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स्किन ग्लो के नाम पर इंजेक्शन? अब नहीं चलेगा खेल, केंद्र सरकार ने कसा शिकंजा

केंद्र सरकार ने इंजेक्शन वाले ब्यूटी ट्रीटमेंट पर सख्ती शुरू कर दी है. CDSCO ने स्पष्ट किया है कि कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करना या ऐसे भ्रामक दावे करना नियमों का उल्लंघन है. ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सौंदर्य प्रसाधन केवल बाहरी उपयोग के लिए हैं, इलाज के लिए नहीं.

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NEET-UG 2026: संसदीय समिति के सामने NTA चीफ ने पेपर लीक से किया साफ इनकार, कहा—'सिर्फ कुछ सवाल बाहर आए थे'

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'NEET-UG 2026' को लेकर मचा देशव्यापी बवाल अब संसद से लेकर जांच एजेंसियों की चौखट तक पहुंच चुका है। एक तरफ जहां इस विवाद को लेकर गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति के सामने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के शीर्ष अधिकारियों की बेहद तीखी और कड़े सवालों वाली पेशी हुई, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी की है।

सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से एक नामी डॉक्टर को अपने बेटे के लिए लाखों रुपये में लीक प्रश्न पत्र खरीदने के आरोप में दबोच लिया है। इन दोनों बड़े घटनाक्रमों ने नीट परीक्षा की शुचिता और पारदर्शी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​संसदीय समिति के सामने बोले NTA महानिदेशक- 'पेपर लीक नहीं हुआ, केवल कुछ सवाल बाहर आए थे' 
नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर बुलाई गई संसदीय समिति की हाई-लेवल बैठक में एनटीए के चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी और महानिदेशक अभिषेक सिंह मौजूद रहे। बैठक के दौरान जब विभिन्न दलों के सांसदों ने पेपर लीक को लेकर कड़े सवाल पूछे, तो एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने आधिकारिक तौर पर बयान देते हुए कहा कि नीट का पेपर उनके मुख्य डिजिटल या फिजिकल सिस्टम से पूरी तरह लीक नहीं हुआ था। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से ठीक पहले केवल "कुछ विशिष्ट प्रश्न" ही बाहर आए थे।

​सांसदों के तीखे सवाल पर निरुत्तर हुए एनटीए के अधिकारी 
​एनटीए प्रमुख के इस 'सीमित प्रभाव' वाले कूटनीतिक दावे पर संसदीय समिति में शामिल कई सांसदों ने कड़ा ऐतराज जताया। सांसदों ने सीधे तौर पर तकनीकी सवाल दागते हुए पूछा कि, "यदि एनटीए के मुख्य सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ था, तो वे चुनिंदा सवाल परीक्षा से पहले बाहर कैसे आ गए? और यदि गड़बड़ी इतनी ही सीमित थी, तो देश के 23 लाख छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाकर पूरी परीक्षा को रद्द करने और दोबारा कराने की जरूरत आखिरकार क्यों पड़ी?"

सांसदों के इस तार्किक और तीखे सवाल पर एनटीए के डीजी और अन्य सीनियर अधिकारी कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि एजेंसी शुचिता को लेकर 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपनाती है, इसलिए संशय दूर करने के लिए री-एग्जाम का कड़ा फैसला लिया गया।

​3 मई को हुई थी परीक्षा, आगामी 21 जून को होगा री-एग्जाम 
गौरतलब है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नीट-यूजी की परीक्षा बीते 3 मई 2026 को देश के 551 शहरों और विदेशों के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। इसके बाद 7 मई को पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की प्राथमिक सूचनाएं मिलने के बाद मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपी गई थी।

गड़बड़ी के पुख्ता इनपुट मिलने के बाद 12 मई को एनटीए ने इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। नए शेड्यूल के मुताबिक, अब सभी छात्रों को दोबारा नए सिरे से अप्लाई करने की जरूरत नहीं होगी और आगामी 21 जून 2026 को देशव्यापी स्तर पर नीट-यूजी का री-एग्जाम आयोजित किया जाएगा।

​सीबीआई का लातूर में एक्शन: डॉक्टर पिता गिरफ्तार 
​इसी बीच, धांधली की कड़ियों को जोड़ रही सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर में एक बेहद चौंकाने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई ने लातूर के एक प्रतिष्ठित सरकारी डॉक्टर मनोज शिरुरे को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने अपने बेटे के लिए 'आरसीसी कोचिंग' के संचालक और मुख्य आरोपी शिवराज मोटेगांवकर उर्फ 'एम सर' से लाखों रुपये की डील करके नीट का गेस पेपर खरीदा था।

जांच में सामने आया है कि यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि यह गिरोह एक बेहद शातिर और कॉर्पोरेट पैटर्न पर काम कर रहा था:

  • ​आर्थिक स्थिति की मैपिंग: यह गिरोह पेपर का सौदा करने से पहले संबंधित छात्र के परिवार की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि की पूरी पड़ताल करता था।
  • ​5 से 50 लाख की भारी डील: छात्र की हैसियत के हिसाब से प्रश्न पत्र या 'क्वेश्चन बैंक' का सौदा ₹5 लाख से लेकर ₹50 लाख तक में तय किया जाता था।
  • ​टोकन मनी और ब्लैंक चेक: सौदा पक्का होते ही शुरुआत में सिर्फ थोड़ी सी 'टोकन मनी' ली जाती थी और सुरक्षा के तौर पर माता-पिता से ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स और साइन किए हुए ब्लैंक चेक गिरोह अपने पास गिरवी रख लेता था।
  • ​आंसर-की मिलान पर फाइनल पेमेंट: डील की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि परीक्षा समाप्त होने और आधिकारिक 'आंसर-की' आने के बाद जब छात्र यह साबित कर देगा कि दिया गया क्वेश्चन बैंक असली पेपर से पूरी तरह मेल खाता है, तभी ब्लैंक चेक के जरिए बाकी की पूरी रकम वसूली जाती थी।

​इंटेलिजेंस से मिले पुख्ता इनपुट्स के बाद बीते 8 मई की रात राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप और सीबीआई ने जब सीकर में दबिश दी, तब इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ और अब पहली बार किसी पैरेंट की इस मामले में गिरफ्तारी हुई है, जिससे मेडिकल कोचिंग माफियाओं के बीच भारी हड़कंप मच गया है।

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