दिल्ली-मुंबई में सस्ता हुआ विमान ईंधन, ATF पर घटा VAT,सस्ती होंगी फ्लाइट्स टिकट?
दिल्ली सरकार ने एविएशन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए विमान ईंधन यानी एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर वैट (VAT) कम करने का फैसला लिया है. सरकार ने ATF पर लगने वाले टैक्स को घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. इस फैसले से एयरलाइन कंपनियों की परिचालन लागत में कमी आने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा घरेलू विमानन कंपनियों जैसे एयर इंडिया और इंडिगो को मिलेगा.
विशेषज्ञों के अनुसार ATF किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का बड़ा हिस्सा होता है. ऐसे में टैक्स कम होने से कंपनियों को आर्थिक राहत मिलेगी और भविष्य में यात्रियों को भी इसका अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है.
दिल्ली पहले सबसे महंगे शहरों में था शामिल
अब तक दिल्ली उन बड़े शहरों में शामिल थी जहां विमान ईंधन पर अधिक टैक्स लगाया जाता था. इससे एयरलाइंस को ज्यादा लागत उठानी पड़ती थी. कई विमानन कंपनियां लंबे समय से ATF पर टैक्स कम करने की मांग कर रही थीं.
सरकार के इस फैसले के बाद दिल्ली की तुलना अब दूसरे प्रमुख एविएशन हब शहरों से की जा रही है, जहां पहले से कम टैक्स दरें लागू हैं. माना जा रहा है कि इससे दिल्ली एयर ट्रैफिक और विमान संचालन के लिहाज से ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेगी.
एयरलाइंस कंपनियों को मिलेगा सीधा लाभ
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि ATF पर टैक्स घटने से एयरलाइंस कंपनियों के खर्च में करोड़ों रुपये की बचत हो सकती है. खासकर घरेलू उड़ानों का संचालन करने वाली कंपनियों को इससे काफी फायदा मिलेगा.
हाल के महीनों में एयरलाइंस कंपनियां बढ़ती ईंधन कीमतों, विमान लीजिंग लागत और तकनीकी खर्चों के दबाव का सामना कर रही थीं. ऐसे में टैक्स कटौती से कंपनियों को वित्तीय संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है.
यात्रियों को भी मिल सकती है राहत
हालांकि फिलहाल एयर टिकट सस्ती होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि अगर एयरलाइंस की लागत घटती है तो भविष्य में किराए पर इसका असर दिखाई दे सकता है.
त्योहारी सीजन और छुट्टियों के दौरान बढ़ते हवाई किराए को देखते हुए यात्रियों को उम्मीद है कि टैक्स कटौती का कुछ फायदा टिकट कीमतों में भी देखने को मिलेगा. हालांकि यह पूरी तरह एयरलाइंस कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति पर निर्भर करेगा.
दिल्ली सरकार ने बताया आर्थिक रूप से जरूरी फैसला
सरकार का कहना है कि यह कदम दिल्ली को एक मजबूत एविएशन और बिजनेस हब बनाने की दिशा में उठाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, कम टैक्स से उड़ानों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा.
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इबोला खतरे के बीच थाईलैंड ने हवाई अड्डों पर बढ़ाई निगरानी और स्क्रीनिंग
थाईलैंड के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (सीएएटी) ने गुरुवार को कहा कि उसने देश की विमानन प्रणाली में इबोला वायरस रोग की निगरानी और रोकथाम के उपायों को और सख्त कर दिया है.
डब्ल्यूएचओ (WHO) की चेतावनी के बाद उठाया कदम
सिंहुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद उठाया है. डब्ल्यूएचओ ने सीमा पार संक्रमण के खतरे को देखते हुए यह घोषणा की थी.
थाईलैंड के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को दोनों अफ्रीकी देशों को इबोला के लिए “खतरनाक संक्रामक रोग क्षेत्र” घोषित किया, जिसके बाद नागरिक उड्डयन क्षेत्र में संयुक्त स्क्रीनिंग और प्रतिक्रिया उपाय लागू किए गए.
हवाई अड्डों पर यात्रियों के लिए नए नियम और थाई हेल्थ पास
सीएएटी ने एक बयान में कहा कि उसने स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय संक्रामक रोग नियंत्रण एवं क्वारंटीन विभाग, एयरलाइंस और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ बैठकें कर पूरे विमानन क्षेत्र में स्वास्थ्य प्रोटोकॉल को एकरूप बनाने पर काम शुरू किया है.
अधिकारियों ने लोगों से कांगो, युगांडा और आसपास के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है. जिन लोगों को यात्रा करनी जरूरी है, उन्हें थाई हेल्थ पास प्रणाली में पंजीकरण कराना होगा, जबकि विदेशी यात्रियों को संपर्क ट्रेसिंग और रोग निगरानी के लिए थाईलैंड डिजिटल अराइवल कार्ड सही तरीके से भरना होगा.
विमानन कंपनियों (Airlines) के लिए कड़े निर्देश
संक्रमित क्षेत्रों से जुड़े मार्गों पर उड़ान संचालित करने वाली एयरलाइंस को यात्रियों को स्वास्थ्य नियमों की जानकारी देने, प्रस्थान स्थल पर स्क्रीनिंग करने और यात्रियों की सीटिंग व यात्रा संबंधी जानकारी रोग नियंत्रण अधिकारियों के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं.
क्वारंटीन विभाग ने थाईलैंड पहुंचने के बाद या उड़ान के दौरान संदिग्ध मामलों से निपटने के लिए अभ्यास भी किया है. इसके तहत एयरलाइंस, हवाईअड्डों, स्वास्थ्य एजेंसियों और अन्य संस्थाओं के बीच समन्वय प्रक्रिया तय की गई है, ताकि संक्रमण रोकने के साथ-साथ संचालन भी प्रभावित न हो.
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कांगो और युगांडा में अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घ्रेब्रेयसस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन समिति ने मंगलवार को बैठक कर उनके इस आकलन से सहमति जताई कि कांगो और युगांडा में इबोला की स्थिति अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) है, हालांकि इसे महामारी आपातकाल नहीं माना गया है.
टेड्रोस ने रविवार को ही दोनों देशों में इबोला प्रकोप को पीएचईआईसी घोषित कर दिया था. यह पहली बार था जब डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने आपातकालीन समिति की बैठक बुलाए बिना ऐसा कदम उठाया.
स्रोत- आईएएनएस
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