भारत में 'कॉकरोच जनता पार्टी' का X अकाउंट ब्लॉक: जानें कौन है फाउंडर अभिजीत दिपके, क्यों मचा है बवाल?
Cockroach Janata Party X blocked In India: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाले सैटायर (व्यंग्य) पेज 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत में इस पेज के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को कानूनी मांग के बाद ब्लॉक (Withheld) कर दिया गया है। हालांकि, यह पेज इंस्टाग्राम पर अब भी एक्टिव है और वहां इसके फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़कर 12.7 मिलियन के पार पहुंच गई है।
इस बीच, जैसे ही यह पेज चर्चा में आया, इसके अचानक से बढ़ने वाले ग्राफ और इसके पीछे के दिमाग को लेकर इंटरनेट पर सवाल उठने शुरू हो गए। दावों के मुताबिक, इस सैटायर पेज के फाउंडर अभिजीत दिपके हैं, जिनका सीधा कनेक्शन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इस पेज की निष्पक्षता को लेकर बहस छिड़ गई है।
कैसे शुरू हुआ 'कॉकरोच' जनता पार्टी?
'कॉकरोच जनता पार्टी' की शुरुआत कुछ ही दिन पहले देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के एक कथित बयान के बाद हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजेआई ने एक टिप्पणी के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर 'कॉकरोच' से कर दी थी। हालांकि, बाद में मुख्य न्यायाधीश ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश (Misquoted) किया गया।
सीजेआई ने साफ किया था कि उनकी टिप्पणी उन लोगों के खिलाफ थी जो 'फर्जी और जाली डिग्रियों' के सहारे वकालत या अन्य पेशों में एंट्री करने की कोशिश करते हैं। लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर मीम्स की बाढ़ आ चुकी थी और इसी पृष्ठभूमि में 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से यह सैटायर अकाउंट वजूद में आया।
कौन हैं फाउंडर अभिजीत दिपके?
इस पेज को शुरू करने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दिपके एक जाने-माने पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट (राजनीतिक संचार रणनीतिकार) हैं। वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए नैरेटिव सेट करने, पब्लिक मैसेजिंग और सोशल मीडिया के जरिए राजनीतिक राय को प्रभावित करने के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
अभिजीत दिपके ने पुणे से पत्रकारिता (Journalism) की पढ़ाई पूरी की है, जिसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए थे। हाल ही में उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में दो साल की मास्टर डिग्री पूरी की है। डिजिटल मीडिया और राजनीतिक अभियानों को लेकर उनकी समझ काफी गहरी मानी जाती है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ पुराना कनेक्शन
अभिजीत दिपके की लोकप्रियता और इस पेज के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए। जांच में सामने आया कि दिपके साल 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया और चुनाव अभियान तंत्र से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। साल 2020 के दिल्ली और अन्य चुनावों में उन्होंने मीम-आधारित डिजिटल कैंपेनिंग (Meme-based Campaigning) पर काम किया था, जिसने पार्टी की यूथ रीच को बढ़ाने में मदद की थी।
इसी 'आप' कनेक्शन को लेकर अब एक्स (X) पर कई नेटिजन्स सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह पेज निष्पक्ष नहीं है, बल्कि सरकार के खिलाफ एक खास किस्म का 'प्रोपेगैंडा' चलाने के लिए तैयार किया गया है।
फाउंडर ने दी सफाई, कहा- 'आप' के मॉडल से था प्रभावित
आम आदमी पार्टी के साथ अपने पुराने संबंधों को लेकर जब एक इंटरव्यू में अभिजीत दिपके से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे स्वीकार किया। दिपके ने कहा कि वे आम आदमी पार्टी के स्वास्थ्य और शिक्षा मॉडल (Health and Education Model) से काफी प्रभावित थे और इसी वजह से वे इसमें अपना योगदान देना चाहते थे।
बहरहाल, एक्स अकाउंट ब्लॉक होने और 'आप' कनेक्शन सामने आने के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर डिजिटल वर्ल्ड में सियासी जंग और तेज हो गई है। एक धड़ा इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहा है, तो दूसरा इसे एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहा है।
Abhishek Banerjee: कलकत्ता हाईकोर्ट से अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत; अमित शाह पर टिप्पणी मामले में पुलिस की कार्रवाई पर रोक
Abhishek Banerjee: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। गुरुवार को हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को आदेश दिया है कि वह चुनावी रैलियों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दिए गए कथित बयानों को लेकर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर कार्रवाई (Coercive Action) न करे।
हालांकि, इस राहत के साथ ही कोर्ट रूम के भीतर जज ने बंगाल की राजनीतिक स्थिति को लेकर बेहद तल्ख और तीखी टिप्पणियां की हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने अभिषेक बनर्जी की तरफ से रैलियों में दिए गए बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया। कोर्ट ने पूछा कि आखिर उनके द्वारा ऐसे "गैर-जिम्मेदाराना बयान" क्यों दिए गए? जज ने तीखे लहजे में सवाल किया, "अगर तृणमूल कांग्रेस (TMC) यह चुनाव जीत जाती, तो क्या होता? इस राज्य का चुनाव के बाद होने वाली हिंसा (Post-Poll Violence) का एक बहुत ही काला इतिहास रहा है।"
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य यहीं नहीं रुके, उन्होंने टीएमसी में अभिषेक बनर्जी के कद को लेकर भी सवाल उठाए। जज ने पूछा कि क्या सार्वजनिक सभा में उनके द्वारा की गई टिप्पणियां तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव जैसे गरिमामय पद से मेल खाती हैं? हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई तक के लिए पुलिसिया कार्रवाई से सुरक्षा दे दी है और इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की है।
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजदीप मजूमदार ने अभिषेक बनर्जी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस मामले की जांच कानून की उचित प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा।
पूछताछ के लिए देना होगा 48 घंटे पहले नोटिस
अदालत ने अभिषेक बनर्जी को राहत देने के साथ ही जांच एजेंसी (साइबर क्राइम पुलिस) के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण गाइडलाइन भी जारी की है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि पुलिस इस मामले में पूछताछ के लिए टीएमसी सांसद को समन जारी करना चाहती है, तो उन्हें कम से कम 48 घंटे पहले (48 Hours in Advance) लिखित नोटिस देना होगा। कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को भी निर्देश दिया है कि वे जांच में पूरा सहयोग करें और जांच अधिकारी द्वारा भेजे गए नोटिस का पालन करें।
इसके साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के विदेश जाने पर भी पाबंदी लगा दी है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, वे अदालत की अनुमति (Leave of the Court) लिए बिना देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते हैं। अगर उन्हें किसी भी कारण से विदेश यात्रा करनी है, तो उन्हें पहले कोर्ट से कानूनी मंजूरी लेनी होगी।
जानिए क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के प्रचार के दौरान 27 अप्रैल को हुई एक जनसभा से जुड़ा है। आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने एक प्रतिद्वंद्वी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बेहद भड़काऊ और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसका कनेक्शन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी जोड़ा गया था। इस मामले को रद्द कराने के लिए ही सांसद ने हाईकोर्ट का रुख किया था।
चुनाव नतीजों के ठीक एक दिन बाद, 5 मई को सामाजिक कार्यकर्ता राजीब सरकार ने उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले बागुईआटी थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बनर्जी के बयान भड़काऊ थे और उनसे सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ने का गंभीर खतरा था। इसी शिकायत के आधार पर 15 मई को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में औपचारिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी, जिसकी जांच अब कोर्ट के आदेशानुसार जारी रहेगी।
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