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ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एआई, ड्रोन और सीसीटीवी का इस्तेमाल कर रहा रेलवे: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि भारतीय रेलवे ट्रेनों, यात्रियों, स्टेशन परिसरों और विशाल रेल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एआई, ड्रोन और सीसीटीवी जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बीट स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने की व्यवस्था को मजबूत कर मिशन मोड में यह काम किया जा रहा है।

रेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजधानी में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में देशभर के फील्ड अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।

बैठक का मुख्य फोकस रेलवे नेटवर्क में अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन के लिए आरपीएफ और सरकारी रेलवे पुलिस के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था को बेहतर बनाकर समन्वय मजबूत करना था।

बैठक में बताया गया कि पिछले कुछ दिनों में कई घटनाओं की शुरुआती जांच में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें हाल की कुछ आगजनी की घटनाएं भी शामिल हैं।

भारतीय रेलवे ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और आरपीएफ सक्रिय रूप से इनकी जांच कर रही है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, कई मामलों में रेलवे की त्वरित और सक्रिय कार्रवाई से बड़े हादसों को टालने में मदद मिली है।

बैठक में यह भी महसूस किया गया कि खुफिया तंत्र को मजबूत करने और सूचनाओं को तेजी से प्रोसेस करने के लिए तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ रेलवे यात्रियों को भी यात्रा के दौरान और स्टेशन परिसर में इंतजार करते समय असामाजिक गतिविधियों को रोकने में सक्रिय सहयोग के लिए प्रोत्साहित करेगा।

मंत्रालय ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और जागरूक रहने की अपील की। रेलवे परिसर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर देने को कहा गया है।

बैठक में तकनीक-आधारित सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, पूरे रेलवे नेटवर्क में सीसीटीवी कवरेज बढ़ाने और रेलवे बोर्ड मुख्यालय तथा फील्ड जोन के बीच परिचालन सुरक्षा समन्वय बेहतर करने पर भी जोर दिया गया।

इसके अलावा, साइबर सुरक्षा मजबूत करने, कैमरों की गुणवत्ता अपग्रेड करने और एआई-आधारित निगरानी एवं मॉनिटरिंग सिस्टम तैनात करने पर भी चर्चा हुई।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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'अगर हमला हुआ तो काट देंगे समुद्र के नीचे मौजूद इंटरनेट केबल', ईरान की धमकी से दुनिया में मची हलचल

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान की ओर से समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को लेकर दी गई धमकी ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ईरानी सांसद महमूद नबावियन ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में ईरान की संप्रभुता के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो ईरान अंडरसी इंटरनेट केबल्स काट सकता है. बता दें कि इन केबल्स के जरिए खाड़ी देशों में इंटरनेट, डिजिटल नेटवर्क और बैंकिंग सेवाएं संचालित होती हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करना आसान नहीं होगा और इसका असर सीमित रह सकता है, लेकिन इस चेतावनी ने वैश्विक डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

ईरान की होर्मुज में अंडरसी इंटरनेट केबल काटने की चेतावनी

ईरान ने अभी तक समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन उसने ऐसी कार्रवाई की चेतावनी जरूर दी है. यह चेतावनी खास तौर पर फारस की खाड़ी और होर्मुज से गुजरने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबल्स को लेकर दी गई. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव और पाबंदियों के जवाब में एक बयान जारी किया था. स्पष्ट कहा था कि अगर उस पर दबाव बढ़ाया गया या नौसैनिक नाकेबंदी जैसी स्थिति बनी, तो वह रणनीतिक जवाब दे सकता है. होर्मुज से गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण सबमरीन केबल्स जैसे फैल्कन और एएई-1 खाड़ी देशों की इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के लिए बेहद अहम हैं. कतर, बहरीन और कुवैत जैसे देश इन पर काफी हद तक निर्भर हैं.

ईरानी मंत्री नबावियन का बयान

गुरुवार (21 मई) को नबावियन ने एक्स पर चेतावनी जारी की. उन्होंने कहा, "ईरान समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को काट सकता है, जिससे वैश्विक इंटरनेट सेवाएं, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली कई वर्षों तक प्रभावित हो सकती है." नबावियन के अनुसार, अमेरिका-इजरायल होर्मुज में अगर ईरान की संप्रभुता के खिलाफ कोई भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करेंगे तो उससे वैश्विक संकट आना तय है. उन्होंने कहा, “ईरान की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा.”

ग्लोबल बैंकिंग और नेटवर्क पर मंडराया खतरा

बता दें कि अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो मध्य-पूर्व के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं, डिजिटल नेटवर्क और बैंकिंग सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका वैश्विक असर सीमित रहेगा और दुनिया भर के इंटरनेट ट्रैफिक पर प्रभाव बहुत कम पड़ेगा. हालांकि पहले ही कई तकनीकी जानकार कह चुके हैं कि समुद्र की गहराई में मौजूद इन केबल्स को काटना आसान नहीं है. ऐसा कदम ईरान के लिए भी आर्थिक और रणनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है.

(स्त्रोत:- आईएएनएस)

यह भी पढ़ें- इबोला खतरे के बीच थाईलैंड ने हवाई अड्डों पर बढ़ाई निगरानी और स्क्रीनिंग

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कौन हैं कुलदीप वेदवान... जिनको हुई 5 साल की जेल, नाबालिग से छेड़छाड़ का दोषी करार

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