IPL 2026 Playoffs Scenario: RCB पहुंची प्लेऑफ में, अब बाकी 3 सीटों के लिए 7 टीमों में जबरदस्त जंग
IPL 2026 अब अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु प्लेऑफ में जगह बनाने वाली पहली टीम बन गई है, लेकिन बाकी तीन सीटों के लिए अभी भी 7 टीमें रेस में बनी हुई हैं। हर मैच के साथ समीकरण बदल रहे हैं और नेट रन रेट से लेकर आखिरी ओवर तक सबकुछ बेहद अहम हो गया है।
दिल्ली कैपिटल्स ने राजस्थान रॉयल्स को हराकर समीकरण और उलझा दिए हैं। फिलहाल सिर्फ मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी हैं। बाकी सात टीमें अब भी उम्मीद लगाए बैठी हैं।
गुजरात टाइटंस सबसे मजबूत स्थिति में
शुभमन गिल की कप्तानी वाली गुजरात टाइटंस फिलहाल सबसे सुरक्षित स्थिति में नजर आ रही है। टीम को अपने बचे हुए दो मुकाबलों में सिर्फ एक जीत की जरूरत है।
अगर गुजरात दोनों मैच हार भी जाती है, तब भी उसका मजबूत नेट रन रेट उसे फायदा पहुंचा सकता है।
सनराइजर्स हैदराबाद के हाथ में पूरा खेल
सनराइजर्स हैदराबाद का भविष्य पूरी तरह उसके अपने प्रदर्शन पर निर्भर है। अगर SRH अपने दोनों मुकाबले जीत लेती है, तो टीम सीधे 18 अंकों तक पहुंच जाएगी और टॉप-2 में जगह बनाने की दावेदार बन सकती है।
एक जीत भी हैदराबाद को 16 अंकों तक पहुंचा सकती है, जो प्लेऑफ के लिए मजबूत स्थिति मानी जा रही है।
पंजाब किंग्स के लिए अब ‘करो या मरो’
RCB से हारने के बाद पंजाब किंग्स की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। अब टीम अधिकतम 15 अंक तक ही पहुंच सकती है।
ऐसे में पंजाब को अपना आखिरी मैच हर हाल में जीतना होगा। इसके बाद भी टीम को दूसरी टीमों के नतीजों और नेट रन रेट पर निर्भर रहना पड़ेगा।
दबाव में राजस्थान रॉयल्स
राजस्थान रॉयल्स ने पिछले पांच मुकाबलों में चार हार झेली हैं, जिससे टीम की स्थिति मुश्किल हो गई है।
हालांकि अच्छी बात यह है कि RR का भविष्य अब भी उसके अपने हाथ में है। अगर टीम अपने दोनों बचे मैच जीत लेती है, तो 16 अंकों के साथ प्लेऑफ में पहुंच सकती है।
लेकिन एक हार भी उन्हें नेट रन रेट की खतरनाक लड़ाई में धकेल सकती है।
चेन्नई सुपर किंग्स पर बढ़ा दबाव
CSK के लिए अब हर मुकाबला फाइनल जैसा हो गया है। टीम को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए अपने दोनों मैच जीतने होंगे।
अगर चेन्नई सिर्फ एक मैच जीतती है, तो उसे दूसरी टीमों की हार और बेहतर नेट रन रेट की उम्मीद करनी पड़ेगी।
दिल्ली कैपिटल्स की उम्मीद अभी बाकी
दिल्ली कैपिटल्स ने राजस्थान को हराकर अपनी उम्मीदें जिंदा रखी हैं, लेकिन टीम के पास अब सिर्फ एक मैच बचा है।
DC अधिकतम 14 अंकों तक पहुंच सकती है। ऐसे में उन्हें सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत की जरूरत होगी। दिल्ली का कमजोर नेट रन रेट उसकी सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है।
हर मैच बदल सकता है तस्वीर
IPL 2026 में अब हर मुकाबला प्लेऑफ की तस्वीर बदल सकता है। यही वजह है कि इस सीजन का आखिरी चरण बेहद रोमांचक और अप्रत्याशित बन गया है।
RTI के दायरे से बाहर रहेगा BCCI: केंद्रीय सूचना आयोग का बड़ा फैसला, क्या हैं इसके मायने?
CIC Decision on BCCI RTI Case: भारतीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़ा एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया। केंद्रीय सूचना आयोग ने साफ कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सूचना के अधिकार यानी आरटीआई कानून के दायरे में नहीं आता। इस फैसले के बाद दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड को अब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी सार्वजनिक करने की बाध्यता नहीं होगी।
यह फैसला सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने सुनाया। इसके साथ ही 2018 से चल रहा लंबा विवाद भी खत्म हो गया। दरअसल, साल 2018 में तत्कालीन सूचना आयुक्त एम श्रीधर ने बीसीसीआई को आरटीआई एक्ट की धारा 2(h) के तहत पब्लिक अथॉरिटी माना था और बोर्ड को पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर नियुक्त करने का निर्देश दिया था। हालांकि बीसीसीआई ने इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
बीसीसीआई आरटीआई दायरे में नहीं आएगा
बाद में कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सीआईसी के पास भेज दिया। अब नई सुनवाई में आयोग ने कहा कि बीसीसीआई सूचना के अधिकार कानून में तय 'पब्लिक अथॉरिटी' की शर्तों को पूरा नहीं करता।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बीसीसीआई तमिलनाडु सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड एक संस्था है। इसे न तो संविधान के तहत बनाया गया है और न ही संसद के किसी कानून के जरिए स्थापित किया गया है।
केंद्रीय सूचना आयोग का बड़ा फैसला
सीआईसी ने अपने फैसले में कई अहम कारण गिनाए। आयोग के मुताबिक सरकार का बीसीसीआई के कामकाज में कोई गहरा या व्यापक नियंत्रण नहीं है। बोर्ड अपने फैसले खुद लेता है और प्रशासनिक तौर पर स्वतंत्र है। दूसरा बड़ा कारण उसकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बताई गई। आयोग ने कहा कि बीसीसीआई मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से खुद कमाई करता है। वह सरकारी फंडिंग पर निर्भर नहीं है।
फैसले में यह भी साफ किया गया कि टैक्स छूट या कानून के तहत मिलने वाली सुविधाओं को सरकारी फंडिंग नहीं माना जा सकता। इसलिए बीसीसीआई को सरकारी सहायता प्राप्त संस्था नहीं कहा जा सकता।
आईपीएल और भारतीय बाजार का भी जिक्र
अपने फैसले में आयोग ने बीसीसीआई की आर्थिक ताकत और इंडियन प्रीमियर लीग की सफलता का भी जिक्र किया। आयोग ने कहा कि बीसीसीआई अब वैश्विक क्रिकेट का आर्थिक केंद्र बन चुका और इसकी ताकत भारतीय बाजार और आईपीएल से आती है। सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने कहा कि सिर्फ सरकारी नियंत्रण बढ़ाने से पारदर्शिता की गारंटी नहीं मिलती। उन्होंने माना कि ऐसे बड़े और व्यावसायिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहतर नियामक व्यवस्था से लाई जा सकती है।
यह मामला तब शुरू हुआ था जब खेल मंत्रालय के पास एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया गया था। मंत्रालय ने जवाब दिया था कि उसके पास मांगी गई जानकारी नहीं है और वह आवेदन बीसीसीआई को ट्रांसफर भी नहीं कर सकता क्योंकि बोर्ड निजी संस्था है। अब केंद्रीय सूचना आयोग के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए संसद में नया कानून या विशेष सरकारी आदेश लाना होगा।
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