ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह माना जाता है। केतु को वैराग्य, मोक्ष, गूढ़ ज्ञान और आदि का कारक माना जाता है। जिस तरह से ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में केतु का स्थान देखकर व्यक्ति के स्वभाव और जीवन के बारे में पता लगाया जाता है। ठीक उसी तरह से हथेली में केतु पर्वत का उभार देखकर व्यक्ति के बारे में कई खास बातें जानी जा सकती हैं। हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक केतु ग्रह का प्रभाव किसी जातक के जीवन के 5वें से 20वें वर्ष तक होता है। लेकिन अगर हथेली में केतु पर्वत पूर्ण रूप से विकसित होता है, तो इसको ज्योतिष में अच्छा संकेत माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको केतु पर्वत से जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।
कहां होता है केतु पर्वत
हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक हथेली में यह पर्वत मणिबंध के ठीक ऊपर यानी की कलाई से ऊपर और चंद्र व शुक्र पर्वत के बीच में होता है। वहीं केतु पर्वत भाग्य रेखा के शुरूआती स्थान के पास होता है। माना जाता है कि केतु का फल भी राहु के समान ही देखने को मिलता है। इसका प्रभाव जीवन के 5वें साल से 20वें साल तक दिखाई देता है।
विकसित केतु पर्वत
अगर हथेली में केतु पर्वत स्वाभाविक रूप से विकसित होता है यानी की अच्छे से उभरा होता है। वहीं भाग्य रेखा भी स्पष्ट, साफ और गहरी दिखती है, तो इसको शुभ संकेत माना जाता है। माना जाता है कि ऐसा व्यक्ति बहुत भाग्यशाली होता है। इनको जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती है। इनको हर तरह का सुख प्राप्त होता है। वहीं इन जातकों को अपनी मेहनत का पूरा फल मिलता है। अगर ऐसा जातक गरीब घर में भी जन्म लेता है, तो भी आगे जाकर वह खूब धनवान बनता है। इनको जीवन में भाग्य का पूरा साथ मिलता है।
अविकसित केतु पर्वत और प्रबल भाग्य रेखा होना
अगर हथेली में केतु पर्वत अविकसित है, यानी की इसमें बिल्कुल भी उभार नहीं है, लेकिन भाग्य रेखा प्रबल है। तो इस स्थिति में व्यक्ति के जीवन में कुछ बाधाएं आ सकती हैं। इन लोगों को अपनी आर्थिक स्थिति पर ध्यान देने की ज्यादा जरूरत होती है। जब हथेली में केतु पर्वत पूर्ण रूप से विकसित हो और भाग्य रेखा भी प्रबल और स्पष्ट होती है। तो इसका पूरा फल प्राप्त होता है। ऐसा पर्वत जीवन में उन्नति और सफलता का संकेत देता है और भाग्य में भी वृद्धि कर सकता है।
कमजोर केतु और भाग्य रेखा का अर्थ
हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक अगर हथेली में पर्वत का उभार सही तरह से नहीं होता है, साथ ही भाग्य रेखा भी कमजोर हो। तो इसको अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। भाग्य रेखा गहरी और साफ न होने का संकेत है कि ऐसे व्यक्ति को बचपन में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अच्छे फल प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। वहीं किसी भी कार्य में लगातार प्रयास की जरूरत होती है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से भी इन लोगों के जीवन में परेशानियां आ सकती हैं। वहीं बचपन में सेहत पर ध्यान देना जरूरी होता है।
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शहर में पढ़ाई, नौकरी और बिजनस के लिए लोग किराए के घर में रहते हैं। ऐसे में लोगों का लगता है कि अपने घर में वास्तु के उपाय किए जाते हैं, किराए के घर में नहीं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, किराए के घर में कुछ भी आसान वास्तु उपाय अपनाकर सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और तरक्की प्राप्त की जा सकती है। सबसे जरुरी बात तो यह है कि इन उपायों के लिए किसी प्रकार की तोड़फोड़ या बड़े बदलाव की जरुरत नहीं है।
घर की साफ-सफाई
वास्तु शास्त्र के अनुसार, स्वच्छ घर में सकारात्मक ऊर्जा निरंतर बनीं रहती है। किराए के घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले पूरे घर की अच्छी तरह से सफाई कर लें। घर के बेकार, टूटी-फूटी और अनुपयोगी वस्तुएं जमा बिल्कुल न करें। माना जाता है कि गंदगी और अव्यवस्छा नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है, जिससे मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियां बढ़ जाती हैं।
मुख्य द्वार पर दें ध्यान
वास्तु के मुताबिक घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना जाता है। किराए के घर में मुख्य दरवाजे को हमेशा साफ रखें। दरवाजे पर शुभ प्रतीक जैसे कि स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ लगाना शुभ होता है। इसके अलावा मुख्य द्वार के पास पर्याप्त रोशनी होना जरुरी है। जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा।
पूजा स्थान सही दिशा में रखें
किराए के घर में रहने वाले लोगों के लिए सबसे जरुरी है सही पूजा स्थान। घर में छोटा सा पूजा स्थान भी सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद करता है। वास्तु अनुसार, ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा पूजा के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। अगर संभव हुआ तो पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ जरुर करें। इससे मन में शांति और सकारात्मकता बनीं रहेगी।
सोने की दिशा का रखें ध्यान
वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। इससे नींद अच्छी आती है और मानसिक तनाव कम होता है। लेकिन उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से बचना चाहिए। किराए के घर में भी इस छोटे से नियम को अपनाकर हेल्थ और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।
रसोई और जल तत्व का संतुलन
घर में रसोई गलत दिशा में हो, तो चिंता करने की जरुरत नहीं है। वास्तु मान्यता के अनुसार, रसाई को हमेशा साफ-सुथरा रखें और गैस चूल्हे के पास पानी से भरे बर्तन न रखें। क्योंकि पानी और अग्नि तत्व का संतुलन बनाए रखना जरुरी होता है। इसके अलावा घर में पानी का रिसाव या टपकता नल तुरंत ठीक करवाने चाहिए, क्योंकि इसे आर्थिक हानि का कारण माना जाता है।
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