Explainer: संसद में क्या होती है JPC कमेटी? FCRA बिल यहां भेजने की तैयारी में है सरकार
What is Joint Parliamentary Committee: संसद में मानसून सत्र चल रहा है. हर दिन संसद में हंगामा हो रहा है. इस सत्र में सबसे बड़ा मुद्दा फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन बिल, 2026 को लेकर है. बजट सत्र के दौरान 25 मार्च को पेश किए गए इस विधेयक को लेकर संसद के मानसून सत्र में भी सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है. कांग्रेस और टीएमसी समेत विपक्षी दल विधेयक का विरोध कर रहे हैं और इसमें बदलाव करने या इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इसलिए सरकार अब बिल को आगे की जांच और विस्तृत चर्चा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने पर विचार कर रही है.
क्या होती है JPC?
संयुक्त संसदीय समिति (JPC) संसद की एक अस्थायी समिति होती है, जिसका गठन किसी खास विधेयक, नीति, मामले या वित्तीय गड़बड़ी की विस्तार से जांच के लिए किया जाता है. इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद शामिल होते हैं. आमतौर पर JPC में 31 सदस्य होते हैं, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा से होते हैं. समिति में सत्तापक्ष और विपक्ष को उनकी संसदीय संख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसका अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष द्वारा समिति के सदस्यों में से नियुक्त किया जाता है.
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संयुक्त संसदीय समिति के पास क्या अधिकार होते हैं?
जेपीसी को किसी विधेयक या वित्तीय मामले की जांच के लिए कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए जाते हैं. समिति सबूत और दस्तावेज जुटा सकती है, सरकारी विभागों, संस्थानों या संबंधित लोगों से जरूरी जानकारी मांग सकती है. इसके अलावा, जेपीसी विशेषज्ञों, अधिकारियों और गवाहों को बुलाकर उनसे सवाल-जवाब भी कर सकती है. जरूरत पड़ने पर समिति मामले की जमीनी स्थिति समझने के लिए अलग-अलग जगहों का दौरा कर सकती है. आमतौर पर समिति की कार्यवाही और रिपोर्ट को गोपनीय रखा जाता है, हालांकि जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार कुछ दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से रोक सकती है.
संयुक्त संसदीय समिति कैसे काम करती है?
JPC का गठन संसद किसी खास विधेयक या बड़े सार्वजनिक मुद्दे की विस्तृत जांच के लिए करती है. इसके लिए पहले संसद के किसी एक सदन में प्रस्ताव लाया जाता है, जिसे पारित होने के बाद दूसरे सदन की मंजूरी मिलती है. समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद शामिल होते हैं और आमतौर पर लोकसभा के सदस्यों की संख्या राज्यसभा से दोगुनी होती है. इसकी अध्यक्षता लोकसभा के किसी सदस्य को दी जाती है, जिसे लोकसभा अध्यक्ष नियुक्त करते हैं. जांच के दौरान JPC विशेषज्ञों, अधिकारियों और संबंधित पक्षों से सवाल पूछने के साथ दस्तावेज और मौखिक या लिखित सबूत जुटा सकती है. पूरी जांच के बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करती है और रिपोर्ट सौंपने के साथ ही JPC का कार्यकाल समाप्त हो जाता है.
क्या है FCRA बिल?
FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम का मकसद भारत में एनजीओ, ट्रस्ट और दूसरे संगठनों को मिलने वाले विदेशी फंड पर निगरानी रखना है, ताकि इसका इस्तेमाल देश की सुरक्षा या आंतरिक मामलों को प्रभावित करने के लिए न हो. इसके तहत विदेशी चंदा लेने वाले संगठनों का गृह मंत्रालय में पंजीकरण जरूरी है, जबकि राजनेता, चुनावी उम्मीदवार, जज, सरकारी कर्मचारी और पत्रकार जैसे कुछ वर्ग विदेशी अंशदान नहीं ले सकते. 2026 के प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक में विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों को लेकर भी नए प्रावधान किए गए हैं. इसके तहत किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द या खत्म होने पर ऐसी संपत्तियां सरकार द्वारा नियुक्त ‘नामित प्राधिकारी’ के नियंत्रण में जा सकती हैं. वहीं, कुछ उल्लंघनों में अधिकतम सजा को 5 साल से घटाकर 1 साल करने का प्रस्ताव है.
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FCRA बिल को JPC में भेजने से क्या होगा?
FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे जाने से अब इसके प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा और समीक्षा होगी. समिति विवादित प्रावधानों, खासकर विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन, पर गहराई से विचार करेगी. इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के साथ विशेषज्ञों, संबंधित संगठनों और अन्य पक्षों की राय भी ली जा सकती है. JPC के पास जाने से संसद में बिल को लेकर जारी गतिरोध कम होने की उम्मीद है, लेकिन समिति की जांच और रिपोर्ट में समय लगने के कारण बिल के तुरंत कानून बनने की संभावना नहीं रहेगी.
