणी में आता है, इसलिए तकनीकी रूप से चुनाव आयोग CJP को यह सिंबल कभी आवंटित नहीं करेगा।
'मुफ्त प्रतीक' की सूची में मोबाइल फोन भी नहीं, लैंडलाइन और चार्जर मौजूद
पार्टी के संचालकों ने सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया था कि उनका दूसरा पसंदीदा चुनाव चिन्ह 'मोबाइल फोन' होगा। लेकिन चुनाव आयोग की 'फ्री सिंबल लिस्ट' खंगालने पर पता चलता है कि इस आधिकारिक सूची में मोबाइल फोन का नाम दूर-दूर तक शामिल नहीं है। हालांकि, इस लिस्ट में डिजिटल और तकनीकी चीजों के नाम पर 'लैंडलाइन फोन', 'लैपटॉप' और 'मोबाइल चार्जर' जैसे सिंबल जरूर मौजूद हैं, लेकिन मुख्य मोबाइल फोन गायब है।
पहले लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कराना होगा रजिस्ट्रेशन
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का स्पष्ट रूप से मानना है कि चुनाव की वास्तविक दुनिया में कदम रखना सोशल मीडिया पर रील बनाने जितना आसान नहीं है। CJP को चुनावी मैदान में उतरने के लिए सबसे पहले 'लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग के सामने एक वैध राजनीतिक दल के रूप में अपना आधिकारिक रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
इस लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही पार्टी चुनाव आयोग से किसी 'मुक्त प्रतीक' जैसे ताला-चाबी, एयर कंडीशनर, शतरंज का बोर्ड या नेल कटर की मांग कर सकेगी। कुल मिलाकर, वर्तमान परिस्थितियों में कॉकरोच जनता पार्टी केवल एक बेहतरीन राजनीतिक व्यंग्य और सोशल मीडिया की सनसनी बनकर ही सिमटती नजर आ रही है।
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