JPC में बिल भेजना सत्ता पक्ष के लिए फायदेमंद
किसी विवादित विधेयक को JPC के पास भेजना सरकार के लिए तत्काल राजनीतिक दबाव कम करने का रास्ता हो सकता है. इससे संसद में जारी हंगामा और विरोध टल सकता है और सरकार को बिल पर दोबारा विचार के लिए समय मिल जाता है. JPC में सांसदों के साथ विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की राय भी ली जा सकती है, जिससे सरकार को विधेयक के प्रावधानों को बेहतर तरीके से समझने और जरूरी बदलाव करने का मौका मिलता है.साथ ही, विस्तृत चर्चा की प्रक्रिया से सरकार यह संदेश दे सकती है कि कानून जल्दबाजी में नहीं बनाया जा रहा है. हालांकि, JPC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, इसलिए अंतिम फैसले में सरकार के पास पर्याप्त गुंजाइश रहती है.
JPC में बिल भेजना सत्ता के लिए घाटा
JPC के पास भेजे जाने का सबसे बड़ा नुकसान विधेयक की प्रक्रिया में देरी है. समिति को जांच, विशेषज्ञों से चर्चा और रिपोर्ट तैयार करने में समय लग सकता है, जिससे सरकार का प्रस्तावित कानून लंबे समय तक अटका रह सकता है. इसके अलावा, विपक्ष को बिल के प्रावधानों पर विस्तार से सवाल उठाने और सरकार की नीतियों की आलोचना करने का एक मंच मिल जाता है. राजनीतिक तौर पर विपक्ष इसे सरकार के दबाव में पीछे हटने के रूप में भी पेश कर सकता है. ऐसे में JPC सरकार के लिए तत्काल टकराव तो कम कर सकती है, लेकिन लंबे समय में राजनीतिक बहस और जांच का दायरा बढ़ा सकती है.
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इंतजार खत्म! श्रीलंका के स्क्वाड का हुआ ऐलान, भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज से 2 बड़े खिलाड़ी बाहर, 3 नए चेहरों को मिला मौका
Sri Lanka squad : भारत के खिलाफ होने वाली 2 टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए श्रीलंका क्रिकेट ने अपना स्क्वाड अनाउंस कर दिया है. श्रीलंका क्रिकेट टीम से पथुम निसांका और कुसल मेंडिल बाहर हो गए हैं. इस टीम की कप्तानी धनंजय डी सिल्वा को मिली है, जो शुभमन गिल की सेना के साथ 15 अगस्त से लेकर 27 अगस्त तक लड़ते हुए नजर आएगी.
भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए श्रीलंका का स्क्वाड
धनंजय डी सिल्वा (कप्तान), लाहिरू उदारा, निशान मदुश्का, कामिंदु मेंडिस (उपकप्तान), दिनेश चांदीमल, पसिंदु सोरियाबंदरा, सोनल दिनुशा, निरोशन डिकवेला (विकेट कीपर), रमेश मेंडिस, प्रभात जयसूर्या, केशर नुवांथा, मिलन रथनायके, असिथा फर्नांडो, लाहिरू कुमारा, विश्व फर्नांडो, दिलशान मदुश्का.
????BREAKING
— RevSportz Global (@RevSportzGlobal) August 12, 2026
Sri Lanka squad for the Galle Test:
Dhananjaya de Silva (c), Lahiru Udara, Nishan Madushka, Kamindu Mendis (vc), Dinesh Chandimal, Pasindu Sooriyabandara, Sonal Dinusha, Niroshan Dickwella (wk), Ramesh Mendis, Prabath Jayasuriya, Keshara Nuwantha, Milan Rathnayake,…
इन खिलाड़ियों को स्क्वाड में मिला मौका
श्रीलंका क्रिकेट टीम के स्क्वाड में 54 टेस्ट खेल चुके निरोशन डिकवेला की वापसी हुई है. इस अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज ने अपना आखिरी टेस्ट मुकाबला साल 2023 में खेला था. उन्होंने टीम में विकेटकीपर कुसल मेंडिस को रिप्लेस किया है. इसके साथ ही टीम में असिथा फर्नांडो को शामिल किया गया है, जो श्रीलंका क्रिकेट टीम के पेस-बॉलिंग अटैक को लीड करेंगी, जिसमें लाहिरू कुमारा और विश्व फर्नांडो को भी शामिल किया गया है.
इस टीम की कप्तानी धनंजय डी सिल्वा को मिली है. उनके साथ बैटिंग लाइन-अप में कामिंडू मेंडिस, दिनेश चांदीमल और लाहिरू उदारा शामिल होंगे. वहीं पथुम निसांका की जगह पर टीम में निशान मदुश्का को टॉप-ऑर्डर बैटर के तौर पर शामिल किया गया है. इस बार श्रीलंका के स्क्वाड का ऐलान होने में इस लिए देरी हुई क्योंकि बोर्ड और चयनकर्ता मेंडिस और निसांका के फिटनेस पर अपडेट आने का इंतजार कर रहा था.
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